Rajasthan: नगर निकायों की राजनीतिक नियुक्तियां 24 घंटे में ही क्यों हुई रद्द, सामने आई वजह ?
rajasthan political news: राजस्थान में भजनलाल सरकार को एक बार फिर से राजनीतिक नियुक्तियां महज 24 घंटे में रद्द करने बाद सियासी चर्चाओं से बाजार गर्म हो गया है।
13 अक्टूबर को राजस्थान की नगर निकायों में जारी हुई मनोनीत सदस्यों की नियुक्तियां महज 24 घंटे में ही निरस्त कर दी गई है। जिसके बाद कांग्रेसी नेताओं ने भी चुटकी लेना शुरू कर दिया है।
आपकों बता दे कि राजस्थान की भजनलाल सरकार के स्वायत्त शासन विभाग ने प्रदेश की नगर निकायों में 497 सदस्यों को मनोनीत कर नियुक्ति आदेश जारी किए गए थे जिसमें 78 निकायों में 497 सदस्यों को नियुक्त किया गया था, इनमें 5 नगर निगम, 10 नगर परिषद और 63 नगर पालिका शामिल थी।

लेकिन प्रदेश के स्वायत्त शासन विभाग ने महज 24 घंटे में ही मनोनीत सदस्यों की नियुक्ति के आदेश को स्थगित कर राजनीति में हड़कंप मचा दिया। अब उन विधायकों के लिए फिर से सिरदर्द खड़ा हो गया जहां नगर निकायों में बिते दिन नियुक्तियां की गई है।
आपकों बता दे कि प्रदेश के कई विधायक लगातार नगर निगम, नगर परिषद, नगर पालिकाओं में सदस्यों को मनोनीत करने का दबाव बना रहे थे ताकि आने वाले नगर निकाय के चुनावों में उसका फायदा उठाया जा सके। स्वायत्त शासन विभाग के मंत्री ने संबंधित निकायों में चर्चा भी की थी। इसके बाद सरकार ने 78 निकायों में सदस्यों को नियुक्त किए थे।
मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा की राइजिंग राजस्थान के तहत विदेश यात्रा शुरू होने पहले स्वायत्त शासन विभाग ने इस संबंध में अधिसूचना जारी कर दी।
लेकिन स्वायत्त शासन ने रविवार 13 अक्टूबर को यू-टर्न लेकर मनोनीत सदस्यों की नियुक्ति के आदेश को स्थगित कर दिया। सरकार के इस फैसले को लेकर भाजपा के अंदरखाने भी चर्चाओं का बाजार गर्म हो रहा है। लेकिन अभी कोई स्थिति साफ नहीं कर रहा है।
राजस्थान की पांच निगमों में 56 सदस्यों की नियुक्तियां की गई थी। जिनमें भरतपुर, उदयपुर शहर, जोधपुर उत्तर और दक्षिण में 12-12 और पाली नगर निगम में 8 सदस्य नियुक्त किए गए थे।
वहीं राजस्थान की 10 नगर परिषदों में भी सदस्य नियुक्त किए थे जिनमें लालसोट, दौसा, सरदारशहर, धौलपुर, सांचौर, जालौर, अनूपगढ़, श्रीगंगानगर, शाहपुरा और टोंक शामिल है।
वहीं प्रदेश की नगर पालिकाओं में भी सदस्य नियुक्त किए थे । लेकिन अब तमाम सदस्यों की नियुक्ति के आदेश रद्द करते ही घर में मनाया जा रहा जश्न चंद घंटों में भी काफूर हो गया। हालांकि पार्टी और सरकार के खिलाफ तो कोई मनोनित सदस्य आवाज नहीं उठा रहा है लेकिन ऑफ कैमरा इस आदेश को लेकर चर्चाएं जरूर कर रहा है।












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