Jhunjhunu Shaheed: पति की शहादत की सूचना मिलते ही पार्थिव देह लेने 2 घंटे में उधमपुर पहुंचीं वीरांगना
देश को सबसे ज्यादा फौजी देने वाले झुंझुनूं के नायब सूबेदार देवकरण सिंह शहीद हो गए। उनकी पार्थिव देह लेने के लिए पत्नी शहादत के दो घंटे बाद ही उद्यमपुर पहुंच गई।

राजस्थान के झुंझुनूं में शहीद सूबेदार देवकरण सिंह को उनके गांव में अंतिम विदाई दी गई। शहीद को आखिरी सैल्यूट करने और शवयात्रा में शामिल होने के लिए जैन सैलाब उमड़ा। शहीद देवकरण सिंह झुंझुनूं जिले के मलसीसर उपखंड की ग्राम पंचायत कालियासर में ढाणी बुरकड़ान के रहने वाले थे। गांव में राजकीय सम्मान से उनका अंतिम संस्कार किया गया। युवाओं ने मलसीसर से लेकर उनके गांव तक नौ किलोमीटर लंबी तिरंगा यात्रा निकाली।
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शवयात्रा में आए लोगों ने 'शहीद देवकरण अमर रहे' के नारों से आसमां गूंजा दिया। तिरंगा यात्रा में शहीद वीरांगना भी साथ थी। इस तिरंगा यात्रा में शहीद वीरांगना अंजू भी साथ रही। जिन्होंने भी अपने शहीद पति के अमर रहे के नारे लगाए। शहीद के पिता व भाई भी भारतीय सेना में हैं। देवकरण दस दिन बाद गांव आने का वादा करके गए थे। अब वे लौटे तो सही, मगर तिरंगे में लिपटकर।

बता दें कि इन दिनों देवकरण सिंह की तैनाती कारगिल की पहाड़ी पर ऑपरेशन रक्षक में थी। वहां 13 फरवरी को उनकी सांस लेने तकलीफ हुई। तब उन्हें एयर लिफ्ट के जरिए मिलट्री अस्पताल कारगिल ले लाया गया। वहां से उनको हायर सेंटर मिलट्री अस्पताल उधमपुर भेजा गया। वहां पर रविवार सुबह उन्होंने आखिरी सांस ली।
पति की शहादत की सूचना पर वीरांगना अंजू दो घंटे में उधमपुर पहुंच गई थी। पार्थिव देह सबसे पहले मलसीसर पुलिस थाने में लाई गई। यहां से तिरंगा यात्रा निकाली। तिरंगा यात्रा के दौरान वीरांगना शहीद की पार्थिव देह के साथ ट्रक में बैठी रही।

गांव में शहीद का अंतिम संस्कार किया गया। शहीद देवकरण के बेटे निखिल व कुनाल ने उनकी चिता को मुखाग्नि दी। झुंझुनूं सांसद नरेंद्र कुमार खीचड़, जिला कलेक्टर लक्ष्मण सिंह कुड़ी, एसपी मृदुल कच्छावा, मंडावा विधायक रीटा चौधरी व मलसीसर एसएचओ गोपालसिंह थालौड़ आदि ने पुष्प चक्र अर्पित कर श्रद्धांजलि दी।












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