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किस पार्टी को पंजाब चुनाव में बदले समीकरण से होगा सबसे ज्यादा नुकसान ? जानिए

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चंडीगढ़, 21 नवंबर: पंजाब चुनाव में इसबार चार दलों और गठबंधनों के बीच मुकाबला होने की संभावना तय है। पंजाब में अबतक ऐसा मुकाबला देखने को नहीं मिला, इसलिए इसबार वहां का चुनावी गुना-गणित का हिसाब लगाना बहुत ही चुनौतीपूर्ण है। ऊपर से ना तो इस बार वहां 'उड़ता पंजाब' जैसा को चुनावी अभियान है। अलबत्ता, लोक-लुभावन वादों का पिटारा जरूर खोला जा रहा है। लेकिन, कृषि कानूनों की वापसी के ऐलान के साथ वहां जो चुनावी समीकरण बन रहे हैं, उससे ज्यादा फायदा किसे मिलेगा यह अंदाजा लगाना तो मुश्किल है, लेकिन कुछ को नुकसान होने की परिस्थिति जरूर दिखाई पड़ रही है।

उलट-पुलट हो गया पंजाब का चुनावी समीकरण

उलट-पुलट हो गया पंजाब का चुनावी समीकरण

कैप्टन अमरिंदर सिंह फैक्टर की वजह से पहली बार पंजाब विधानसभा चुनावों में चतुष्कोणीय मुकाबला तय है। पंजाब में लंबे वक्त से हर पांच साल बाद कांग्रेस और शिरोमणि अकाली दल(एसएडी)-बीजेपी गठबंधन में सत्ता का अदलाव-बदलाव होता रहा है। हालांकि, पंजाब की राजनीति में बीजेपी कभी भी मुख्य भूमिका में नहीं रही है। लेकिन, जालंधर, होशियारपुर और पठानकोट के अलावा बाकी इलाकों में भी शहरी हिंदू मतदाताओं पर उसका प्रभाव जरूर रहा है। 2014 के लोकसभा चुनाव में पहली बार आम आदमी पार्टी ने एंट्री मारी और 2017 आते-आते सत्ताधारी गठबंधन एसएडी-बीजेपी को पीछे छोड़कर दूसरे नंबर पर पहुंच गई। इस चुनाव में कांग्रेस ने वहां के चुनावी परंपरा को कायम रखते हुए फिर से सत्ता हासिल की। लेकिन, इसबार कैप्टन अमरिंदर सिंह की पंजाब लोक कांग्रेस के मैदान में होने और बीजेपी के साथ तालमेल के 100% से ज्यादा के दावे ने पूरा समीकरण ही उलट-पुलट कर दिया है।

चुनावों में किसान आंदोलन को ज्यादा तूल देना अब मुश्किल

चुनावों में किसान आंदोलन को ज्यादा तूल देना अब मुश्किल

मौजूदा परिस्थितियों में पंजाब में जो संभावनाएं नजर आ रही हैं, उसमें मुकाबला सत्ताधारी कांग्रेस, आम आदमी पार्टी, शिरोमणि अकाली दल-बसपा गठबंधन और पंजाब लोक कांग्रेस-बीजेपी के बीच ही तय लग रहा है। कृषि कानून वापस लिए जाने से पहले तक आमतौर पर सिख वोटरों में बीजेपी के खिलाफ इस कृषि प्रधान राज्य में जबर्दस्त माहौल देखा जा रहा था। हालांकि, भाजपा यहां बहुत बड़ी राजनीतिक शक्ति कभी नहीं रही, लेकिन उसके नेताओं को पिछले करीब साल भर से जिस तरह से सामाजिक बहिष्कार की स्थिति झेलनी पड़ रही थी, निश्चित तौर पर उस तल्खी में कमी आने की उम्मीद है। कैप्टन अमरिंदर सिंह जैसे राज्य के सबसे प्रभावशाली नेता ने कांग्रेस से निकलने से पहले से ही जिस तरह से भाजपा के साथ चलने की तैयारी कर रखी है, उसके संकेतों को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। अबतक कृषि कानूनों को लेकर ही कांग्रेस, शिरोमणि अकाली दल और आम आदमी पार्टी खुद को किसानों का रहनुमा साबित करने में लगे हुए थे। लेकिन, अब राजनीतिक हालात तेजी से करवट लेने लगे हैं। अब इन पार्टियों के लिए किसान आंदोलन को ज्यादा तूल देना बहुत मुश्किल हो गया है।

पंजाब चुनाव में क्या कहते हैं आंकड़े ?

