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क्या शहाबुद्दीन मामले में नुकसान की भरपाई के लिए अब मोर्चा संभालेंगे लालू यादव ?

पटना, 7 मई: दिवगंत बाहुबली नेता शहाबुद्दीन की कथित उपेक्षा का मामला अब राजद के लिए गंभीर संकट बनता जा रहा है। तेजस्वी के बाद अब अब्दुल बारी सिद्दीकी ने इस मामले में पार्टी की तरफ से सफाई दी है। शहाबुद्दीन समर्थकों की नाराजगी कहीं मुसलमानों की नाराजगी न बन जाए, इस फिक्र ने लालू परिवार को परेशान कर दिया है। कहा जा रहा है कि डैमेज कंट्रोल के लिए बीमार लालू यादव को मोर्चा संभालना पड़ रहा है। दो दिन बाद उनकी वर्चुअल मीटिंग होने वाली है।

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भागलपुर दंगे के बाद बिहार के मुसलमानों ने कांग्रेस का साथ छोड़ दिया था। एक साल बाद जब लालू यादव मुख्यमंत्री बने तो मुस्लिम वोटरों ने अपने लिए एक नया नेता गढ़ लिया। लेकिन 31 साल बाद शहाबुद्दीन की मौत ने राजद के इस मजबूत आधार को हिला दिया है। लालू परिवार पर मतलबपरस्ती का आरोप लगा रहा है। जब जरूरत थी तब शहाबुद्दीन का इस्तेमाल किया। जब शहाबुद्दीन को मदद की दरकार थी तब नजर फेर ली।

“शहाबुद्दीन के लिए मैंने नीतीश कुमार से भी बात की”

“शहाबुद्दीन के लिए मैंने नीतीश कुमार से भी बात की”

अब्दुल बारी सिद्दीकी ने फेसबुक पोस्ट के जरिये तफ्सील से अपनी बात रखी है। उन्होंने लिखा है, 'मेरे शहाबुद्दीन से पारिवारिक रिश्ते थे। वे बीमार पड़े तो मैं लगातार उनके परिवार के सम्पर्क में थे। उनके परिजनों ने जिनसे-जिनसे बात करने को कहा, मैंने की। इस संबंध में मैंने बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार, लालू जी, सांसद मीसा भारती, दीनदयाल अस्पताल के डॉक्टर और सुपरिन्टेंडेंट, सबसे सम्पर्क किया। खुद हिना शहब मैडम ने मुझे बताया था कि सांसद मीसा भारती और मनोज झा शहाबुद्दीन साहब को हायर इंस्टीट्यूट में भेजने की कोशिश कर रहे हैं। लेकिन इसमें कुछ कठिनाइयां सामने आ रही हैं। हिना शहाब ने मुझे नीतीश कुमार से बात करने के लिए कहा ताकि शहाबुद्दीन साहब को किसी बड़े अस्पताल में शिफ्ट किया जा सके। इसे बाद मैंने फौरन बिहार के मुख्यमंत्री से बात की।" अब्दुल बारी सिद्दीके ने ये सब लिख कर यह जताना चाहा है कि राजद ने शहाबुद्दीन के लिए जो भी मुमकिन था, वो किया। उन्होंने शहाबुद्दीन की मौत की न्यायिक जांच की मांग का भी समर्थन किया है।

“नजदीक था लालू परिवार लेकिन नहीं मिला”

“नजदीक था लालू परिवार लेकिन नहीं मिला”

दूसरी तरफ शहाबुद्दीन समर्थकों ने खुल्लमखुल्ला लालू परिवार पर अनदेखी का आरोप लगाया है। आरोप है कि दिल्ली में पांच किलोमीटर के दायरे में रहने के बाद भी लालू परिवार का कोई सदस्य बीमार शहबुद्दीन से मिलने अस्पताल नहीं गया। उनकी मौत के बाद भी लालू परिवार का कोई व्यक्ति देखने नहीं आया। पत्रकार रोहित सरदाना की भी मौत कोरोना से हुई थी। लेकिन उन्हें दिल्ली से हरियाणा लाया गया था। तब फिर शहाबुद्दीन के पार्थिव शरीर को दिल्ली से सीवान क्यों नहीं लाया गया ? शहाबुद्दीन की पत्नी हिना शहाब इस बात से इतनी खफा हैं कि उन्होंने सीवान के राजद विधायक अवध बिहारी चौधरी से मिलना भी गवारा न समझा। बिना मिले ही विधायक को लौटना पड़ा। अगर शहाबुद्दीन के परिवार ने इस मामले में लालू यादव से दूरी बना ली तो बिहार की राजनीति में बहुत बड़ा उलटफेर हो सकता है। 16 फीसदी वोट अगर राजद से छिटक गया तो उसकी राजनीति का बंटाधार हो जाएगा।

बीमार लालू यादव को संभालना पड़ा मोर्चा

बीमार लालू यादव को संभालना पड़ा मोर्चा

लालू यादव साढ़े तीन साल जमानत पर जेल से रिहा हुए हैं। लंबे समय से बीमार हैं। सांसद मीसा भारती के घर आने से पहले वे एम्स में इलाजरत थे। लालू यादव अपनी गंभीर बीमारियों के आधार पर कोर्ट से बेल की दरख्वास्त करते रहे हैं। डॉक्टरों ने उन्हें आराम की सलाह दी है। लेकिन 9 मई को वे एक वरर्चुअल मीटिंग करने वाले हैं जिसमें पार्टी के विधायक, विधान पार्षद और चुनाव में प्रत्याशी रहे नेता शामिल होंगे। पार्टी पर जो नया संकट आता दिख रहा है उसका समाधान सिर्फ लालू यादव ही कर सकते हैं। शहाबुद्दीन समर्थकों की नाराजगी भी वही दूर कर सकते हैं। लालू यादव अपने लोगों को भरोसा दिला सकते हैं उनकी गैरमौजूदगी में जो हुआ सो हुआ। अब वे आ गये हैं, इसलिए किसी को चिंता करने की जरूरत नहीं। लालू यादव बीमार भले हैं लेकिन उनकी आवाज राजद में जोश फूंक सकती है। लेकिन इस बीच चर्चा चल पड़ी है कि सीबीआइ लालू यादव की इस राजनीतिक सक्रियता का कोर्ट में विरोध कर सकती है। सीबीआइ कोर्ट से कह सकती है लालू यादव बीमार नहीं हैं। अगर वे बीमार हैं तो फिर राजनीतिक कार्यक्रम कैसे कर रहे हैं ? अब देखना है कि शहाबुद्दीन की मौत का मामल राजद को किस मुकाम पर ला खड़ा करता है।

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