राजस्थान : सपा की टिकट दिलाने के नाम पर 58 लाख का धोखा, अब आया यह नया मोड़

जयपुर। राजस्थान विधानसभा चुनाव 2018 में कथित तौर पर समाजवादी पार्टी (सपा) का टिकट दिलवाने के नाम पर 58 लाख की धोखाधड़ी किए जाने के मामले में नया मोड़ आ गया है। अब इस मामले की जांच सीबीआई से करवाई जाएगी।

Samajwadi party ticket fraud case of Rajasthan election 2018

राजस्थान हाईकोर्ट के महेंद्र माहेश्वरी ने मामले की सुनवाई करते हुए सीबीआइ के जांच अधिकारी को 15 नवंबर को होने वाली अगली सुनवाई के दिन केस डायरी सहित कोर्ट में उपस्थित होने के आदेश दिए हैं। राजस्थान हाईकोर्ट ने सीबीआइ निदेशक से कहा है कि जांच के दौरान यह अवश्य देखा जाए कि क्या राजस्थान विधानसभा चुनाव 2018 में टिकट की खरीद-फरोख्त का दायरा प्रार्थी और शिकायतकर्ता तक ही सीमित है या फिर अन्य लोगों के साथ भी लेनदेन हुआ है या नहीं।

क्या है मामला

जयपुर निवासी राकेश खंडेलवाल ने जरिए इस्तगासे श्याम नगर पुलिस थाने में मामला दर्ज कराया था कि उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद निवासी अनूप चौधरी ने जनवरी 2018 में उसे 25 करोड़ का लोन दिलाने के बदले उससे 58 लाख रुपये की रकम रिश्वत के रूप में ली थी। इस संबंध में चौधरी ने उसके साथ लिखित में एग्रीमेंट भी किया था, लेकिन ना तो उसे लोन दिलाया और ना ही उसकी रकम लौटाई। शिकायत के आधार पर जयपुर पुलिस मामले की जांच करती हुई अनूप चौधरी को गिरफ्तार करने गाजियाबाद पहुंची।

पार्टी फंड में रुपए लेने का तर्क दिया

गिरफ्तारी से पहले ही अनूप चौधरी ने राजस्थान हाईकोर्ट में एक याचिका दायर करते हुए कहा कि मैंने राकेश खंडेलवाल से 58 लाख रुपये समाजवादी पार्टी की सदस्यता और विधानसभा चुनाव में टिकट दिलाने के लिए पार्टी फंड में लिए थे। टिकट नहीं मिलने पर लोन दिलाने के एग्रीमेंट पर राकेश खंडेलवाल ने अपने साथियों के साथ मिलकर जबरन हस्ताक्षर करवाए थे। इस संबंध में उसने दिल्ली पुलिस में शिकायत देने के साथ ही दिल्ली हाईकोर्ट में सुरक्षा दिलाने की याचिका दायर कर रखी है। यह याचिका अभी लंबित है। इस पर राजस्थान हाईकोर्ट ने 25 नवंबर को होने वाली अगली सुनवाई तक अनूप चौधरी की गिरफ्तारी नहीं करने के निर्देश दिए हैं।

झूठे मामले में फंसाने का आरोप

अपून चौधरी ने राजस्थान हाईकोर्ट में लिखित में दिया कि मैंने राकेश खंडेलवाल को विधानसभा चुनाव 2018 में समाजवादी पार्टी का टिकट दिलाने के लिए पैसे लिए थे। लेकिन पार्टी ने उसे टिकट नहीं दिया तो उसे झूठे मामले में फंसा दिया गया। पार्टी ने रुपये भी लिए, लेकिन टिकट नहीं दिया। अनूप चौधरी ने खुद को तृणमूल कांग्रेस की यूपी इकाई का पूर्व अध्यक्ष बताते हुए कहा कि वह साल 2014 में समाजवादी पार्टी में शामिल हुआ था। साल 2018 में विधानसभा चुनाव के दौरान वह राजस्थान के टिकट तय करने वाले नेताओं में शामिल था।

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