राजस्थान गौरव यात्रा इस तरह से बनी वसुंधरा के गले की फांस, 25 को कोर्ट तय करेगा भविष्य
जयपुर। राजस्थान की वसुंधरा राजे सरकार का 'राजस्थान गौरव यात्रा' को लेकर हर पासा उल्टा पड़ रहा है। वीवीआईपी विजिट के नाम से पैसा खर्च करने की ट्रिक भी लंबी नहीं चल पाई और शुरू होते ही पकड़ में आ गई है। राजस्थान हाईकोर्ट को भी सरकार के इस दांव का पता चल गया है और इससे खिलाफ संबंधित दस्तावेज भी कोर्ट में पेश कर दिए गए हैं। अब भाजपा और सरकार को 25 अगस्त को जवाब देना भारी पड़ सकता है। सरकार और भाजपा को अपने बचाव में नए-नए तर्क गढ़ने पड़ रहे हैं, फिर भी राहत नहीं मिल रही है। राजनीतिक मंच से लेकर कोर्ट तक में वसुंधरा सरकार घिरती नजर आ रही है।

वसुंधरा राजे की 'राजस्थान गौरव यात्रा' को लेकर सरकारी धन और मशीनरी के दुरूपयोग के लगे आरोपों से उपजा विवाद थमने का नाम नहीं ले रहा है। राजस्थान हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश प्रदीप नान्द्रजोग और न्यायाधीश जीआर मूलचंदानी की खंडपीठ में याचिकाकर्ता विभूति भूषण शर्मा द्वारा राज्य सरकार पर गलत जानकारी कोर्ट में पेश करने का आरोप लगाया गया है। विभूति भूषण शर्मा ने सरकार की ओर से प्रकाशित शुद्धि पत्र का हवाला देते हुए कहा गया कि राज्य सरकार ने अदालत में शपथ पत्र पेश कर सरकारी संसाधनों के उपयोग के संबंध में गलत जानकारी दी है। याचिकाकर्ता की ओर से दस्तावेज पेश कर कहा गया कि राज्य सरकार की ओर से राजस्थान गौरव यात्रा पर किए जा रहे सरकारी खर्च को अब वीवीआईपी विजिट के नाम पर खर्च कर रही है। याचिकाकर्ता ने मांग की है कि ऐसे में गलत शपथ पत्र देने वाले पर कार्रवाई की जाए। जिस पर सुनवाई करते हुए खंडपीठ ने दोनों पक्षों को जवाब देने के लिए 25 अगस्त का समय दिया है।

प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष सचिन पायलट और कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव अशोक गहलोत ने कहा है कि सरकारी धन और सरकारी मशीनरी का भयानक रूप से दुरूपयोग की बाद जाहिर हो चुकी है, तो तुरंत इस यात्रा पर रोक लगानी चाहिए। वसुंधरा राजे हाईकोर्ट की अवमानना कर रही है, उन्हें तुरंत हाईकोर्ट व जनता से माफी मांगनी चाहिए।
गौरतलब है कि राजस्थान सरकार ने राजस्थान हाईकोर्ट में कहा था राजस्थान गौरव यात्रा कतई सरकारी नहीं है और इसमें सरकारी पैसा व मशीनरी का उपयोग नहीं किया जा रहा है। मुख्यमंत्री इस यात्रा में शामिल हो रही हैं और मुख्य प्रशासक के तौर पर आमजन को सरकारी की योजनाओं की जानकारी दे रही हैं। राज्य सरकार मुख्यमंत्री के प्रोटोकॉल, सुरक्षा और अन्य व्यवस्थाएं करने के लिए बाध्य है, लेकिन इसे गौरव यात्रा से जोडकर नहीं देखा जाना चाहिए। इस संबंध में सरकारी विभागों के लिए गलती से जारी आदेशों को वापस ले लिया गया है।












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