Anurag Maloo के साथ माउंट अन्नपूर्णा पर क्या हुआ? एवरेस्ट विजेता गौरव शर्मा ने बताया वो खौफनाक मंजर
Anurag Maloo Missing Reasons: नेपाल में माउंट अन्नपूर्णा फतह करते समय लापता हुए पर्वतारोही अनुराग मालू राजस्थान के अजमेर जिले के किशनगढ़ के मायाबाजार निवासी ओमप्रकाश मालू के बेटे हैं।

Indian climber missing at Mt Annapurna Nepal: भारतीय पवर्तारोही अनुराग मालू (34) और बलजीत कौर (27) माउंट अन्नपूर्णा से लापता हो गए। ये अन्य पर्वतारोहियों के साथ दुनिया की 14 सबसे ऊँची पर्वत चोटियों में से एक नेपाल स्थित माउंट अन्नपूर्णा को फतह करने गए थे।
पर्वतारोही अनुराग मालू राजस्थान के अजमेर जिले के किशनगढ़ के मायाबाजार के ओमप्रकाश मालू के बेटे हैं। सोमवार को माउंट अन्न्पूर्णा से लौटते समय लापता हो गए। अनुराग मालू के साथ माउंट अन्नपूर्णा पर 6 हजार मीटर की ऊंचाई पर क्या हादसा हुआ होगा? वे हिम दरार में किस वजह से फंसे होंगे? वहां उन्हें किन चुनौतियों का सामना करना पड़ा होगा?

माउंट अन्नपूर्णा से अनुराग मालू के लापता होने के बाद हर किसी के मन में उठ रहे सारे सवालों के जवाब एवरेस्ट विजेता गौरव शर्मा ने दिए हैं। एवरेस्ट के अलावा हिमालय एवं विश्व के अन्य 14 शिखरों पर सफल आरोहण कर चुके गौरव शर्मा माउंट अन्नपूर्णा कदम-कदम पर 'मौत' का सामना होने वाली हर परस्थिति से अच्छी तरह वाफिक हैं।
एवरेस्ट विजेता गौरव शर्मा का इंटरव्यू
वन इंडिया हिंदी से बातचीत में गौरव शर्मा ने बताया कि माउंट अन्नपूर्णा आरोहण करना कम चुनौतिपूर्ण नहीं है। वहां जरा सी लापरवाही भी जानलेवा साबित होती है। दुनिया की सबसे ऊंची चोटी माउंट एवरेस्ट की ऊंचाई 8,848 है जबकि माउंट अन्नपूर्णा 8,091 मीटर ऊंची है। दोनों में जोखिम लगभग समान है। यहां किसी हिम दरार में फंसना सबसे खतरनाक है। तब जिंदा बचने की समस्या बहुत कम हो जाती है।

पर्वतारोही अनुराग मालू इन 4 वजहों से हुए लापता?
एंकर हट जाना
1. फिक्स रोप में से सेल्फ एंकर हट गया होगा। अगर वो फिक्स रोप से जुड़े होते तो उनके बचने के चांस ज्यादा होते। इसमें होता यह है कि फिक्स रोप के जरिए एक रस्सी पर्वतारोही की कमर में बंधी होती है। किसी दरार में फंसने पर फिक्स रोप भी नीचे चली जाती है। ऐसे में अभियान दल के बाकी साथियों को लापता होने का पता चल जाता है। उसे रस्सी खींचकर बाहर निकाल लेते हैं।
अत्यधिक थकान
2. माउंट अन्नपूर्णा पर पर्वतारोही अनुराग मालू के लापता हो जाने की दूसरी वजह ये हो सकती है कि अभियान के दौरान अत्यधिक थकान के कारण उनके पांव लड़खड़ा गए होंगे और असंतुलित होकर नीचे गिर गए होंगे।
अत्यधिक धुंध
3. माउंट अन्नपूर्णा पर अत्यधिक धुंध की वजह से भी कई पर्वतारोही लापता हो जाते हैं। धुंध के कारण कदम कदम पर 'मौत' से सामना होता है, क्योंकि पर्वतारोही ठीक से देख नहीं पाते हैं। ऐसे में उन्हें अंदाजे से पांव रखने होते हैं। इसी दौरान हादसे का शिकार हो जाते हैं।
ठंडी हवाएं
4. माउंट अन्नपूर्णा में छह हजार मीटर की ऊंचाई पर 80 से 100 किलोमीटर प्रतिघंटा की गति से ठंडी हवाएं चलती हैं। उनकी वजह से भी अक्सर कई पर्वतारोही किसी हिम दरार में गिर जाते हैं।

माउंट अन्नपूर्णा की चढ़ाई में कितना जोखिम?
एवरेस्ट विजेता गौरव शर्मा के अनुसार माउंट अन्नपूर्णा में इस वक्त रात का न्यूनतम तापमान माइनस 15-20 डिग्री सेल्सियस तक है जबकि अगर मौसम खराब हो तो दिन में भी न्यूनतम तापमान माइनस 20 तक पहुंच जाता है। इसके अलावा नश्तर चुभती शीतलहर (जेट स्ट्रीम्स ) का भी सामना करना पड़ता है। बर्फ टूटने व एंकर निकल जाने का खतरा भी हमेशा बना रहा है। ऑक्सीजन लेवल भी काफी कम होती है।
हिम दरार में गिरने पर बचना मुश्किल
गौरव शर्मा के तहत माउंट अन्नपूर्णा दो तरह की बर्फ होती है। ऊपरी सतह पर वाली को स्नो बोलते हैं, जो ज्यादा सख्त नहीं होती जबकि किसी हिम दरार वाली जमी होती है। हिम दरार की गहराई का भी कोई अंदाजा नहीं होता। यह 20 मीटर से 300 मीटर तक भी हो सकती है। इनमें गिरने वाला पर्वतारोही कहां जाकर रुकेगा? कुछ नहीं कह सकते। हिम दरार में बर्फ नुकीली भी होती है, जिसकी चपेट में आने वाले का बचना मुश्किल है।

माउंट एवरेस्ट विजेता गौरव शर्मा कौन हैं?
- राजस्थान के चूरू शहर में बसंतलाल व सविता शर्मा के घर 23 सितम्बर 1983 को गौरव शर्मा का जन्म हुआ।
- गौरव शर्मा की शादी रजनी शर्मा के साथ हुई। इनके दो बेटे शिखर व हिमालय हैं।
- गौरव शर्मा वर्तमान में हिमाचल प्रदेश एवं राजस्थान में साहसिक खेल एंव प्रशिक्षण अकादमी चलाते हैं। हिमाचल में होटल उद्योग एंव एडवेंचर कैम्प के निदेशक हैं।
- सुविख्यात पर्वतारोही गौरव शर्मा 20 मई 2009 को सुबह सवा छह बजे माउंट एवरेस्ट फतह करके राजस्थान के इकलौते शख्स बने।
- गौरव शर्मा विश्व के प्रथम पर्वतारोही हैं, जिन्होंने अस्थमा होने के बावजूद एवरेस्ट की चोटी पर कदम रखे।
- गौरव शर्मा कैलाश मानसरोवर यात्रा का 20 बार सफल नेतृत्व एवं कैलाश पर्वत की 17 परिक्रमा भी कर चुके हैं।












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