गणेश चतुर्थीः लंबोदर की ये दुर्लभ प्रतिमाएं क्या आपने देखी हैं? अष्टभुजाओं वाले गणपति का करें दर्शन

रायपुर। देशभर में आज से गणेशोत्सव शुरू हो गया है। इस खास मौके पर शहर के अलग-अलग इलाकों में गणपति बप्पा की मूर्ति रखी जाएगी, जिसका आप कोरोना काल में सुरक्षा का ध्यान रखते हुए दर्शन कर सकते हैं। लेकिन इसके अलावा आप संस्कृति विभाग परिसर में संचालित महंत घासीदास म्यूजियम में गणेश जी की 1 हजार साल पुरानी प्रतिमाओं के दर्शन भी कर सकते हैं। इस म्यूजियम में बारसूर के जुड़वां गणेश की प्रतिमा का दर्शन कर सकतेह हैं। इसकेअलावा नृत्य करते अष्टभुजाओं वाले गणपति और आसनस्थ लम्बोदर गणेश की सैकड़ों साल पुरानी प्रतिमाएं को भी आप परिवार के साथ जाकर देख सकते हैं।

सुबह 10 बजे से शाम 5 बजे तक कर सकते हैं विजिट

सुबह 10 बजे से शाम 5 बजे तक कर सकते हैं विजिट

इसके अलावा कैलाश पर्वत पर विराजमान उमा महेश्वर के चरणों के पास बैठे गणेश और कार्तिकेय की दुर्लभ मूर्ति के दर्शन भी यहां कर सकते हैं। इनमें से तीन मूर्तियां कारीतलाई जबलपुर से मिली हैं। छुटि्टयों के चलते म्यूजियम सोमवार खुलेगा। यहां सुबह 10 से शाम 5 बजे तक विजिट कर सकते हैं।

नृत्य मुद्रा में गणेश जी की प्रतिमा

नृत्य मुद्रा में गणेश जी की प्रतिमा

ये मूर्ति नृत्य गणपति की है। कारीतलाई, जबलपुर से मिली 10वीं सदी की इस प्रतिमा में गणेश जी नृत्य मुद्रा में हैं। उनके उदर में यज्ञोपवीत है। गले में हार, हाथ में कंकण और भुजाओं में भुजबंध दृष्टव्य है। ये प्रतिमा अष्टभुजी है, जिनमें से 6 भुजाएं खंडित हैं। सूंड का हिस्सा और कान भी खंडित हो चुका है।

भगवान शिव और मां पार्वती के साथ गणेशजी की प्रतिमा

भगवान शिव और मां पार्वती के साथ गणेशजी की प्रतिमा

ये है उमा महेश्वर। 10वीं सदी की ये प्रतिमा कारीतलाई, जबलपुर से मिली है। बलुआ पत्थर की इस प्रतिमा में शिव चतुर्भुजी रूप में हैं। किंतु माता पार्वती के दो हाथ हैं। शिवजी के ऊपरी दाएं हाथ में त्रिशूल और बाएं में सर्प है। उमा महेश्वर कैलाश पर्वत पर विराजमान हैं। निचले हिस्से में एक ओर गणेश और दूसरी ओर कार्तिकेय हैं। कैलाश पर्वत उठाने का प्रयास करते रावण की झलक भी मूर्ति में देख सकते हैं।

गणेशजी के कंधे पर मौजूद है नाग

गणेशजी के कंधे पर मौजूद है नाग

10वीं सदी ईसवी की ये प्रतिमा कारीतलाई जबलपुर से मिली है। आसनस्थ लम्बोदर गणेश के बाएं कंधे पर नाग मौजूद है। सिर पर मुकुट और गले में हार है। सूंड का हिस्सा खंडित है। उनके कान सूप के समान बड़े हैं। चतुर्भुजी गणेश के ऊपर के दाहिने हाथ में मोदक है। दोनों बाएं हाथ और दाईं ओर का निचला हाथ खंडित हो चुका है।

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