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Deepchand Verma Sikar : आतंकी हमले में शहीद हुए सीकर के बेटे को अंतिम विदाई

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सीकर। जम्मू कश्मीर के सोपोर इलाके में आतंकी हमले में शहीद हुए दीपचंद वर्मा का पार्थिव शरीर गुरुवार को उनके घर पहुंचा। शहीद दीपचंद वर्मा राजस्थान के सीकर जिले के गांव बावड़ी के रहने वाले थे। गुरुवार शाम छह बजे गांव बावड़ी में उनका अंतिम संस्कार किया गया। शहीद के आठ साल के बेटे विनीत ने उनकी चिता को मुखाग्नि दी।

    CRPF जवान दीपचंद वर्मा को राजकीय सम्मान के साथ नम आंखों से दी गई अंतिम विदाई | वनइंडिया हिंदी
    रींगस से निकाली तिरंगा यात्रा

    रींगस से निकाली तिरंगा यात्रा

    इससे पहले रींगस से शहीद के घर तक शहादत के सम्मान में तिरंगा यात्रा निकाली गई, जिसमें लोग हाथों में तिरंगा लेकर शामिल हुए। दीपचंद जिंदाबाज के नारों से आसमां गूंजा दिया। शहीद को अंतिम विदाई देने पूरे राजस्थान से लोग उमड़े। इस दौरान सीकर सांसद सुमेधानंद सरस्वती, राजस्थान सरकार के शिक्षा राज्य मंत्री गोविंद सिंह डोटासरा, खंडेला विधायक महादेव सिंह, पूर्व विधायक बंशीधर बाजिया, कलेक्टर यज्ञ मित्र सिंह देव सहित कई जनप्रतिनिधी, प्रशासनिक अधिकारी व सैंकड़ों की संख्या में ग्रामीण मौजूद रहे।

    पेट्रोलिंग करते समय हुए शहीद

    पेट्रोलिंग करते समय हुए शहीद

    बारामुला इलाके में बुधवार सुबह सात बजकर 35 मिनट पर सीआरपीएफ के जवान पेट्रोलिंग पर थे। उसी दौरान पहले से घात लगाकर बैठे आतंकियों ने हमला कर दिया। हमले में G/179 बटालियन जवान दीपचंद शहीद हो गए। तीन अन्य साथी जवान भी जख्मी हुए।

    2003 में भर्ती हुए थे दीपचंद

    2003 में भर्ती हुए थे दीपचंद

    दीपचंद के शहादत की सूचना सीआरपीएफ ऑफिस की ओर से गांव में चाचा ओंकार मल को दी गई है। ओंकार मल ने बताया कि दीपचंद वर्ष 2003 में सीआरपीएफ में भर्ती हुआ था। छह महीने पहले ही जवान का हवलदार पद पर प्रमोशन हुआ था।

     दो जुड़वा बेटे व एक बेटी

    दो जुड़वा बेटे व एक बेटी

    सीआरपीएफ जवान दीपचंद की शादी वर्ष 2004 में सरोज के साथ हुई थी। इनके दो जुड़वा बेटे व एक बेटी है। पत्नी व बच्चे वर्तमान में अजमेर स्थित सेना के क्वार्टर में रहते हैं। घर में बुजुर्ग मां है। बताया जा रहा है पिता की तीन साल पहले मौत हो गई।

    मां नरेगा मजदूर, पिता की दो साल पहले मौत

    मां नरेगा मजदूर, पिता की दो साल पहले मौत

    शहीद दीपचंद वर्मा की मां प्रभाति देवी मनरेगा में मजूदरी करती हैं। बुधवार को बेटा शहीद हुआ तब भी प्रभाति मनरेगा में मजदूरी करने के लिए गई हुई थीं। शहीद के भाई सुनील ने बताया कि मां को मनरेगा में काम करने से भाई दीपचंद भी खूब मना किया करते थे, मगर वो मानती ही नहीं। मां कहती हैं कि दिनभर घर पर बैठकर क्या करूं। इसलिए मनरेगा में काम कर लेती हूं।

    पत्नी व बच्चे अमजेर में रह रहे हैं

    पत्नी व बच्चे अमजेर में रह रहे हैं

    बता दें कि शहीद दीपचंद की शादी वर्ष 2004 में सरोज देवी के साथ हुई थी। इनके पांच साल के दो जुड़वा बेटे विनय और विनित व नौ साल की बेटी कुसुम है। पत्नी व बच्चे अजमेर स्थित सीआरपीएफ के क्वार्टर में रह रहे हैं। मंगलवार को दीपचंद की अपनी मां व पत्नी से बात हुई थी। मां को उन्होंने बताया था कि 11 जुलाई को आएंगे और अजमेर से बच्चों को लेकर घर गांव बावड़ी भी आएंगे।

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    English summary
    CRPF Jawan Deepchand Verma funeral in Bawadi Villaage sikar Rajasthan
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