18 वें जयपुर लिटरेचर फेस्टिवल 2025 की तारीख की घोषणा,जानिए कब होगा आयोजन ?
17th Jaipur Literature Festival 2024: पिंकसिटी जयपुर में 17वें जयपुर लिटरेचर फेस्टिवल का 18वें फेस्टिवल के आयोजन की घोषणा के साथ ही ऐतिहासिक समापन हो गया।
वर्ष 2025 में 18वें जयपुर लिटरेचर फेस्टिवल का आयोजन 30 जनवरी से 3 फरवरी तक आयोजित होने की घोषणा की गई है।

जयपुर लिटरेचर फेस्टिवल 2024 के पांच दिवसीय साहित्यिक मैराथन का शानदार समापन हुआ। फेस्टिवल में संस्मरण से लेकर स्पोर्ट्स, हिस्ट्री से माइग्रेशन और फूड से लेकर कई विषयों पर बात हुई|
दिन के यह प्रमुख सत्र रहे आकर्षण
सत्र 'शाहजहानाबाद: ऑन देल्ही'स ब्रोकन हिस्ट्री' में तीन इतिहासकारों, स्वप्ना लिडल, राणा सफवी और विलियम डेलरिम्पल ने शाहजहानाबाद/दिल्ली के इतिहास पर दिलचस्प चर्चा की। इतिहासकार और लेखिका स्वप्ना ने कहा, "अभी हाल ही में प्रकाशित मेरी किताब (शाहजहानाबाद) मेरे दिल के काफी करीब है।
उसमें अकबर द्वितीय और उनके पुत्र बहादुर शाह ज़फर द्वितीय के जीवनकाल को वर्णित किया गया है।
'प्रणब माय फादर: ए डॉटर रेमेम्बेर्स' सत्र की शुरुआत शर्मिष्ठा मुखर्जी द्वारा अपने पिता को याद करने से हुई| उन्होंने अपने पिता की डायरी एंट्रीज का भी खुलासा किया, जिस पर उनकी नई किताब, प्रणब माई फादर: ए डॉटर रिमेम्बर्स आधारित है। उन्होंने स्नेहपूर्वक याद करते हुए कहा, "उन्होंने अपनी डायरी में दर्ज किया कि उनके समय के दौरान कांग्रेस का कमजोर होना शुरू हुआ था। इसकी वजह थी उनके (इंदिरा गांधी) द्वारा किए गए दो विभाजन और सत्ता की पूरी एकाग्रता। शर्मिष्ठा ने कांग्रेस और अपने पिता से जुड़ी कई यादों को साझा किया।
सत्र 'द नरेटिव आर्क' में अनुभवी लेखिका, मृदुला गर्ग और साहित्यिक कार्यकर्ता और अनुवादक, कल्पना रैना ने अपनी शानदार साहित्यिक यात्राओं और अनुवादों में प्रतिष्ठित योगदान पर बात की। रैना ने 'वर्ड्स विदाउट बॉर्डर्स' के बारे में बात की जो उन लोगों को एक मंच प्रदान करता है, जिनके पास अंग्रेजी भाषी दुनिया में कोई आवाज नहीं है। अनुवाद की शक्ति के बारे में बोलते हुए गर्ग ने कहा, "अनुवाद भी सृजन है। यह लिखने जैसा ही है कि आपको अपने अहंकार को लेखक के अधीन बनाना होगा।''
मोशन के पक्ष में ऑक्सफोर्ड की शिक्षाविद अमिया श्रीनिवासन ने कहा, "ये हमारे ऊपर है... हम लोकतान्त्रिक देश के नागरिक हैं| फ्री स्पीच की कीमत को बहुत देर से जाना गया है... कोई तकनीक या कोई निगरानी अब फ्री स्पीच को रोक नहीं सकते।"
मोशन के विपक्ष में राजनेता और लेखक पवन के. वर्मा ने कहा, "थ्योरी अलग है और प्रैक्टिकल अलग है, हम किसी काल्पनिक भविष्य की बात नहीं कर रहे हैं, हम वर्तमान की बात कर रहे हैं... वर्तमान में आपकी सारी कॉल्स, सारे कम्युनिकेशन को मॉनिटर किया जा सकता है| लोग अब व्हाट्सएप पर बात करने से डरते हैं... यहां मैं ग़ालिब को उद्धृत करना चाहूँगा, 'हरेक बात में कहते हो तुम कि ये क्या है, तुम्हीं कहो कि ये अंदाजे गुफ्तगू क्या है।
श्रोताओं ने मोशन के विपक्ष में अपना वोट दिया।












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