Ravindar Singh Bhati: बाड़मेर में रविंद्र भाटी की हार के 4 कारण, क्या एक बयान ने हरवा दी जीती बाजी ?
Ravidar Singh Bhati Barmer: लोकसभा चुनाव 2024 में बाड़मेर-जैसलमेर सीट पर कांग्रेस के उम्मेदाराम बेनीवाल की जीत से ज्यादा निर्दलीय शिव विधायक रविंद्र सिंह भाटी की हार की चर्चा अधिक है।
4 जून 2024 को हुई मतगणना में कांग्रेस के उम्मेदाराम बेनीवाल 704676 व रविंद्र सिंह भाटी ने 586500 मत हासिल किए। बेनीवाल की जीत का अंतर 118176 वोट रहा। भाजपा उम्मीदवार व मौजूदा सांसद कैलाश चौधरी 286733 वोट लेकर तीसरे स्थान पर रहे।

राजस्थान में महज 26 साल की उम्र में बाड़मेर की शिव सीट से विधायक बनकर इतिहास रचने वाले रविंद्र सिंह भाटी लोकसभा चुनाव में फेल कैसे हो गए? पहले जोधपुर विश्वविद्यालय से छात्रसंघ अध्यक्ष व बाद में विधायक बने रविंद्र सिंह भाटी बाड़मेर के सांसद क्यों नहीं बन पाए?
रविंद्र सिंह भाटी की हार के 4 कारण
1. जातीय समीकरण
बाड़मेर-जैसलमेर सीट पर राजपूत समाज से रविंद्र सिंह भाटी, जाट समाज से भाजपा के कैलाश चौधरी व उम्मेदाराम बेनीवाल के बीच त्रिकोणीय मुकाबला रहा। भाटी जाट समाज के वोटों में सेंध नहीं लगा पाए और अकेले राजपूत समाज के वोट उनको जीत नहीं दिलवा सके।
2. इस बयान ने पलटी बाजी
कहा जाता है कि चुनाव प्रचार के दौरान रविंद्र सिंह भाटी ने कहा था कि दिल्ली में मोदी, बाड़मेर में भाटी। इस बयान से दलित व मुस्लिम समाज के वोट भाटी को नहीं मिल पाए। उन्हें डर था कि भाजपा में जाने वाले मजबूत हुए तो 'संविदान में बदलाव'हो जाएगा।
3. परफॉर्मेंस
रविंद्र सिंह भाटी ने पांच माह पहले ही विधानसभा चुनाव जीता था। लोकसभा चुनाव आचार संहिता की वजह से जनता के ज्यादा काम नहीं कर पाए। सियासत के जानकारों का कहना है कि रविंद्र भाटी को पहले पांच साल तक शिव विधायक रहकर जनता के काम करने थे। फिर लोकसभा चुनाव में भाग्य आजमाते।
4. संसाधनों का अभाव
बाड़मेर-जैसलमेर संसदीय क्षेत्र राजस्थान में भारत-पाकिस्तान सीमा पर स्थित सबसे विशाल सीटों में से एक है। रविंद्र सिंह भाटी ने निर्दलीय चुनाव लड़ा। कांग्रेस-भाजपा उम्मीदवारों की तुलना में भाटी के पास संसाधनों की कमी भी खली।












Click it and Unblock the Notifications