अजीब मामला: पेट में जुड़वां बच्चों के बीच झगड़े में एक बच्चे की मौत, प्रसूता व परिजनों ने मचाया हंगामा

जयपुर। राजस्थान की राजधानी जयपुर में जुड़वा बच्चों से जुड़ा एक अजीब मामला सामने आया है। इसमें पेट में ही दो जुड़वा बच्चों के बीच झगड़ा होने और उसमें एक बच्चे की मौत हो जाने का दावा किया जा रहा है। मामला जयपुर के चांदपोल स्थित जनाना अस्पताल का है।

Twins baby fighting in their mother womb, one dead
हुआ यूं कि शनिवार को एक प्रसूता के परिजनों ने अस्पताल प्रशासन पर दो जुड़वा बच्चों में से एक बच्चा नहीं देने का आरोप लगाते हुए हंगामा मचा दिया। प्रसूता व उसके परिजनों का तर्क था कि दो जुड़वा बच्चे जन्मे थे, मगर उन्हें एक ही बच्चा दिया गया।

प्रसूता को दिया गया सिर्फ एक ही बच्चा

जयपुर में ही हाथोज के आगे माचवा निवासी प्रसूता रमा देवी के अनुसार 19 जून 2019 को अस्पताल से बाहर निजी जांच केन्द्र पर सोनोग्राफी करवाई थी। 9 जुलाई को जनाना अस्प्ताल में आए। यहां भी सोनोग्रापफी में उसके पेट में जुड़वा बच्चे ही बताए गए। 10 जुलाई को उसे लेबर रूम में लिया गया। जुड़वा बच्चे होने की बात कहकर उसका आपरेशन सीनियर डॉक्टरों से करवाने की बात कही गई।बाद में उसे एक बच्चा थमा दिया गया।

महिला के साथ कुछ स्वयंसेवी संगठनों के प्रतिनिधि भी मौजूद थे। प्रसूता का कहना था कि प्रसव के बाद उसे एक शिशु 'लड़का' दिया गया। दूसरे शिशु के लिए पूछने पर उसे बताया गया कि वह पेट में ही खत्म हो गया, लेकिन मृत बच्चा भी उसे नहीं सौंपा गया। इस पर उन्हें किसी गड़बड़ी की आशंका जताते हुए हंगामा खड़ा कर दिया।

दूसरे बच्चे की सलामती की धमकी
मामला बढ़ने पर पुलिस भी जनाना अस्पताल में पहुंच गई। तब अस्पताल प्रशासन को दी
लिखित शिकायत में प्रसूता व उसके परिजनों ने बताया कि अस्पताल के स्टाफ ने उन्हें बताया कि दोनों बच्चों ने पेट में ही झगड़ा किया, जिसमें एक मर गया। मरने वाले बच्चे को गटर में फैंक दिया। जो करना हैं कर लें। शिकायत में यहां तक लिखा गया है कि उन्हें यह धमकी भी दी गई कि यदि दूसरे बच्चे की सलामती चाहती हैं तो चुप रहें।

जांच रिपोर्ट और अन्य दस्तावेज नहीं दिए
प्रसूता व अन्य प्रतिनिधियों का कहना था कि पूरा मामला सामने आते ही अस्पताल के डॉक्टरों ने उसे उसके प्रसव से संबंधित जांच रिपोर्ट और अन्य दस्तावेज नहीं दिए। इतना ही नहीं ऑपरेशन से प्रसव होने के बावजूद उसे अस्पताल से डिस्चार्ज करने की तैयारी भी कर ली गई। प्रसूता का आरोप है कि उन्हें यह भी कहा जा रहा है कि मामले को ज्यादा बढ़ाया तो दूसरा बच्चा भी नहीं मिलेगा।

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