Rajasthan News: देवली उनियारा और खींवसर सीट के लिए कांग्रेस का मंथन, जानिए कौन होगा उमीदवार

Rajasthan News: राजस्थान में छह विधानसभा सीटों पर उपचुनाव की तारीखों की घोषणा अभी नहीं हुई है। हालांकि दोनों पार्टियों ने अपनी तैयारियां शुरू कर दी हैं। भाजपा नेता जहां हर विधानसभा सीट पर जाकर रणनीति बना रहे हैं। वहीं कांग्रेस ने जयपुर में बैठकें शुरू कर दी हैं। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा देवली उनियारा और खींवसर विधानसभा चुनाव के लिए चुनावी रणनीति, टिकट वितरण और संगठनात्मक मजबूती पर चर्चा कर रहे हैं।

इन बैठकों में जिले के प्रमुख कांग्रेस नेता भी शामिल हो रहे हैं। ये सभी आगामी चुनाव के संभावित उम्मीदवार हैं। देवली-उनियारा सीट के लिए कांग्रेस की ओर से पांच नामों पर विचार किया जा रहा है। इनमें 2008 से 2013 तक विधायक रहे और विधानसभा के उपाध्यक्ष रह चुके पूर्व विधायक राम नारायण मीणा भी शामिल हैं। प्रियंका गांधी के करीबी माने जाने वाले धीरज गुर्जर भी एक दावेदार हैं। इसके अलावा नरेश मीणा, हनुमंत मीणा और राम सिंह मीणा भी दौड़ में हैं।

govind singh dotasara

देवली-उनियारा विधानसभा सीट पर भाजपा की ओर से छह लोग टिकट के लिए दावेदारी कर रहे हैं। इनमें 2013 से 2018 तक इस सीट का प्रतिनिधित्व करने वाले राजेंद्र गुर्जर भी शामिल हैं। अन्य में विजय बैंसला, अलका सिंह गुर्जर, विक्रम सिंह गुर्जर, सीताराम पोसवाल और प्रभुलाल सैनी शामिल हैं। दोनों ही पार्टियों में इस सीट को लेकर काफी प्रतिस्पर्धा है।

गठबंधन को लेकर कांग्रेस पार्टी की रणनीति अभी भी स्पष्ट नहीं है। राजस्थान में भारत आदिवासी पार्टी या राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी जैसी पार्टियों के साथ गठबंधन की कोई स्थिति नहीं है। यह अनिश्चितता खींवसर तक भी फैली हुई है। हालांकि कांग्रेस और हनुमान बेनीवाल की आरएलपी ने लोकसभा चुनाव साथ मिलकर लड़ा था। जिसके परिणामस्वरूप नागौर में हनुमान की जीत हुई थी। लेकिन हाल की बैठकों से पता चलता है कि कांग्रेस खींवसर सीट पर स्वतंत्र रूप से चुनाव लड़ सकती है।

सूत्रों से पता चलता है कि भारत आदिवासी पार्टी के साथ गठबंधन में भी रुकावटें आ सकती हैं। गठबंधन पर स्पष्टता की कमी राजस्थान में कांग्रेस की चुनावी रणनीति में एक और जटिलता जोड़ती है। इस बीच भाजपा सभी विधानसभा सीटों पर अपना आक्रामक अभियान जारी रखे हुए है।

कांग्रेस की आंतरिक चर्चा उपचुनावों से पहले समर्थन जुटाने और उम्मीदवारों को अंतिम रूप देने के प्रयासों को दर्शाती है। दोनों ही दल आधिकारिक चुनाव तिथियों का इंतजार करते हुए प्रतिस्पर्धी लड़ाई के लिए कमर कस रहे हैं।

राजस्थान में राजनीतिक परिदृश्य गर्म हो रहा है। क्योंकि दोनों प्रमुख दल महत्वपूर्ण उपचुनावों की तैयारी कर रहे हैं। दोनों पक्षों के महत्वपूर्ण व्यक्ति रणनीति बनाने और उम्मीदवारों के चयन में सक्रिय रूप से शामिल हैं। इसलिए मतदाता तिथियों की घोषणा के बाद करीबी मुकाबले की उम्मीद है।

जैसे-जैसे तैयारियां तेज होती जा रही हैं। यह देखना बाकी है कि गठबंधन या उसके अभाव का देवली-उनियारा और खींवसर जैसे प्रमुख निर्वाचन क्षेत्रों में नतीजों पर क्या असर पड़ेगा।

इन उपचुनावों को लेकर जो उत्सुकता है। वह राजस्थान के राजनीतिक भविष्य को दर्शाती है। भाजपा और कांग्रेस दोनों ही जीत हासिल करना चाहते हैं। जो भविष्य में होने वाले राज्यव्यापी चुनावों में उनकी स्थिति को प्रभावित कर सके।

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