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क्या पंजाब में SAD और कांग्रेस हो सकते हैं एक ? प्रकाश सिंह बादल के इस बयान से चढ़ा सियासी पारा

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चंडीगढ़, अक्टूबर 16, 2021। पंजाब में बीएसएफ का दायरा बढ़ाने के मुद्दे पर सियासी सरगर्मियां बढ़ चुकी हैं। राजनीतिक दलों के नेताओं के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर जारी है। इसी कड़ी में शिरोमणि अकाली दल के सबसे वरिष्ठ नेता प्रकाश सिह बादल ने जो बयान दिया है उससे केन्द्र से लेकर राज्य तक सियासी फ़िज़ा बदलने के आसार दिख रहे हैं। बीएसएफ का दायरा बढ़ाने के मुद्दे के बहाने प्रकाश सिह बादल ने विपक्षी दलों की एकता की पहल को भी दावत दी है। एक वक़्त था कि प्रकाश सिंह बादल कांग्रेस को अपनी सबसे बड़ी दुश्मन पार्टी की संज्ञा देते थे, लेकिन अब वो कांग्रेस से हाथ मिलाने को भी तैयार हैं। उन्होंने कहा कि मैं सभी सियासी दलों से कहना चाहता हूं कि केन्द्र के इस फ़ैसले पर आपस में लड़ना बंद करें और केंद्र ख़िलाफ़ साथ मिलकर लड़ें।

पंजाब सरकार को सुझाव

पंजाब सरकार को सुझाव

शिरोमणि अकाली दल के सबसे वरिष्ठ नेता और पूर्व प्रधानमंत्री प्रकाश सिंह बादल ने कहा कि यह किसी सियासी पार्टी की प्रतिष्ठा का सवाल नहीं है। शिरोमणि अकाली दल उस पार्टी के का साथ चलने को तैयार है जो भी पार्टी इसके ख़िलाफ़ लड़ेगी। उन्होंने कहा कि शिरोमणि अकाली दल सुर्खियों में आने के लिए ऐसा नहीं कर रहा है बल्कि पंजाब की जनता के लिए उन्होंने यह फ़ैसला लिया है। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और श्री आनंदपुर साहिब से सांसद मनीष तिवारी ने भी प्रकाश सिंह बादल के इस बयान के बाद उनके सुर में सुर मिलाया है। उन्होंने आज एक ट्वीट कर लिखा कि प्रकाश सिंह बादल के सुझाव में दम है। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार के इस फ़ैसले पर एकतरफ़ा विचारों से ऊपर उठकर एक साथ मिलकर लड़ाई लड़नी चाहिए

केन्द्र सरकार के फैसले को मिल सकती है चुनौती

केन्द्र सरकार के फैसले को मिल सकती है चुनौती

कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और श्री आनंदपुर साहिब से सांसद मनीष तिवारी ने अपनी ही पार्टी कांग्रेस की राज्य सरकार को तीन सुझाव दिए। उन्होंने कहा इस मुद्दे पर सभी लोकसभा सांसदों और राज्यसभा सदस्यों की सर्वदलीय बैठक बुलाई जाए और इस फैसले को अदालत में चुनौती दी जाए। ऐसा पहली बार हुआ है कि सार्वजनिक तौर पर शिरोमणि अकाली दल और कांग्रेस के नेता एक दूसरे के विचारों का समर्थन कर रहे हैं। हालांकि इस मामले में पूर्व मुख्मंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह इन नेताओं से ठीक विपरीत विचार रखते हैं। उनका कहना है कि बीएसएफ का दायरा बढ़ने से सीमा पार से आने वाले हथियारों और ड्रग्स की तस्किरी को रोकने के प्रयासों को मजबूती मिलेगी।

'राज्यों के अधिकारों का हो रहा हनन'

'राज्यों के अधिकारों का हो रहा हनन'

पंजाब की ज्यादातर पार्टियां केंद्र सरकार के इस फ़ैसले से राज्यों के अधिकारों में हनन के तौर पर देख रही हैं। आम आदमी पार्टी के नेता हरपाल सिंह चीमा, भगवंत मान या फिर पंजाब मामलों के सह प्रभारी राघव चड्ढा , सभी इसे संघीय ढांचे को कमजोर करने के रूप में प्रचारित कर रहे हैं। वहीं हरपाल चीमा ने कहा कि इस संवेदनशील मुद्दे पर मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी को तुरंत विधानसभा का विशेष सत्र बुलाना चाहिए। ग़ौरतलब है कि आम आदमी पार्टी केंद्र सरकार के इस कदम के लिए मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी को ज़िम्मेदार मान रही हैं। राघव चड्ढा ने कहा कि दिल्ली में अरविंद केजरी वाल की वजह से 2015 से लेकर आज तक दिल्ली में संघीय ढांचा मजबूत है।


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English summary
Can SAD and Congress be united in Punjab? This statement of Parkash Singh Badal may change political scenario
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