यूपी शिक्षा विभाग की बड़ी लापरवाही, निधन के बाद भी टीचर को देता रहा सैलरी और इंक्रीमेंट

पीलीभीत। अनामिका शुक्ला मामले अभी ठंडा भी नहीं पड़ा था कि उत्तर प्रदेश के पीलीभीत जिले में शिक्षा विभाग का एक ओर घोटाले का मामला सामने आय़ा है। शिक्षा विभाग के अंदर गड़बड़ घोटाले के इस मामले को सूनकर आप भी अचंभित रहे जाएंगे। दरअसल, 18 महीने पहले एक टीचर की मौत हो गई। इसके बावजूद भी शिक्षा विभाग टीचर को लगातार सैलरी देता रहा। इतना ही नहीं, विभाग ने इस दौरान मृतक टीचर का इन्क्रीमेंट भी लगा दिया। वहीं, अब मामले का खुलासा होने पर शिक्षा विभाग में हड़कंप मचा हुआ है।

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    क्या है पूरा मामला

    क्या है पूरा मामला

    मामला पीलीभीत जिले के बिलसंडा ब्लॉक स्थित प्राइमरी स्कूल का है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, अरविंद कुमार ने प्राइमरी स्कूल में 5 नवंबर, 2015 को टीचर के रूप में ड्यूटी ज्वाइन की थी और 22 मई, 2016 को उनका निधन हो गया था। टीचर की मौत के बाद भी शिक्षा विभाग नवंबर 2018 तक वेतन पहले की तरह देता रहा। इतना ही नहीं, खंड शिक्षा अधिकारी ने इस दौरान टीचर अरविंद कुमार का इंक्रीमेंट भी लगा दिया। मामला तब सामने आया जब मृतक टीचर अरविंद की पत्नी वंदना अपनी नियुक्ति के लिए बेसिक शिक्षा अधिकारी देवेंद्र स्वरूप के पास गई।

    बैंक खाते में भेजी जा रही था सैलरी

    बैंक खाते में भेजी जा रही था सैलरी

    इस पर जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी देवेंद्र स्वरूप ने मृतक की आश्रित पत्नी वंदना की नियुक्ति से पहले खंड शिक्षा अधिकारी से मृतक अरविंद की सैलरी को लेकर जानकारी मांगी। बीएसए देवेंद्र स्वरूप ने बताया कि अनियमितता तब सामने आई, जब लेखा अनुभाग की ओर से अरविंद कुमार की समीक्षा की जा रही थी। कुमार ने 5 नवंबर, 2015 को शिक्षक के रूप में ड्यूटी ज्वाइन की थी और 22 मई, 2016 को उनका निधन हो गया। लेकिन लेखा अनुभाग ने उनके मासिक वेतन को नवंबर 2017 तक उनके बैंक खाते में भेजना जारी रखा।

    पूरे मामले की कि जाएगी जांच

    पूरे मामले की कि जाएगी जांच

    इस बारे में संपर्क करने पर पीलीभीत के बेसिक शिक्षा समन्वयक राकेश पटेल ने कहा कि वेतन पत्रक स्कूल के हेडमास्टर की ओर से निर्धारित प्रारूप में तैयार किया गया है। फिर इसे खंड शिक्षा अधिकारी को प्रस्तुत किया जाता है। इसके बाद अधिकारी किसी भी वृद्धि या कटौती के बारे में अपने नोट्स के साथ खाता अनुभाग को भेजता है। खाता अनुभाग बिल को बढ़ाता है और अंत में संबंधित कर्मचारी सदस्य के बैंक खाते में वेतन भेजा जाता है। वहीं, अब बीएसए देवेंद्र स्वरूप ने कहा कि इस पूरे मामले में स्कूल के प्रधानाध्यापक की भूमिका, खंड शिक्षा अधिकारी और लेखा अनुभाग के कर्मचारियों की जांच की जाएगी।

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