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पंजाब विधानसभा चुनाव : कैप्टन के सहारे क्या पंजाब में बेहतर प्रदर्शन कर पाएगी भाजपा?

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चंडीगढ़, 23 नवंबर। भाजपा को पंजाब में एक कैप्टन की जरुरत थी। अमरिंदर सिंह के रूप में यह तलाश पूरी होती दिख रही है। कैप्टन अमरिंदर टीम को फ्लाईंग ओपनिंग स्टार्ट देंगे ताकि भाजपा मिडिल ऑर्डर में बल्लेबाजी कर अपनी बिखरी पारी को संभाल सके। पिछले तीन चुनावों से पंजाब में भाजपा का ग्राफ लगातार नीचे गिर रहा है। लेकिन अब तीन कृषि कानून को वापस लिये जाने के बाद उसमें उम्मीद की एक नयी किरण फूटी है।

punjab election 2022 Will BJP perform better in state with help of captain amrinder singh?

कैप्टन अमरिंदर की रहनुमाई में भाजपा एक नयी पारी खेलने की तैयारी कर रही है। अमरिंदर सिंह और भाजपा के गठबंधन का स्वरूप कैस होगा, ये अभी स्पष्ट नहीं है। लेकिन उन्होंने भाजपा के साथ मिल कर चुनाव लड़ने की घोषणा की है। इस बीच सिखों की सर्वोच्च संस्था श्री अकाल तख्त साहिब के जत्थेदार ज्ञानी हरप्रीत सिंह ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के समर्थन में बयान देकर एक नये राजनीतिक समीकरण के संकेत दिये हैं।

गांव के किसान भाजपा के प्रति नरम हुए !

गांव के किसान भाजपा के प्रति नरम हुए !

कृषि कानून वापस तो ले लिये गयें हैं लेकिन इसके अंतिम समाधान की प्रक्रिया अभी बाकी है। चर्चा है कि भाजपा कैप्टन अमरिंदर सिंह के सहयोग से इससे मुत्तलिक सारे विवादों का शांतिपूर्ण समाधान चाहती है ताकि किसान समुदाय की नाराजगी दूर हो सके। भाजपा अभी तक पंजाब के शहरी क्षेत्र वाली 23 सीटों पर चुनाव लड़ती रही है। कृषि कानून वापस लिये जाने के बाद पंजाब के गांवों में भाजपा के प्रति नजरिया बदला है। श्री अकाल तख्त के जत्थेदार ज्ञानी हरप्रीत सिंह ने सोमवार को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और उनकी पूरी कैबिनेट को कृषि कानून वापस लेने के लिए धन्यवाद दिया है। इससे सिख किसान भाजपा के प्रति नरम हो गये हैं। गांवों में रहने वाले जो किसान भाजपा और केन्द्र सरकार का पुरजोर विरोध कर रहे थे अब उनके तेवर ढीले पड़ गये हैं। वे केन्द्र सरकार के फैसले को ठीक बता कर सिर्फ इतना कह रहे हैं कि ये देर से से उठाया गया कदम है। किसान इस बात पर राजी हो गये हैं कि अगर कोई नेता गांव आता है तो उसका घेराव नहीं किया जाएगा। गुरुनानक देव की जयंती पर कानून वापसी की घोषणा से सिख किसानों में एक अच्छा संदेश गया है। भाजपा के लिए यह राहत की बात है। अब उसके पास कैप्टन अमरिंदर सिंह जैसा आजमाया हुआ लोकप्रिय चेहरा होगा जिनकी मदद से वह गांवों में पैर जमाने की कोशिश करेगी।

कैप्टन की मदद से गांवों में पारी जमाएगी भाजपा

कैप्टन की मदद से गांवों में पारी जमाएगी भाजपा

पंजाब विधानसभा की 117 सीटों में से 77 सीटों पर किसान निर्णायक स्थिति में हैं। इन 77 सीटों में से 51 अर्द्धशहरी और 26 ग्रामीण इलाकों में हैं। पंजाब की 75 फीसदी आबादी खेती से जुड़ी है। इसलिए चुनावी नजरिये से किसान बहुत मजबूत हैं। पंजाब के मालवा क्षेत्र (सतलुज नदी के दक्षिण का इलाका) में सबसे अधिक 69 सीटें हैं। इनमें अधिकतर सीटें ग्रामीण इलाकों की हैं। अब कैप्टन अमरिंदर सिंह भाजपा की छवि बनाने की भी कोशिश कर रहे हैं कि क्यों उनका भी राजनीतिक भविष्य इस नये गठबंधन पर ही टिका है। वे सिख किसानों से कह रहे हैं कि अब ये साबित हो गया कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जनता की बात सुनते हैं। एक दूसरे बयान में उन्होंने कहा, भाजपा साम्प्रदायिक पार्टी नहीं है। वह मुसलमान विरोधी नहीं है। कैप्टन अमरिंदर सिंह मालवा इलाके के ही रहने वाले हैं और उनका यहां प्रभाव रहा है। 2017 में उन्होंने कांग्रेस को यहां की 69 में 40 सीटों पर जीत दिलायी थी। 'बेअदबी मामले' की वजह से मालवा में शिरोमणि अकाली दल को बहुत नुकसान उठान पड़ा है। उसकी जमीन पर आम आदिमी पार्टी ने प्रभाव जमा लिया था। आप को 20 में से अधिकांश सीटें इसी क्षेत्र में मिली थीं। पिछले पांच साल में आप टूट-फूट से काफी कमजोर हुई है। अब बदली हुई परिस्थितियों में अमरिंदर सिंह और भाजपा मालवा में नयी पिच बना रहे हैं।

क्या मोदी की छवि किसान समर्थक की है ?

क्या मोदी की छवि किसान समर्थक की है ?

कृषि कानूनों को वापस लिये जानी की घोषणा का क्या असर हुआ, इस बात को समझने में अभी वक्त लगेगा। लेकिन मोटे तौर पर यह माना जा रहा है कि संकटों में घिरे मोदी को इस घोषणा से बहुत राहत मिली है। सबसे बड़ा संदेश ये गया कि मोदी जिद्दी नहीं बल्कि जनता की बात सुनने वाले नेता हैं। कैप्टन अमरिंदर सिंह इसी लाइन पर राजनीतिक पारी को आगे बढ़ा रहे हैं। राजनीतिक जानकारों के मुताबिक, अब अधिकतर लोग मोदी को किसान समर्थक नेता मान रहे हैं। कई सर्वे और मीडिया रिपोर्ट इस बात की तस्दीक करते हैं। नरेन्द्र मोदी की इस नयी छवि के साथ भाजपा अब पंजाब के ग्रामीण इलाकों में भी अपना विस्तार करेगी। 2007 में भाजपा ने 23 सीटों पर चुनाव लड़ कर 19 पर जीत हासिल की थी। लेकिन फिर वह नीचे गिरती चली गयी। पंजाब में उसकी स्थिति इसलिए कमजोर होती रही कि क्योंकि उसके पास कोई बड़ा चेहरा नहीं था। अब कैप्टन अमरिंदर उसके साथ सीट शेयरिंग की बात कह चुके हैं। भाजपा जैसे बिहार में नीतीश कुमार को चुनावी चेहरा मान कर आगे बढ़ती रही वैसे ही पंजाब में वह कैप्टन के साथ कर अपनी पारी को 'एक्सप्लोर' करेगी।

English summary
punjab election 2022 Will BJP perform better in state with help of captain amrinder singh?
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