गांव में युवाओं की 'फौज' तैयार का रहा NSG कमांडो, अपने खेत को बना डाला ट्रेनिंग सेंटर
झुंझुनूं। देश को सबसे अधिक फौजी देने वाले राजस्थान के झुंझुनूं जिले के लोगों में देशभक्ति का जबरदस्त जज्बा है। यहां के युवा न केवल अपने स्तर पर फौज की तैयारी करते हैं बल्कि उन्हें फौज या अन्य किसी सुरक्षा एजेंसियों में सेवारत या रिटायर्ड अफसर भी युवाओं को आगे बढ़ाने का काम करते हैं। कुछ इसी सोच के साथ एक एनएसजी कमांडो और रिटायर्ड सुबेदार झुंझुनूं के दो गांवों में युवाओं की 'फौज' तैयार कर रहे हैं।

एनएसजी कमांडो संदीप सिंह शेखावत अलसीसर झुंझुनूं
सबसे पहले बात करते हैं एनएसजी कमांडो संदीप सिंह शेखावत। दिल्ली में एनएसजी कमाडो के रूप में तैनात संदीप सिंह शेखावत मूलरूप से झुंझुनूं जिले के गांव अलसीसर के रहने वाले हैं। बीते तीन माह से संदीप ने अपने गांवों के युवाओं को सेना का प्रशिक्षण देने का बीड़ा उठा रखा है। संदीप का कहना है कि वो युवाओं को इसलिए तैयारी करवा रहे हैं ताकि उन्हें किसी सेना भर्ती रैली में दिक्कतों का सामना नहीं करना पड़े।

30 युवक युवतियां ले रहे प्रशिक्षण
युवाओं को सेना भर्ती रैली की तैयारी करवाने के लिए एनएसजी कमांडो संदीप सिंह ने अपने खेत को ट्रेनिंग सेंटर बना दिया है। खेत में ही खुद के खर्चे पर उपकरण लगवा दिए हैं। यहां सुबह चार बजे से ही युवा निशुल्क प्रशिक्षण के लिए पहुंचने शुरू हो जाते हैं। जब संदीप सिंह शेखावत ड्यूटी पर दिल्ली आ जाते हैं तो करीब 30 युवक-युवतियां खुद ही उनके बताए तरीकों से खेत में तैयारी करते हैं।

अब जानिए बजावा के रिटायर्ड सुबेदार प्रताप सिंह मूंड के बारे में
एनएसजी कमांडो संदीप सिंह शेखावत की तर्ज पर भारतीय सेना के रिटायर्ड सुबेदार प्रताप सिंह मूंड भी अपने गांव बजावा में इस तरह की मुहिम शुरू कर रखी है। प्रताप सिंह मूंड आस-पास के गांव-ढाणियों के युवाओं को पिछले छह माह से सेना भर्ती रैली का प्रशिक्षण दे रहे हैं। इसके लिए उन्होंने गांव के जोहड़ में सेंटर बना रखा है। खुद सुबेदार प्रताप सिंह मूंड वॉलीबाल के इंटरनेशनल खिलाड़ी रह चुके हैं।

60 युवा ले रहे प्रशिक्षण
मीडिया से बातचीत में सुबेदार प्रताप सिंह मूंड ने बताया कि हमारे क्षेत्र के युवाओं में फौजी बनने का क्रेज है। बड़ी संख्या में युवा खुद के स्तर पर तैयारी करते हैं। कइयों ने निजी एकेडमी भी ज्वाइन कर रखी है, मगर जो युवक ना खुद तैयारी कर पा रहे और ना ही निजी एकेडमी की फीस वहन कर पा रहे। उनकी मदद सुबेदार मूंड कर रहे हैं। यहां पर करीब 60 युवा प्रशिक्षण ले रहे हैं।












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