पंजाब चुनाव में क्या कहते हैं आंकड़े ?

अगर हम पंजाब में हुए पिछले चार चुनावों के मत प्रतिशत का विश्लेषण करें तो जो ट्रेंड नजर आ रहा है, उससे 2022 के विधानसभा चुनावों की तस्वीर का एक पूर्वानुमान मिल सकता है। पहले जरा पंजाब विधानसभा चुनाव, 2017 के चुनावी आंकड़ों पर जरा नजर डाल लेते हैं। कुल 117 सीटों में से कांग्रेस- 38.50% (77), एएपी- 23.72%(20), एसएडी- 25.24% (15),बीजेपी- 5.39% (3) और बीएसपी- 1.52% (0) वोट आया था। जब हम पंजाब में हुए पिछले चार चुनावों का विश्लेषण कर रहे हैं तो 2017 का चुनाव शिरोमणि अकाली दल, बीजेपी और बीएसपी के लिए बेहद खराब प्रदर्शन था। 2014 में नई एंट्री आम आदमी पार्टी की हुई थी और दोनों चुनावों में ही उसे बड़ा फायदा हुआ था। फायदे में कांग्रेस भी रही थी और वह 2012 से अधिक सीटें लाकर सत्ता में आ गई थी। लेकिन, उसके वोट शेयर में भी सेंध लगी थी।

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पंजाब में किसी पार्टी को होगा सबसे ज्यादा नुकसान ?

पंजाब में किसी पार्टी को होगा सबसे ज्यादा नुकसान ?

अब हम बाकी तीन चुनावों में इन पार्टियों को मिले वोट शेयर का हर चुनाव के आधार पर विश्लेषण करते हैं-

बहुजन समाज पार्टी

पंजाब विधानसभा चुनाव-2012- 4.29%

लोकसभा चुनाव, 2014- 1.91%

लोकसभा चुनाव, 2019- 3.525%

कांग्रेस

पंजाब विधानसभा चुनाव-2012 - 40.09%

लोकसभा चुनाव, 2014- 33.19% (3)

लोकसभा चुनाव, 2019- 40.5779% (8)

आम आदमी पार्टी

2012 में पार्टी नहीं थी

लोकसभा चुनाव, 2014- 24% (4)

लोकसभा चुनाव, 2019- 7.4629% (1)

शिरोमणि अकाली दल

पंजाब विधानसभा चुनाव-2012 - 34.73%

लोकसभा चुनाव, 2014- 26.37% (4)

लोकसभा चुनाव, 2019- 27.7612% (2)

भारतीय जनता पार्टी

पंजाब विधानसभा चुनाव-2012 - 7.18%

लोकसभा चुनाव, 2014- 8.77% (2)

लोकसभा चुनाव, 2019- 9.738% (2)

अगर सभी दलों को मिले वोट शेयर को देखें तो पंजाब में आम आदमी पार्टी जितनी तेजी से आई थी, उसी का वोट शेयर लगातार और सबसे तेजी से गिरा है। बाकी पार्टियों के वोट में काफी उतार-चढ़ाव आता रहा है। ऐसे में बसपा का वोट अगर अकाली दल के साथ गया और अमरिंदर सिंह कांग्रेस के वोट बैंक में सेंध लगाने में सफल हो गए तो जिन दलों को सबसे ज्यादा वोटों का नुकसान हो सकता है, वह आम आदमी पार्टी और कांग्रेस ही लगती है। कांग्रेस के साथ तो एंटी-इंकंबेंसी और अंदरूनी लड़ाई की भी परेशानी है। हालांकि, यह सिर्फ पिछले कुछ चुनावों में पड़े वोटों के ट्रेंड के आधार पर एक आकलन भर है।

English summary
After the formation of new equations in the Punjab Assembly elections, the Congress and the Aam Aadmi party may face a big setback
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