शाही ठाठ के साथ CM रूपाणी की मौजूदगी में हुआ मांधातासिंह का राज्याभिषेक, बने 3 वर्ल्ड रिकॉर्ड
राजकोट. गुजरात में राजसी परिवार के युवराज मांधातासिंहजी जडेजा का शाही ठाठ के साथ राज्याभिषेक किया गया। मांधातासिंहजी जडेजा राजकोट के 17वें राजा बने। 27 जनवरी से चल रहे इस समारोह में 3 वर्ल्ड रिकॉर्ड बने, जिनसे राजकोट की दुनियाभर में चर्चा होने लगी। इस अवसर पर मुख्यमंत्री विजय रूपाणी भी समारोह में मौजूद रहे। परंपरागत रीति-रिवाजों से चल रहे इस समारोह के कारण शहरभर में राजाशाही माहौल व्याप्त है।

5000 से ज्यादा दीप जलाकर राजचिन्ह बनाने का रिकॉर्ड बना
संवाददाता ने बताया कि, मांधातासिंहजी के राज्याभिषेक के अवसर पर, पहलीबार 5000 से ज्यादा दीप जलाकर राजचिन्ह बनाने का रिकॉर्ड बना। राज्याभिषेक की पूर्व संध्या को विविध समुदाय के 300 से ज्यादा लोगों द्वारा दीप जलाए गए थे। जिसमें 5000 से ज्यादा दीप जलाकर राजकोट के राजवी परिवार का राजचिन्ह बनाया गया था। 450 साल के इतिहास में पहली बार दीप के माध्यम से किसी राजवी परिवार का राजचिन्ह बनाया गया। जो अपने आप में रिकॉर्ड है। जिसके चलते लंदन बुक ऑफ रिकॉर्ड्स ने यह रिकॉर्ड दर्ज कर मांधातासिंह जडेजा को इसका सर्टिफिकेट सौंपा।

2126 राजपूत भाई-बहनों ने बनाया तलवार रास का रिकॉर्ड
एक अन्य रिकॉर्ड यह बना कि, 2126 राजपूत भाई-बहनों ने तलवार रास रचा। यूं तो गुजरात में गरबा का अनूठा महत्व है। किंतु, अब जो राजपूत समुदाय द्वारा किया गया, वो तलवार रास आकर्षण का केंद्र रहा। मांधातासिंहजी के राजतिलक समारोह के तहत 28 जनवरी को शहर के ड्राइव इन सिनेमा ग्राउंड में परंपरागत तलवार रास का आयोजन हुआ। जिसमें 2126 राजपूत भाई-बहनों ने परंपरागत पोशाक में 9.49 मिनट तलवार रास लेकर गिनीज बुक ऑफ रिकॉर्ड में अपना नाम दर्ज करवाया था।

31 तीर्थजल, 100 मुलिया, 14 प्रकार की मिट्टी से जलाभिषेक का रिकॉर्ड
राजतिलक समारोह के तहत जलाभिषेक का रिकॉर्ड भी बना। जिसके लिए, 31 तीर्थजल, 100 मुलिया समेत 14 प्रकार की मिट्टी से 51 ब्राह्मणों द्वारा मांधातासिंह का अभिषेक किया गया।

इस प्रकार जलाभिषेक करने की मान्यता
14 प्रकार की मिट्टी में सोमनाथ समुद्र, गौशाला, बैल के पैर, रथ के पहिये, राजमहल, पीपल के पेड़, गिरनार स्थित अंबाजी मंदिर और हाथीदांत से ली गई मिट्टी शामिल की गई। इस प्रकार जलाभिषेक करने से राजा के शरीर में देवी देवताओं का निवास होने की परंपरागत मान्यता है। लंदन बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्डस द्वारा इस अनूठे जलाभिषेक का रिकॉर्ड भी दर्ज किया गया।












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