नानी बाई रो मायरो जैसी कहानी, पिता-भाई की मौत के बाद भानजी की शादी में पूरे गांव ने भरा 10 लाख का भात
राजस्थान में एक लोककथा प्रचलित है कि जब नानी बाई के मायरा भरने की बारी आई तो खुद भगवान कृष्ण ने उनके घर पहुंचकर भात भरा। ऐसी स्टोरी राजस्थान के हनुमानगढ़ के भादरा के गांव नेठराणा से सामने आई है।

Nani Bai Ro Mayro Real Story in Rajasthan: पति की मौत हो गई थी। पिता भी नहीं रहे। भाई भी चल बसा। बेटी शादी लायक हुई तो मीरा अकेली पड़ गई। ससुराल पक्ष के लोगों की मदद से जैसे-तैसे बेटी की शादी की तैयारियां कीं। फिर पीहर जाकर भाइयों को भात न्यौतने की रस्म निभाने की बारी आई तो मीरा का गला रुंध गया। आंखों से बस आंसुओं की धारा ही बहती रही, क्योंकि मीरा के मायके में भात न्यौतने की रस्म निभाने वाला कोई नहीं था। ऐसे में मीरा अपने मरे हुए भाई की कुटिया (स्थान) को तिलक लगाकर (भात न्यौत कर) ससुराल लौट आ गई।

मीरा को लगा भात में कोई नहीं आएगा
मीरा को लगता था कि पिता व भाई जिंदा नहीं है तो उसकी बेटी की शादी पर भात लेकर मायके से कोई नहीं आएगा, मगर मीरा अंदाजा गलत साबित हुआ। वजह उसके मायके के गांव वालों ने जो कदम उठाया वो मिसाल बन गया। पूरा गांव मीरा के घर उसका भाई बनकर भात भरने पहुंच गया। जिसने भी यह भात देखा वो यही कहता रहा कि जिस तरह से नानी बाई रो मायरा भरने खुद भगवान श्री कृष्ण आए थे वैसे ही भगवान की भूमिका आज मीरा के गांव वालों ने निभाई है।

सोशल मीडिया पर छाया नेठराना की मीरा का भात
दरअलस, सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बना यह भात राजस्थान के हनुमानगढ़ जिले के भादरा उपखंड के गांव नेठराना से भरा गया है। भात में मीरा को 7 लाख रुपए नकद व तीन लाख रुपए के गहने और कपड़े उपहार स्वरूप भेंट किए गए हैं। गांव नेठराना के लोगों के इस कदम की हर कोई तारीफ करता नहीं थक रहा। वहीं, पूरे गांव को भात भरते देख मीरा की आंखों से भी आंसू निकल आए, मगर इस बार के आंसू उसे इंसानियत व अपनेपन का अहसास करा गए।

गांव नेठराना की मीरा की शादी हरियाणा में हुई
हुआ यूं कि भादरा के सबसे बड़े गांवों में से एक नेठराना की मीरा की शादी हरियाणा के सिरसा जिले के गांव जांडवाला बागड़ में हुई थी। दो बेटियां पैदा हुईं। फिर पति की मौत हो गई। इधर, मायके में मीरा के पिता जोराराम बेनीवाल का भी निधन हो चुका था। इकलौता अविवाहित भाई संतलाल गांव में ही पंजाबी बाबा की कुटिया में रहने लगा था और यहीं पर वो भी चल बसा।

भात या मायरा भरने की रस्म क्या है?
मीरा के दो बेटियां हैं। एक बेटी की 15 मार्च 2023 को शादी हो रही है। शादी से कुछ दिन पहले मीरा अपने मायके में भात न्यौतने की रस्म निभाने आई थी। यह रस्म एक तरह से अपने पिता, भाई, भाभी व भतीजों को तिलक लगाकर बेटा या बेटी की शादी में पहुंचने का न्यौता देना होता है। फिर मायके से नाना, मामा शादी वाले दिन बेटी के घर जाकर भात भरते हैं, जिसे मायरा भरना भी कहते हैं। भात में नकदी, गहने व कपड़े भेंट किए जाते हैं। मायके में कोई नहीं था तो मीरा ने अपने भाई की कुटिया के तिलक लगाकर ससुराल लौट आई थी।

पूरा नेठराना गांव बन गया मीरा का भाई
जब मीरा द्वारा अपने स्वर्गीय भाई की कुटिया के भात न्यौत कर जाने की खबर गांव नेठराना के लोगों को मिली तो पूरे गांव ने मिलकर तय किया कि बेटी की शादी में बहन मीरा को उसके पिता व भाई की कमी नहीं खलने दी जाएगी। पूरा गांव उसका मायका बनकर भात भरने जाएगा। फिर गांव नेठराना से सैंकड़ों ग्रामीण महिला, पुरुष व बच्चे भात भरने मीरा के घर हरियाणा के गांव जांडवाला बागड़ पहुंचे। पूरे गांव के लोगों को देखकर मीरा की आंख भर आई।

भात के मौके पर मीरा ने क्या कहा?
गांव नेठराना के लोगों ने मीरा की बेटी की शादी में उसके मायके वाले बनकर दस लाख रुपए का मायरा भरा, जिसमें 7 लाख रुपए नकद और तीन लाख के गहने व कपड़े थे। मीरा ने अपने गांव के लोगों का सगे पिता व भाइयों की तरह आवभगत की। मीरा ने कहा कि मैं धन्य हूं कि मेरा जन्म इस तरह की सोच वाले गांव में हुआ।

नानी बाई का मायरा कथा क्या है?
राजस्थान में नानी बाई का मायरा (भात) की एक लोक कथा प्रचलित है। कथा के अनुसार नरसी मेहता गरीब ब्राह्मण थे। वे भगवान कृष्ण के भक्त थे। नरसी जी की बेटी नानी बाई की बेटी सुलोचना की शादी हुई तो नानी बाई के ससुराल वालों ने उसके पिता नरसी की गरीबी को लेकर ताने मारे और भात भरने के लिए नरसी जी हैसियत से अधिक गहने, कपड़े आदि सामान लाने को बोल दिया।
नरसी जी को विश्वास था कि नानी बाई के मायरा भरने में भगवान कृष्ण उसकी लाज बचाएंगे। ऐसा ही हुआ रास्ते में भगवान श्रीकृष्ण एक नगर सेठ का वेश बदलकर बैलगाड़ी लिए हुए मिले। फिर नरसी जी के साथ उनकी बेटी नानीबाई का मायरा पूरे ठाठ बाट से भरा।












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