Kirodi Lal Meena Resign: किरोड़ी लाल मीना के इस्तीफे की एक वजह ये भी, रोकी थी सचिन पायलट की उड़ान
Kirodi Lal Meena Resignation: राजस्थान की भजनलाल शर्मा सरकार में कैबिनेट मंत्री व सवाई माधोपुर से भाजपा विधायक डॉ. किरोड़ी लाल मीना इस्तीफा देने के बाद चर्चा में है। ये ही वो नेता हैं, जिन्होंने दौसा में सचिन पायलट के परिवार की 15 साल पुरानी सियासी उड़ान रोकी थी।
दरअसल, राजस्थान सरकार में कृषि मंत्री डॉ. किरोड़ी लाल मीना उर्फ किरोड़ी बाबा अपनी जुबान के पक्के निकले हैं। किरोड़ी लाल मीना ने 4 जुलाई 2024 को अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। इस्तीफा कुछ दिन पहले ही दे दिया था, मगर जानकारी अब सामने आई है।

किरोड़ी लाल मीना ने अपना इस्तीफा राजस्थान मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा को भेजा है, जिसे अभी स्वीकार नहीं किया गया है। किरोड़ी लाल मीना के पाास कृषि के अलावा उद्योग, ग्रामीण विकास, आपदा प्रबंधन सहायता, नागरिक सुरक्षा व लोक अभियोजन निवारण मंत्री पद की भी जिम्मेदारी है।

राजस्थान के कैबिनेट मंत्री किरोड़ी लाल मीना के इस्तीफा की सबसे बड़ी वजह लोकसभा चुनाव 2024 में उनके गृह जिले व प्रभाव वाले इलाके दौसा में भाजपा की हार है।
चुनाव प्रचार के दौरान किरोड़ी लाल मीना ने वादा किया था कि दौसा में भाजपा हार जाएगी तो वे इस्तीफा दे देंगे। लोकसभा चुनाव 2024 में दौसा सीट पर कांग्रेस के मुरारी लाल मीना जीते थे जबकि भाजपा के कन्हैया लाल मीना की हार हुई।

दौसा संसदीय सीट इतिहास
दौसा के सियासी इतिहास में चलें तो हुआ ये था कि पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के करीबी नेताओं में से एक राजेश पायलट (सचिन पायलट के पिता) ने लोकसभा चुनाव 1984 में दौसा सीट पर कांग्रेस उम्मीदवार के रूप में जीत दर्ज की थी।
साल 1989 के चुनाव में राजेश पायलट जीत दोहरा नहीं सके और भाजपा के नाथू सिंह गुर्जर जीते, मगर इसके बाद साल 1991 से 1999 तक राजेश पायलट लगातार चार बार दौसा सांसद बने।
11 जून 2000 को भंडाना के पास कार दुर्घटना में दौसा सांसद राजेश पायलट की मौत हो गई तो उनकी पत्नी रमा पायलट सांसद बनीं और फिर साल 2004 में दौसा की जनता ने राजेश पायलट को 27 साल की उम्र में सांसद चुना।
2009 में दौसा से निर्दलीय सांसद बने थे किरोड़ी
साल 1984 से 2004 तक (भाजपा के नाथू सिंह गुर्ज्र का कार्यकाल छोड़कर) दौसा सीट पर पायलट परिवार का कब्जा रहा। कांग्रेस के गढ़ बने दौसा में लोकसभा चुनाव 2009 में किरोड़ी लाल मीना ने निर्दलीय चुनाव लड़कर जीत दर्ज की। इस जीत किरोड़ी लाल मीना का सियासी कद काफी बड़ा कर दिया था।












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