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Bhilwara Model : ये हैं वो 4 किरदार जिन्होंने भीलवाड़ा में रोकी कोरोना वायरस की बढ़ती रफ़्तार

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भीलवाड़ा। देश में तेजी से फैल रहे कोरोना वायरस के संक्रमण की चेन तोड़ने के लिए जिस नाम का जिक्र बड़ी उम्मीद के साथ किया जा रहा है वो है भीलवाड़ा मॉडल। यानि राजस्थान में कोविड-19 के मामले में सबसे पहले हॉटस्पॉट भीलवाड़ा के प्रशासन ने वो कमाल कर दिखाया जिसकी देशभर में चर्चा है। आईए जानते हैं कुछ ऐसे किरदारों के बारे में जिन्होंने कोरोना वायरस की रफ़्तार को रोककर भीलवाड़ा मॉडल को पहचान दिलाई।

 राजेन्द्र कुमार भट्ट, जिला कलेक्टर, भीलवाड़ा

राजेन्द्र कुमार भट्ट, जिला कलेक्टर, भीलवाड़ा

मूलरूप से जोधपुर जिले के रहने वाले आईएएस राजेन्द्र कुमार भट्ट भीलवाड़ा के 48वें जिला कलेक्टर हैं। दिसम्बर 2018 में डूंगरपुर से इनको भीलवाड़ा लगाया गया था। बतौर जिला कलेक्टर यह इनकी दूसरी पोस्टिंग है। 19 मार्च को भीलवाड़ा में कोरोना वायरस के पॉजिटिव मरीज सामने आए तभी से कलेक्टर राजेन्द्र कुमार भट्ट ने इसे गंभीरता से लिया। कोरोना वायरस से प्रभावित शहर के ब्रजेश बांगड़ अस्पताल को सील करवाकर आस-पास के इलाके में कर्फ्यू लगवाया और फिर तीन से 13 अप्रैल तक के लिए महा कर्फ्यू के आदेश जारी किए।

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राकेश कुमार, अतिरिक्त जिला कलेक्टर, भीलवाड़ा

राकेश कुमार, अतिरिक्त जिला कलेक्टर, भीलवाड़ा

भीलवाड़ा के अतिरिक्त जिला कलेक्टर (एडीएम) राकेश कुमार झुंझुनूं जिले के खेतड़ी उपखंड के गांव बसई के रहने वाले हैं। भीलवाड़ा में कोरोना पॉजिटिव केस आने शुरू हुए तो खुद एडीएम राकेश कुमार भी रातभर कलेक्ट्रेट में डटे रहे। रातभर प्लान बनाया और तय किया कि कोरोना से चुनाव पैटर्न पर निपटा जाएगा। कंट्रोल बनाने के साथ-साथ चुनाव में काम करने वाले कर्मचारियों को अलग-अलग जिम्मेदारी सौंपी गई। मीडिया से बातचीत में राकेश कुमार बताते हैं कि भीलवाड़ा में कोरोना एक निजी अस्पताल से फैलना शुरू हुआ था। वहां जो डॉक्टर, नर्स, अन्य स्टाफ व मरीज कोरोना संक्रमित हो चुके थे। उनकी पहचान करने के साथ-साथ इसे आगे फैलने से रोकने में सफल रहे।

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उदयपुर के इन डॉक्टरों ने सबसे पहले संभाला मार्चा

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भीलवाड़ा मॉडल में जहां प्रशासन की रणनीति कारगर साबित हुई। वहीं, डॉक्टरों की हिम्मत भी काबिले तारीफ है। भीलवाड़ा में कोरोना वायरस के खिलाफ सबसे पहला मोर्चा उदयपुर के डॉ. बीएल मेघवाल और डॉ. गौतम बुनकर ने संभाला। आरएनटी मेडिकल कॉलेज में एसोसिएट प्रोफेसर पीडियाट्रिक्स डॉ. बीएल मेघवाल मीडिया से बातचीत में कहते हैं कि 19 मार्च को भीलवाड़ा में कोरोना का केस सामने आने पर सबसे पहले उदयपुर से एम्बुलेंस से उनकी टीम रवाई हुई। पूरे हॉस्पिटल को एपिसेंटर मानते हुए कार्यवाही शुरू की। लोगों की स्क्रीनिंग की। जो भी लोग संदिग्धों के संपर्क में आए और जो उनके संपर्क में थे सभी की डिटेल्स जुटाई। सुबह से जो काम शुरू होता था वो अगली सुबह 4 बजे तक चलता ही रहता था। इस दौरान खुद की सेफ्टी भी रखना बहुत बड़ी चुनौती थी लेकिन हमें गर्व है कि हमारी टीम ने बहुत अच्छा काम किया। उसी की बदौलत आज भीलवाड़ा रोल मॉडल बन गया है।

 20 दिन से नहीं गए घर

20 दिन से नहीं गए घर

आरएनटी मेडिकल कॉलेज में असिस्टेंट प्रोफेसर मेडिसिन डॉ. गौतम बुनकर कहते हैं कि भीलवाड़ा में जिस तरह रात-दिन काम में जुटेरहे, वे पल जिंदगी में यादगार ही रहेंगे। पूरी टीम ने बहुत अच्छा काम किया। हमारी एक भी चूक किसी की भी जान पर भारी पड़ सकती थी, इसलिए बारीक से बारीक पॉइंट्स पर काम किया। ऐसी परिस्थितियों में काम करने का अलग अनुभव हुआ है और खुद को और शायद मजबूत कर लिया है। घर पर गए लगभग 20 दिन हो गए हैं।

English summary
These are four characters who stopped rise of CoronaVirus in Bhilwara
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