इस बार रिस्क लेने के मूड में नहीं है कांग्रेस, इस तरह तैयार की गई रणनीति
पांच राज्यों में हुए मतदान के नतीजे 10 मार्च को आने वाले हैं। चुनाव के नतीजे आने से पहले राजनीतिक पार्टियों की सक्रियता बढ़ गई है।
चंडीगढ़, 9 मार्च 2022। पांच राज्यों में हुए मतदान के नतीजे 10 मार्च को आने वाले हैं। चुनाव के नतीजे आने से पहले राजनीतिक पार्टियों की सक्रियता बढ़ गई है। पिछले विधानसभा चुनाव में कांग्रेस गोवा में सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी थी लेकिन सरकार नहीं बना पाई थी। इस बात से सबक लेते हुए कांग्रेस इस बार किसी भी तरह से रिस्क लेने के मूड में नहीं है, इसलिए मतगणना से पहले पार्टी पूरी तरह से मुस्तैद हो चुकी है। किसी भी तरह से चूक नहीं हो इस बाबत कांग्रेस ने रणनीति भी तैयार कर ली है। यही वजह है कि कांग्रेस ने अपने दिग्गज नेताओं को चुनाव प्रबंधन की ज़िम्मेदारी सौंप दी है।

चुनाव के नतीजे से पहले सभी सियासी दल मुस्तैद
विधानसभा चुनाव के नतीजे से पहले सभी सियासी दल मुस्तैद होने के साथ ही चुनावी रणनीतियां तौयार करने में जुटी हुई है। 10 मार्च को आने वाले चुनाव परिणाम से पहले कांग्रेस ने सभी चुनावी प्रदेशों में चुनाव प्रबंधन के लिए पार्टी के दिग्गज नेताओं को नियुक्त कर दिया है। इसी कड़ी में कांग्रेस ने पंजाब में पार्टी महासचिव अजय माकन और पार्टी प्रवक्ता पवन खेड़ा चुनाव प्रबंधन की ज़िम्मेदारी दी है। दोनों को विशेष पर्यवेक्षक के तौर पर तैनात किया गया है। पवन खेड़ा कल ही चंडीगढ़ पहुंच गए थे, आज अजय माकन भी चंडीगढ़ पहुंच गए हैं। देहरादून की ज़िम्मेदारी राज्यसभा सदस्य दीपेंद्र सिंह हुड्डा को दी गई है। छत्तीसगढ़ के स्वास्थ्य मंत्री टीएस सिंह देव, पार्टी महासचिव मुकुल वासनिक और विन्सेंट पाला को मणिपुर में चुनाव प्रबंधन की ज़िम्मेदारी दी गई। इसके अलावा गोवा में कर्नाटक कांग्रेस के अध्यक्ष डी के शिवकुमार विशेष पर्यवेक्षक होंगे।
रिस्क लेने के मूड में नहीं है कांग्रेस
कांग्रेस आलाकमान की तरफ़ से चुनावी प्रदेशों में नियुक्त किए गए विशेष पर्यवेक्षकों को त्रिशंकु विधानसभा की स्थिति में ख़ास ध्यान रखने की जिम्मेदारी दी गई है। पंजाब, उत्तराखंड, मणिपुर और गोवा में त्रिशंकु विधानसभा की स्थिति में कांग्रेस को एकजुट रखने के लिए ही कांग्रेस ने यह रणनीति तैयार की है। सियासी जानकारों की मानें तो कांग्रेस ने उन राज्यों में विशेष पर्यवेक्षकों को नियुक्त किया है जहां किसी भी सियासी पार्टी को पूर्ण बहुमत नहीं मिल पाता है। यह कांग्रेस की ऐसे प्रदेशों में सरकार बनाने की रणनीति का ही एक हिस्सा है। इसके साथ ही सूत्रों के हवाले से यह भी ख़बर आ रही है कि कांग्रेस शासित राज्यों में रिसोर्ट बुक कर लिए गए हैं ताकि नवनिर्वाचित विधायकों को तुरंत वहां शिफ़्ट कर दिया जाए। आपको बता दें कि पिछले विधानसभा चुनाव में कांग्रेस बड़ी पार्टी बनकर उभरी थी लेकिन गोवा में सरकार नहीं बना पाई थी। इसलिए इस बार कांग्रेस हर पहलु के लिए प्लान तैयार कर काम कर रही है।
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