पूर्व सीएम गहलोत के बयान पर भजन लाल शर्मा सहित भाजपा नेताओं का पलटवार, जानिए कौन क्या बोले
Rajasthan News: राजस्थान की राजनीति में एक बार फिर गर्मी आ गई है। जब राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने मौजूदा सरकार के कामकाज को सर्कस करार दिया। पूर्व सीएम गहलोत की इस टिप्पणी ने भाजपा नेताओं के खेमे में हलचल मचा दी। जिसमें मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने गहलोत के कार्यकाल की तुलना सर्कस से करते हुए उन पर तीखा पलटवार किया।
मीडिया को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने गहलोत के पांच साल के शासनकाल को अस्थिरता से भरा बताया। उन्होंने कहा कि गहलोत के शासनकाल में होटल में ठहरने और अनियमित व्यवहार जैसे संदर्भ दिए जाते हैं। जो दर्शाता है कि उनकी सरकार अस्थिर थी। सीएम शर्मा ने गहलोत द्वारा सोशल मीडिया प्लेटफार्म X पर की जा रही लगातार पोस्टों पर भी निशाना साधते हुए कहा कि उन्हें अपने पिछले बयानों और कार्यों पर आत्ममंथन करना चाहिए।

केंद्रीय पर्यटन और संस्कृति मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने भी गहलोत पर निशाना साधा। हालांकि उन्होंने गहलोत का नाम लिए बिना उनके बयान की आलोचना करते हुए कहा कि ये बयान व्यक्तिगत असंतोष से उपजे हैं। केंद्रीय मंत्री शेखावत ने गहलोत के कार्यकाल में राजस्थान में महिलाओं की सुरक्षा को लेकर भी सवाल खड़े किए। उन्होंने कहा कि उस अवधि में महिलाओं के खिलाफ अपराधों में उल्लेखनीय वृद्धि हुई। जिससे गहलोत सरकार की कार्यशैली पर सवाल उठाए जा रहे हैं।
भाजपा नेता राजेंद्र राठौड़ ने पूर्ववर्ती गहलोत सरकार द्वारा भ्रष्टाचार को बढ़ावा देने का आरोप लगाया। उन्होंने पेपर लीक में शामिल लोगों की गिरफ्तारी को कांग्रेस शासन के भ्रष्टाचार का प्रमाण बताया और कहा कि अब वर्तमान मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा को इस गड़बड़ी को सुधारने का काम सौंपा गया है।
संसदीय कार्य मंत्री जोगाराम पटेल ने भी गहलोत की आलोचना की और कहा कि उनका असंतोष मौजूदा सरकार द्वारा पेपर लीक घोटालों और अन्य कुप्रथाओं पर की गई कार्रवाई से उपजा है। पटेल ने मौजूदा सरकार की उपलब्धियों पर प्रकाश डालते हुए कहा कि उन्होंने रोजगार, महिला सुरक्षा, किसान सम्मान, पानी और बिजली की उपलब्धता जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर काफी काम किया है। उन्होंने यह भी बताया कि 90,000 नई नौकरियों का निर्णय लिया गया है। जो राज्य में प्रगति का प्रतीक है।
आपको बता दें कि पूर्व सीएम गहलोत ने मौजूदा राज्य सरकार पर सर्कस का आरोप लगाते हुए मंत्रियों के इस्तीफों और सुलह के असफल प्रयासों का हवाला दिया था। उन्होंने कहा था कि यह सरकार अपने कर्तव्यों में पूरी तरह विफल रही है। इस पर भाजपा नेताओं ने तीखी प्रतिक्रिया दी और गहलोत पर उनके कार्यकाल में हुए भ्रष्टाचार और विसंगतियों की अनदेखी करने का आरोप लगाया।
राजस्थान में राजनीतिक बहस ने एक बार फिर से जोर पकड़ लिया है। दोनों दलों के बीच आरोप-प्रत्यारोप का सिलसिला तेज हो गया है। यह बहस न केवल कांग्रेस और भाजपा के बीच राजनीतिक प्रतिद्वंद्विता को दर्शाती है। बल्कि राज्य में प्रशासनिक ईमानदारी और सुशासन को लेकर गंभीर सवाल भी खड़े करती है।
राजस्थान के नागरिक इस राजनीतिक उठापटक के बीच अपने राज्य की वास्तविक स्थिति पर मंथन करने को मजबूर हो गए हैं। जहां हर पार्टी अपने रिकॉर्ड को सही ठहराने में लगी हुई है।












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