पिता को बचाने के लिए आधी रात को भालू से भिड़ गई 14 साल की बेटी, पढ़िए वो खौफनाक कहानी उसी की जुबानी
सिरोही, 7 सितम्बर। रात के करीब 3 बज रहे थे। मैं गहरी नींद में सोई हुई थी। अचानक कुत्तों के भौंकने की आवाज सुनकर मेरी नींद टूटी। मैं माजरा समझ पाती उससे पहले ही मुझे पिताजी के चीखने व चिल्लाने और बचाने की गुहार लगाते आवाज सुनाई दी। मैं और मां उनकी तरफ दौड़े। वहां का मंजर देख सिहरन सी दौड़ गई। एक बड़े से भालू ने पिताजी को चारपाई से नीचे गिरा रखा था। वह उनके ऊपर बैठकर उनके शरीर को नोंच रहा था। पहले तो डर के मारे पांव कांपने लग गए थे, लेकिन पिताजी को बचाने का ख्याल आते ही एकदम से शरीर में नई स्फूर्ती आ गई। इसके बाद मैंने पास में पड़ी लाठी उठाकर भालू पर ताबड़तोड़ हमले करने शुरू कर दिए। मुझे पता था कि भालू मुझ पर भी हमला कर सकता है, मगर मुझे पिताजी को बचाना था। इसलिए खुद की जान की परवाह नहीं की। यह कहना है कि राजस्थान की जोशना चौधरी का।

जोशना चौधरी सिरोही जिले के रेवदर कस्बे के सिलदर गांव की रहने वाली
जोशना चौधरी महज 14 साल की है। सिरोही जिले के रेवदर कस्बे के सिलदर गांव की रहने वाली है। इसने पिता के खातिर अपनी जान दांव पर लगा दी और पिता को मौत के मुंह से निकाल लाई। मामला सोमवार रात को है। सोशल मीडिया पर खूब वायरल हो रहा है। हर कोई जोशना की हिम्मत की तारीफ करते नहीं थक रहा।

करमा राम चौधरी सोमवार रात को अपने खेत पर सो रहा था
दरअसल, गांव सिलदर का किसान करमा राम चौधरी सोमवार रात को अपने खेत पर सो रहा था। जोशना अपनी मां के साथ कमरे में सो रही थी। रात को अचानक भालू ने करमा राम पर हमला कर दिया। भालू को देखकर कुत्तों ने शोर मचाया तो जोशना की नींद टूटी और वह बिना किसी देरी के पिता को बचाने के लिए भालू से भिड़ गई। करीब 7-8 मिनट के संघर्ष के बाद जोशना ने भालू को भगा दिया और अपने पिता की जान बचा ली।

लाठी मारने पर भालू और ज्यादा आक्रामक हो गया
दैनिक भास्कर की रिपोर्ट के अनुसार जोशना ने बताया कि लाठी मारने पर भालू और ज्यादा आक्रामक हो गया और उनकी तरफ लपका, लेकिन खेत पर अंधेरे के कारण उसको कुछ भी ठीक से दिखाई नहीं दे रहा था। भालू को उनकी तरफ आते देख मां ने भी पत्थर फेंकना शुरू किया और वह लाठी लेकर भालू से मुकाबला करती रही। अगर भालू उसे पकड़ लेता तो शायद में बच नहीं पाती। लेकिन उसे अपने पिता को बचाना था, इसलिए दूसरा रास्ता नहीं था।

चौधरी का गुजरात के मेहसाणा के अस्पताल में इलाज चल रहा
भालू के हमले में घायल किसान को परिजन जसवंतपुरा अस्पताल ले गए, जहां प्राथमिक इलाज के बाद उनको मेहसाणा (गुजरात) के अस्पताल में भर्ती कराया। फिलहाल घायल करमा राम चौधरी का गुजरात के मेहसाणा के अस्पताल में इलाज चल रहा है। हादसे के बाद जोशना और उसका परिवार अभी भी सदमे में हैं। सोशल मीडिया पर कई लोग उनको बहादुरी के लिए पुरस्कार देने की भी मांग कर रहे हैं। जोशना 8वीं तक पढ़ी है और उसके बाद खेत से स्कूल की दूरी ज्यादा होने के कारण पढ़ाई छोड़ दी।

भालू खुद को खतरे में पाकर ज्यादा आक्रामक हो जाता है
मीडिया से बातचीत में उदयपुर के अनिल रोजर्स (वन्यजीव संरक्षणकर्ता) एवं लक्ष्मण पारंगी ने बताया कि भालू खुद को खतरे में पाकर ज्यादा आक्रामक हो जाता है। शिकार छूट भी जाए तो फिर पकड़ लेता है। व्यक्ति अकेला हो तो बचना मुश्किल होता है। वह सिर पर पहले हमला करता है। एक वार ही में व्यक्ति को अधमरा कर देता है। आंख पर चोट लगने पर संभवत: पीछे हट सकता है।












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