पूर्वी राजस्थान क्यों है भाजपा-कांग्रेस के लिए जरूरी, समझिए पर्दे के पीछे की पूरी कहानी

Rajasthan Assembly Election 2023: राजस्थान में जैसे-जैसे विधानसभा चुनाव के लिए वोटिंग की तारीख नजदीक आ रही है, सियासी गर्मी भी तेजी से बढ़ने लगी है। भाजपा ने जहां गुरुवार को राजस्थान के लिए अपना संकल्प पत्र जारी कर दिया, वहीं कांग्रेस सांसद राहुल गांधी भी जयपुर पहुंचे हैं।

इसी सियासी गहमागहमी के बीच पूर्वी राजस्थान पर भाजपा और कांग्रेस दोनों की निगाहें लगी हुई हैं। राजस्थान की कुल 200 विधानसभा सीटों में से 39 सीटें पूर्वी राजस्थान में आती हैं और साल 2018 के चुनावी आंकड़े बताते हैं कि प्रदेश का ये हिस्सा भाजपा और कांग्रेस के लिए क्यों बहुत जरूरी है?

East Rajasthan

13 जिलों की 39 सीटों पर फोकस

राजस्थान के रण में पीएम मोदी से लेकर राहुल गांधी तक ने अपने चुनावी प्रचार को धार देना शुरू कर दिया है। राज्य की सभी 200 सीटों पर दोनों दलों की पैनी नजर हैं, लेकिन पूर्वी राजस्थान के 13 जिलों की 39 सीटों पर बीजेपी और कांग्रेस का खास फोकस है। कांग्रेस जहां पूर्वी राजस्थान नहर परियोजना (ईआरसीपी) को लेकर 13 जिलों में मुस्तैद हो रही है, तो वही बीजेपी भी पिछले चुनाव से सीख लेकर इन सीटों को फतह करने के लिए पूरा जोर लगा रही है।

पिछले चुनाव में बीजेपी को मिली निराशा

दरअसल, पिछले चुनाव में पूर्वी राजस्थान की कुल 39 सीटों में से बीजेपी को मात्र तीन जगह अलवर शहर, मुंडावर और धौलपुर से ही जीत मिली थी। जबकि कांग्रेस को यहां बंपर जीत मिली। ऐसे में कांग्रेस पूर्वी राजस्थान की जीवनदायिनी कहे जाने वाली ईआरसीपी को राष्ट्रीय परियोजना घोषित करने का मुद्दा जोर-शोक से उठा रही है।

पूर्वी राजस्थान में झालावाड़, बारां, कोटा, बूंदी, सवाई माधोपुर, अजमेर, टोंक, अजमेर, दौसा, करौली, अलवर, भरतपुर और धौलपुर जिले शामिल हैं।

वहीं बीजेपी भरतपुर जिले में 18 नवंबर को पीएम नरेंद्र मोदी की जनसभा कराने की तैयारी में लग चुकी है। 18 नवंबर को पीएम मोदी भरतपुर दौरे पर रहेंगे। बता दें कि साल 2018 के चुनाव में भरतपुर जिले सातों विधानसभा सीट पर बीजेपी का खाता तक नहीं खुला था।

मालूम हो कि पूर्वी राजस्थान में एससी-एसटी और गुर्जर वोटर्स सत्ता का रास्ता तय करते है। हालांकि पिछले बार सचिन पायलट को सीएम के तौर पर देखते हुए गुर्जर समाज ने जमकर कांग्रेस के पक्ष में वोटिंग की थी, जिसका पूरा फायदा पार्टी को मिला, लेकिन इस बार दोनों ही दलों में कांटे की टक्कर बताई जा रही है।

ईस्टर्न राजस्थान कैनाल प्रोजेक्ट क्या है?

दरअसल, पूर्वी राजस्थान के सबसे बड़े मुद्दों में से एक ईस्टर्न राजस्थान कैनाल प्रोजेक्ट है। इस नहर प्रोजेक्ट की शुरुआत भाजपा सरकार में की गई थी। इस प्रोजेक्ट में 40 हजार करोड़ रुपए की लागत आने का अनुमान है। जिसके पूरा होने के बाद पूर्वी राजस्थान के 13 जिलों की 2 लाख हेक्टेयर जमीन की सिंचाई सुविधा मिलेगी। हालांकि 2018 में सरकार बदली तो मुख्यमंत्री अशोक गहलोत इस प्रोजेक्ट को राष्ट्रीय दर्ज देने की मांग करते हुए केंद्र से अपनी आवाज उठाई।

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