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जानिए आखिर क्‍यों पेशावर बनता जा रहा है पाक के लिए नासूर

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पेशावर। दिसंबर 2014 को पेशावर के आर्मी स्‍कूल पर हुए आतंकी हमले को अभी एक वर्ष से कुछ ज्यादा का समय ही हुआ था कि एक बार फिर यहां की एक यूनिवर्सिटी आतंकी हमले से दहल गई है। पेशावर के पास चारसदा स्थित बाचा

खान यूनिवर्सिटी पर तहरीक-ए-तालिबान, टीटीपी के आतंकियों ने हमला कर दिया है। वर्ष 2014 के बाद पाक में हुए इसे अब तक के सबसे बड़े आतंकी हमलो में माना जा रहा है।

पेशावर पाकिस्‍तान की सरकार और यहां की सेना के लिए एक तरह का नासूर बनता जा रहा है। यह न सिर्फ आतंकियों के सुरक्षित अड्डे में तब्‍दील हो रहा है बल्कि पाक और दुनिया के लिए एक बड़ा खतरा भी बनता जा रहा है। बाचा खान

यूनिवर्सिटी पर हुए हमले से पहले मंगलवार को यहीं पर स्थित एक चेक पोस्‍ट पर सुसाइड अटैक हुआ था। इसके ठीक 24 घंटों बाद ही एक बड़ी आतंकी साजिश को अंजाम दिया गया।

साउथ एशिया टेररिज्‍म पोर्टल (सात्‍प) की ओर से दी गई जानकारी के मुताबिक पेशावर में वर्ष 2015 के पहले पांच माह में 94 आतंकी हमले हुए थे।

यह आंकड़ें इस बात की गवाही देते हैं कि सेना के लिए पेशावर की जितनी अहमियत है उससे कहीं ज्‍यादा अब आतंकियों के लिए इसकी अहमियत बढ़ गई है।

एक नजर डालिए कि आखिर क्‍यों पेशावर आतंकियों के लिए जन्‍नत और दुनिया के लिए बड़े खतरे में तब्‍दील हो गया है।

अफगानिस्‍तान के करीब

अफगानिस्‍तान के करीब

पेशावर, पाकिस्‍तान का पांचवां सबसे ज्‍यादा आबादी वाला शहर है। साथ ही यह शहर अफगानिस्‍तान से सटा हुआ है। यहां पर आने के बाद आतंकी पाकिस्‍तान की कई बड़े शहरों में आसानी से दाखिल हो सकते हैं।

खतरनाक इलाका

खतरनाक इलाका

पेशावर, नॉर्थ वजिरिस्‍तान यानी वह इलाका जहां पर पाक सेना का आतंकियों के खिलाफ जर्ब-ए-अज्‍ब ऑपरेशन चल रहा है, उसके भी एकदम करीब है।

4,600 आतंकी गिरफ्तार

4,600 आतंकी गिरफ्तार

सात्‍प के मुताबिक वर्ष 2015 में 94 आतंकियों हमलों के सिलसिले में यहां पर करीब 4,600 स‍ंदिग्‍ध आतंकियों को गिरफ्तार किया गया था। वहीं 138 सर्च ऑपरेशंस चलाए गए थे। 2015 मार्च में यहां पर एक राजनीतिक पार्टी के नेता को बीच शहर में आतंकियों ने सुसाइड ब्‍लास्‍ट का शिकार बना डाला था।

2004 में टीटीपी को मिली ताकत

2004 में टीटीपी को मिली ताकत

खैबर पख्‍तूनवा में सितंबर 2001 के बाद से बड़े बदलाव आए। इन बदलावों की वजह से पाकिस्‍तान स्थित तालिबान को काफी ताकत मिली और इसने वर्ष 2004 से खुद को यहां पर स्‍थापित करने की कोशिशें तेज कर दी थीं।

जर्ब-ए-अज्‍ब का मुख्य लक्ष्‍य टीटीपी

जर्ब-ए-अज्‍ब का मुख्य लक्ष्‍य टीटीपी

पाक सेना की ओर से आतंकियों के खिलाफ जो जर्ब-ए-अज्‍ब आपरेशन चलाया जा रहा है, उसका मुख्‍य लक्ष्‍य टीटीपी और इसके आतंकी हैं। 2014 के आतंकी हमले के पीछे टीटीपी ने जर्ब-ए-अज्‍ब का बदला लेना वजह बताया था।

2014 से परेशान टीटीपी

2014 से परेशान टीटीपी

खैबर पख्‍तूनवा टीटीपी और अफगानिस्‍तान के तालिबान का गढ़ है। आतंकियों के खिलाफ पाक सेना ने जर्ब-ए-अज्‍ब ऑपरेशन चलाया था। इस ऑपरेशन की वजह से आतंकियों में घबराहट और डर का माहौल बन गया। पाक सेना और सरकार को कमजोर पड़ते आतंकियों की ओर से बड़ी चुनौती देने के लिए ही इस तरह के हमलों को अंजाम दिया जाने लगा है।

टीटीपी से है सहानुभूति

टीटीपी से है सहानुभूति

पाकिस्‍तान तहरीक-ए-इंसाफ के मुखिया और पूर्व क्रिकेटर इमरान खान हमेशा से ही टीटीपी के साथ बातचीत के समर्थक रहे हैं। उन्‍हें पाक में कुछ लोग टीटीपी का समर्थक तक करार देते हैं। उनकी सहानुभूति की वजह से पेशावर के लोगों के साथ आंतकियों को मेलजोल बढ़ाने में कोई परेशानी नहीं होती है।

आतंकियों के आगे लाचार

आतंकियों के आगे लाचार

एक्‍सप्रेस ट्रिब्‍यून की एक खबर के मुताबिक पाकिस्‍तान का पुलिस सिस्‍टम इतना कमजोर है कि वह आतंकियों के खिलाफ ठीक से कार्रवाई तक नहीं कर सकता है। पुलिस के पास न तो इंफ्रास्‍ट्रक्‍चर है और न ही ऐसे लोग जो आतंकियों को काबू में कर सकें।

दूसरे संगठनों से मिले आतंकी

दूसरे संगठनों से मिले आतंकी

नवंबर 2013 में ड्रोन स्‍ट्राइक की वजह से टीटीपी के नेता हकीमुल्‍ला मसूद की मौत हो गई। इसके बाद आतंकियों में फूट पड़ गई और कुछ आतंकी पास ही मौजूद अफगानिस्‍तान में मौजूद अलकायदा के साथ मिल गए हैं। विशेषज्ञों की मानें तो पेशावर में अब नागरिकों और सेना को निशाना बनाना अहम की लड़ाई की तरह हो गया है।

आम लोगों के बीच मौजूद आतंकी

आम लोगों के बीच मौजूद आतंकी

पेशावर की जनसंख्‍या काफी है और यहां के लोगों पर काफी हद तक अफगानिस्‍तान का असर नजर आता है। ऐसे में अगर आतंकी स्‍थानीय लोगों के साथ मिल जाएं तो भी पुलिस कुछ नहीं कर सकती है। भीड़ में आतंकियों के घूमने पर किसी को उनका पता नहीं चल सकता और उनके खिलाफ कार्रवाई मुश्किल हो जाती है।

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English summary
After 2014's big terror attack on an Army school again terrorists have targeted Peshawar's prominent university. Peshawar is situated on the border of Afghanistan, which is a hub of Taliban terrorists.
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