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राजस्थान राजनीतिक संकट के बीच कांग्रेस के पास हैं ये 4 विकल्प, क्या शीर्ष नेतृत्व सुलझा पाएगा कलह?

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जयपुर, 26 सितंबर। राजस्थान कांग्रेस विधायकों ने जिस तरह से खुलकर बगावती सुर दिखाए हैं उसने पार्टी के शीर्ष नेतृत्व के सामने बड़ी चुनौती खड़ी कर दी है। पार्टी के विधायकों ने अशोक गहलोत के समर्थन में खुलकर बगावत कर दी है, जिसके चलते प्रदेश में विधायक दल के नए नेता के चुनाव में बड़ी बाधा खड़ी हो गई है। अशोक गहलोत अगर पार्टी के अध्यक्ष पद का चुनाव लड़ते हैं तो आखिर कौन उनकी जगह पर प्रदेश में मुख्यमंत्री का पद संभालेगा इसको लेकर बड़ा सवाल खड़ा हो गया है। पहले माना जा रहा था कि सचिन पायलट को प्रदेश का मुख्यमंत्री बना दिया जाएगा, लेकिन गहलोत के समर्थन में विधायकों की बगावत ने पूरे सियासी समीकरण को बिगाड़ कर रख दिया है।

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क्या है गहलोत समर्थक विधायकों की

क्या है गहलोत समर्थक विधायकों की

गहलोत का समर्थन कर रहे विधायक सचिन पायलट को मुख्यमंत्री बनाए जाने का खुलकर विरोध कर रहे हैं। ये विधायक चाहते हैं कि 19 अक्टूबर को कांग्रेस अध्यक्ष पद के चुनाव के नतीजे आने के बाद ही इसपर कोई फैसला लिया जाए कि प्रदेश का अगला मुख्यमंत्री कौन होगा। तकरीबन 92 विधायकों ने गहलोत के समर्थन में बगावत की है। इन विधायकों ने विधानसभा स्पीकर सीपी जोशी को अपना इस्तीफा सौंप दिया है। वहीं सचिन पायलट गुट को इस बात का भरोसा है कि पार्टी का शीर्ष नेतृत्व अपने वादे पर कायम रहेगा, जिसने उन्हें भरोसा दिया था कि वह प्रदेश के अगले मुख्यमंत्री होंगे।

निराश पर्यवेक्षक लौटे

निराश पर्यवेक्षक लौटे

जिस तरह से विधायकों ने अपनी राय सामने रखी है और कांग्रेस पर्यवेक्षक मल्लिकार्जुन खड़गे, अजय माकन से मुलाकात करने से इनकार कर दिया। माना जा रहा है कि सचिन पायलट और अशोक गहलोत जल्द ही दिल्ली पहुंच सकते हैं और पार्टी के शीर्ष नेतृत्व से मुलाकात कर सकते हैं। खड़गे और माकन दिल्ली वापस लौट रहे हैं, दोनों नेता राजस्थान की स्थिति को लेकर अपनी रिपोर्ट सोनिया गांधी को सौंपेंगे। ऐसे में आइए डालते हैं एक नजर उन मौजूदा विकल्पों पर जो राजस्थान की राजनीति में संभावित हैं।

पहला विकल्प

पहला विकल्प

कांग्रेस के शीर्ष नेतृत्व ने पार्टी के अध्यक्ष पद के लिए दूसरे नेताओं को चुना है। गांधी परिवार ने पहले ही साफ कर दिया है कि वह अध्यक्ष पद की रेस में नहीं है। ऐसे में अशोक गहलोत ने अध्यक्ष पद के चुनाव के लिए अपनी पहले ही इच्छा जाहिर कर दी थी, लेकिन वह इसके साथ ही यह भी चाहते थे कि वह पार्टी के अध्यक्ष के साथ प्रदेश के मुख्यमंत्री पद पर भी बने रहें। वह दोनों ही पदों को अपने पास रखने के इच्छुक हैं, ऐसे में पार्टी नेतृत्व उन्हें फिलहाल इस्तीफा देने के लिए मनाए और कहे कि अध्यक्ष पद का चुनाव होने के बाद इसपर फैसला ले कि क्या वह दो पदों पर बने रह सकते हैं या नहीं। इससे यह भी प्रचारित होगा कि सोनिया गांधी भेदभाव रहित राजनीति कर रही हैं।

दूसरा विकल्प

दूसरा विकल्प

कांग्रेस के पास दूसरा विकल्प है कि वह अशोक गहलोत की बात को स्वीकार करे और उनके भरोसेमंद व्यक्ति को प्रदेश का मुख्यमंत्री चुने। ऐसा करने से कांग्रेस का उदयपुर संकल्प भी पूरा होगा जिसमे कहा गया था कि एक व्यक्ति एक पद ही होगा। इससे विधायकों की बगावत रुक जाएगी। राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि अशोक गहलोत राजस्थान की सरकार को चलाते रहेंगे। इसका मतलब यह भी होगा कि कांग्रेस विधायक शीर्ष नेतृत्व के आदेश को नजरअंदाज कर सकते हैं।

तीसरा विकल्प

तीसरा विकल्प

कांग्रेस सचिन पायलट को मुख्यमंत्री पद पर नियुक्त कर सकती है और गहलोत को इसके लिए मनाए और उनसे कहे कि वह अपने विधायकों को मनाएं कि सचिन पायलट को मुख्यमंत्री पद पर स्वीकार करें। पार्टी के नेताओं की मानें तो यह आसान नहीं होगा क्योंकि गहलोत के समर्थन में जो विधायक हैं वह सचिन पायलट को मुख्यमंत्री स्वीकार करने के लिए तैयार हैं। वहीं रिपोर्ट के अनुसार अशोक गहलोत ने साफ कर दिया है कि विधायक मेरे नियंत्रण में नहीं हैं। लेकिन कोई भी राजनीतिक जानकार यह जरूर जानता है कि ये विधायक गहलोत के ही नियंत्रण में हैं।

चौथा विकल्प

चौथा विकल्प

कांग्रेस एक ऐसे नेता का चुनाव कर सकती है जिसे हर कोई स्वीकार करे। जो ना सिर्फ अशोक गहलोत बल्कि सचिन पायलट को भी स्वीकार हो। माना जा रहा है कि रविवार को इस बात पर चर्चा भी हुई है। पार्टी के पर्यवेक्षक मल्लिकार्जुन खड़गे, अजय माकन अपनी रिपोर्ट में इस नेता के नाम को आगे बढ़ा सकते हैं। बहरहाल देखने वाली बात है कि क्या ऐसा कोई नेता है जो दोनों ही गुटों को स्वीकार है। एक तरफ जहां कांग्रेस के राजस्थान में 107 विधायक हैं और उसमे से 90 से अधिक विधायक गहलोत के समर्थन में हैं।

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English summary
Possible scenarios in Rajasthan for Congress amid Ashok Gehlot and Sachin Pilot face off
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