Electoral bond Scheme: पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने चुनावी बॉन्ड योजना को बताया एनडीए का सुप्रीम घोटाला
Electoral bond Scheme: चुनावी बॉन्ड पर सुप्रीम कोर्ट का फैसला आते ही पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत हमलावर हो गए। हमला बोलते हुए कहा कि "यह देश के सबसे बड़े घोटाले में से एक"
राजस्थान के पूर्व सीएम अशोक गहलोत ने चुनावी बॉन्ड योजना की वैधता को लेकर सुप्रीम कोर्ट के फैसले को ऐतिहासिक और स्वागत योग्य बताया है।

उन्होंने एक्स (ट्वीट) के माध्यम से प्रतिक्रिया देते हुए भाजपा को आड़े हाथों लेते हुए जोरदार हमला बोला है। गहलोत ने सीधे ही भाजपा पर भ्रष्टाचार को बढ़ाने के गंभीर आरोप लगाए।
गहलोत ने कहा कि चुनावी बॉन्ड योजना ने राजनीतिक चंदे की पारदर्शिता को पूरी तरह से खत्म किया और सत्ताधारी पार्टी भाजपा को सीधे लाभ पहुंचाया।
राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने चुनावी बॉन्ड योजना की वैधता को लेकर सुप्रीम कोर्ट के फैसले का स्वागत किया है। उन्होंने अपने पूर्व में दिए बयानों का हवाला देते हुए कहा कि वे पहले ही चुनावी बॉन्ड की वैधानिकता पर सवाल खड़े कर चुके हैं।
इलेक्टोरल बॉन्ड देश का बहुत बड़ा स्कैंडल है। pic.twitter.com/gAJktJK2LF
— Ashok Gehlot (@ashokgehlot51) November 24, 2019
सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर एक्स (ट्वीट) पर प्रतिक्रिया देते हुए गहलोत ने कहा कि चुनावी बॉन्ड को असंवैधानिक ठहराने का सुप्रीम कोर्ट का फैसला ऐतिहासिक एवं स्वागत योग्य है।
चुनावी बॉन्ड ने भ्रष्टाचार को बढ़ाने का काम किया। इसने राजनीतिक चंदे की पारदर्शिता को खत्म किया और सत्ताधारी पार्टी भाजपा को सीधे लाभ पहुंचाया।
गहलोत ने कहा कि मैंने कई बार कहा कि चुनावी बॉन्ड आजाद भारत के सबसे बड़े घोटालों में से एक है। आज सुप्रीम कोर्ट के फैसले ने यह साबित कर दिया है कि चुनावी बॉन्ड एनडीए सरकार का एक बड़ा घोटाला है। यह फैसला देर से आया पर देश के लोकतंत्र को बचाने के लिए बेहद ही जरूरी फैसला है।
चुनावी बॉन्ड को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने यह दिया बड़ा फैसला
चुनावी बॉन्ड योजना की वैधता को लेकर दाखिल की गई याचिकाओं पर सुप्रीम कोर्ट ने आज फैसला सुना दिया है। फैसले में सुप्रीम कोर्ट ने चुनावी बॉन्ड योजना को अनुच्छेद 19(1)(ए) का उल्लंघन और असंवैधानिक माना है।
कोर्ट का कहना है कि चुनावी बॉन्ड योजना को असंवैधानिक करार देते हुए इसे रद्द करना होगा, सुप्रीम कोर्ट ने सरकार को किसी अन्य विकल्प पर विचार करने को कहा है।
सुप्रीम कोर्ट ने योजना की आलोचना करते हुए कहा कि राजनीतिक पार्टियों को हो रही फंडिंग की जानकारी मिलना बेहद जरूरी है। जो सूचना के अधिकार का उल्लंघन है।
चुनावी बॉन्ड योजना को लेकर अहम जानकारी
इस योजना को सरकार द्वारा 2 जनवरी, 2018 को अधिसूचित किया गया था। इसके अनुसार, चुनावी बॉन्ड भारत के किसी भी नागरिक या देश में स्थापित किसी भी इकाई द्वारा खरीदा जा सकता है। कोई भी व्यक्ति अकेले या अन्य व्यक्तियों के साथ संयुक्त रूप से चुनावी बॉन्ड खरीद सकता है। ऐसे राजनीतिक दल चुनावी बॉन्ड के लिए प्राप्त करने के दायरे में आते हैं जिन्हें पिछले लोकसभा या विधानसभा चुनाव में कम से कम एक फीसदी वोट मिले हों।
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