Lok Sabha Election: राजस्थान में BJP का मिशन 25 नहीं आसान, 10 सीटों पर मिलती दिख रही चुनौती
Lok Sabha Election 2024: राजस्थान में विधानसभा चुनावों में प्रचंड जीत के बाद अब भाजपा एक बार फिर मिशन 25 दोहराने में जुटी हुई है। लगातार दो बार से लोकसभा चुनाव में पूरी की पूरी 25 सीटों पर कब्जा जमाने वाली बीजेपी के लिए इस बार राह आसान नहीं लग रही।
बीजेपी ने अभी तक 25 सीटों में से 15 उम्मीदवारों का ऐलान किया है, जबकि कांग्रेस 10 सीटों पर प्रत्याशियों की घोषणा कर चुकी है। ऐसे मे कांग्रेस के टिकट बांटने के बाद नए सियासी समीकरण और वागड़, मारवाड़ में गठबंधन की संभावनाओं के चलते 10 सीटों पर चुनौती मिलती नजर आ रही है।

दरअसल, कांग्रेस और बीजेपी के उम्मीदवारों के ऐलान के बाद 8 सीटों पर टक्कर साफ हो गई है। ऐसे में जो सियासी समीकरण नजर आ रहे हैं, उसने चुनावी टक्कर को रोचक मोड पर ला दिया है।
ऐसे में बीजेपी के मिशन 25 की राह आसान नजर नहीं आ रही है। क्योंकि चूरू, झुंझुनूं, टोक-सवाई माधेपुर, डूंगरपुर-बांसवाड़ा, उदयपुर, जालोर-सिरोही, नागौर, दौसा, भरतपुर और करौली-धौलपुर में चुनौती बनती दिखाई दे रही है।
राहुल कस्वां की एंट्री से कड़ा मुकाबला
चूरू से मौजूदा भाजपा सांसद का टिकट कटने के बाद कांग्रेस में शामिल हुए राहुल कस्वां ने यहां की लड़ाई को कड़ी कर दिया है। बीजेपी ने पैरांलिपिक गोल्ड मेडल विजेता देवेंद्र झाझड़िया को उम्मीदवार बनाया है, जिसके बाद चूरू की सीट को लेकर राहुल कस्वां को भावनात्मक फायदा मिलता नजर आ रहा है।
ऐसे ही झुंझनूं सीट से कांग्रेस ने पूर्व मंत्री और विधायक बृजेंद्र ओला को प्रत्याशी बनाया है, यह सीट उनकी राजनीतिक विरासत के रूप मे देखी जाती है। झुंझनूं सीट पर बृजेंद्र के पिता शीशराम ओला चुनाव जीतते रहे हैं। यहां तक की केंद्र में मंत्री पद की भी जिम्मेदारी संभाली है। हालांकि बीजेपी ने अभी यहां अपना उम्मीदवार नहीं उतारा है, लेकिन आंकड़ों पर गौर करें तो हालिया विधानसभा चुनाव में भाजपा का प्रदर्शन यहां अच्छा नहीं रहा।
टोंक सवाई माधोपुर में बीजेपी को चुनौती
मीणा और गुर्जर बाहुल टोंक-सवाई माधोपुर सीट पर कांग्रेस ने यहां से विधायक हरीश मीणा को प्रत्याशी बनाया हैं, जो कि पायलट गुट के मानें जाते हैं। ऐसे में मीणा समाज के साथ गुर्जर समुदाय के लोगों का भी झुकाव हो सकता है, जो कि बीजेपी के लिए चुनौती है।
वहीं ऐसे ही समीकरण भरतपुर और दौसा सीट पर भी बनते नजर आ रहे हैं। हालांकि दौसा सीट पर अभी उम्मीदवारों का ऐलान बाकी है, जबकि भरतपुर से कांग्रेस ने संजवा जाटव और बीजेपी ने रामस्वरूप कोली को अपना प्रत्याशी बनाया है।
क्षेत्रीय गठबंधन बढ़ा सकते हैं टेशन
इधर, कांग्रेस ने जिन सीटों पर अपने उम्मीदवार अभी नहीं उतारे हैं, वहां क्षेत्रीय पार्टी से गठबंधन की चर्चा चल रही है। ऐसे में आरएलपी, भारत आदिवासी पार्टी (बीएपी) और कम्युनिस्ट पार्टी के साथ समझौता हो सकता है। जिसके बाद डूंगरपुर-बांसवाड़ा में बीएपी के साथ और श्रीगंगानगर में कम्युनिस्ट पार्टी के साथ गठबंधन हो सकता है।












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