पुतिन ने माना चीन की हैं यूक्रेन युद्ध को लेकर चिंताएं

व्लादिमीर पुतिन और शी जिनपिंग

नई दिल्ली, 16 सितंबर। पुतिन के बयान को यूक्रेन युद्ध के विषय पर रूस और चीन के बीच तनाव की पहला स्वीकृति माना जा रहा है. बात को नरमी से पेश करने के लिए उन्होंने यह भी कहा कि चीन ने इस विषय पर एक "संतुलित" रुख अपनाया है और रूस इस बात का "बहुत आदर" करता है.

शी के साथ बातचीत से पहले पुतिन ने उनसे कहा, "हम यूक्रेन संकट पर हमारे चीनी दोस्तों के संतुलित रुख का बहुत आदर करते हैं. हम इसके बारे में आपके सवालों और आपकी चिंताओं को समझते हैं. आज की बैठक में हम इस पर अपना पक्ष रखेंगे."

एससीओ के शिखर सम्मलेन से पहले पुतिन, शी और मंगोलिया के राष्ट्रपति उखना खुरेलसुख

हालांकि चीन की 'चिंताओं' और 'सवालों' के बारे में रूसी और चीनी पक्ष ने विस्तार से नहीं बताया. दोनों नेताओं की बातचीत में काफी गर्मजोशी दिखी और दोनों ने पश्चिम देशों को चुनौती भरा संदेश दिया. शी ने पुतिन से कहा, "चीन रूस के साथ मिल कर बड़ी शक्तियों की भूमिका को स्वीकारने की कोशिश करने के लिए और सामाजिक उथल पुथल से भरी इस दुनिया में स्थिरता और सकारात्मक ऊर्जा लाने के लिए एक मार्गदर्शक रौशनी बनने के लिए तैयार है."

(पढ़ें: मोदी, पुतिन, जिनपिंग को साथ ला रहा है एससीओ शिखर सम्मेलन)

एकध्रुवीय व्यवस्था के खिलाफ

बिना अमेरिकी और अन्य पश्चिमी देशों का नाम लिए पुतिन ने कहा कि "एक एकध्रुवीय विश्व बनाने की कोशिशों ने हाल ही में एक बदसूरत रूप ले लिया है और ये पूरी तरह से अस्वीकार्य है." उन्होंने ताइवान के मुद्दे पर चीन के रुख का समर्थन किया और कहा, "हम एक चीन के सिद्धांत को मानते हैं. हम ताइवान स्ट्रेट में अमेरिका और उसके सैटेलाइटों के उकसावे की निंदा करते हैं."

दोनों नेता उज्बेकिस्तान के समरकंद में एससीओ के शिखर सम्मलेन के लिए पहुंचे हैं. उन्होंने आपस में बातचीत शिखर सम्मलेन से पहले की. सम्मलेन के मुख्य कार्यक्रम आज होंगे. बैठक पर विशेष रूप से अंतरराष्ट्रीय समुदाय की नजर है क्योंकि यूक्रेन युद्ध की शुरुआत के बाद यह पहला बड़े स्तर का ऐसा आयोजन है जिसमें पुतिन शारीरिक रूप से हिस्सा ले रहे हैं.

चीन और रूस मिल कर सम्मलेन से पश्चिमी देशों को क्या सन्देश देते हैं, इस पर भी पश्चिमी नेताओं और समीक्षकों की निगाहें टिकी हैं. साथ ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के भी सम्मलेन में भाग लेने से भारत-रूस संबंधों और भारत-चीन संबंधों को किस तरह की दिशा मिलेगी इस पर भी बहस चल रही है.

भारत-रूस संबंध

मोदी भी पुतिन से अलग से मिलेंगे, लेकिन शी से उनकी अलग से मुलाकात की आधिकारिक रूप से पुष्टि नहीं की गई है. यूक्रेन पर रूस के हमले की वजह से अमेरिका और यूरोपीय देशों ने रूस पर कई प्रतिबंध लगा रखे हैं. इन प्रतिबंधों के बीच भारत और रूस के व्यापारिक रिश्ते और गहराए हैं. रूस भारत को सस्ते दामों पर कच्चा तेल दे रहा है और भारत ने बीते छह महीनों में रूसी तेल की खरीद को काफी बढ़ाया है.

(पढ़ें: जीती जमीन को खोते जा रहे पुतिन के सामने क्या रास्ते हैं)

माना जा रहा है कि अब भारत रूस से खाद की आपूर्ति का भी विस्तार करना चाह रहा है और शिखर सम्मलेन के दौरान इस पर एक समझौते पर हस्ताक्षर किए जाने की भी उम्मीद जताई जा रही है.

(एएफपी से जानकारी के साथ)

Source: DW

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