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ये 4 अशुभ संकेत बताते हैं, दिवाली के बाद बुझ सकता है इमरान खान की सत्ता का दीया

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इस्लामाबाद। पाकिस्‍तान के प्रधानमंत्री इमरान खान आर्थिक संकट से कैसे निबटा जाए, इसी माथापच्‍ची में उलझे थे कि पांच अगस्‍त को भारत सरकार ने पूर्व क्रिकेटर रहे इमरान के आगे ऐसी गुगली डाल दी जिसके बाद वह बुरी तरह से उलझ गए हैं। जम्‍मू कश्‍मीर से आर्टिकल 370 हट चुका है और इस राज्‍य को मिला विशेष दर्जा भी खत्‍म हो चुका है। इमरान को अब समझ नहीं आ रहा है कि ऐसा कौन सा शॉट खेला जाए जिससे उनकी वह कुर्सी बची रह सके जो 25 सालों की कड़ी मेहनत के बाद हासिल हुई है।सारी बाजी पलट चुकी है और इंटरनेशनल मॉनटरी फंड (आईएमएफ) से बेलआउट पैकेज की मांग करने वाले इमरान अब इंटरनेशनल कम्‍यूनिटी के आगे कश्‍मीर का रोना रो रहे हैं। पाकिस्‍तान की राजनीति पर करीब से नजर रखने वाले विशेषज्ञों की मानें तो इस बात में कोई शक नहीं है कि तख्‍तापलट की संभावनाएं बढ़ गई हैं। अक्‍टूबर या उसके बाद पाकिस्‍तान में बड़े राजनीति उलटफेर की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता है।

UNGA सत्र सबसे अहम

UNGA सत्र सबसे अहम

सितंबर के अंत में अमेरिका के न्‍यूयॉर्क में यूएन हेडक्‍वार्टर पर यूनाइटेड नेशंस जनरल एसेंबली (उंगा) का सत्र होना है। पहली बार इमरान इस सत्र को संबोधित करेंगे। इमरान पहले ही कह चुके हैं कि वह कश्‍मीर के मुद्दे को हर अंतरराष्‍ट्रीय मंच पर लेकर जाएंगे और उंगा से बड़ा मंच उन्‍हें नहीं मिल सकता, जहां पर वह अपनी बात रख पाएं। बड़ी मुश्किल से एक लोकतांत्रिक देश की छवि पाकिस्‍तान ने साल 2008 से बनाकर रखी है और उंगा से पहले तख्‍तापलट का दुनिया को एक अलग संदेश दे सकता है। पाकिस्‍तान पहले ही आर्थिक मोर्चे पर जूझ रहा है, अगर अभी तख्‍तापलट हुआ तो जो थोड़ी-बहुत मदद उसे इस्‍लामिक देशों से मिल रही, वह भी रुक सकती है। इसके अलावा इस स्थिति में दुनिया का कोई भी देश उसकी बात नहीं सुनने को राजी नहीं होगा। इसलिए सितंबर में उंगा सत्र तक, सेना सब्र रखे हुए है।

 FATF की अहम मीटिंग

FATF की अहम मीटिंग

अक्‍टूबर माह में फ्रांस की राजधानी पेरिस में फाइनेंशियल एक्‍शन टास्‍क फोर्स (एफएटीएफ) की एक अहम मीटिंग होने वाली है। माना जा रहा है कि इस मीटिंग में आतंकवाद पर लचर रवैये की वजह से पाक को ब्‍लैकलिस्‍ट करने के चांसेज काफी बढ़ गए हैं। इमरान खान भी इसी डर से एफएटीएफ के नेताओं से मुलाकात करने में लगे हैं। पिछले दिनों एफएटीएफ का एशिया पैसेफिक ज्‍वॉइन्‍ट ग्रुप (एपीजेजी) की तरफ से पहले ही पाक को ब्‍लॉक किया जा चुकरा है। मनी लॉन्ड्रिंग और आतंकी संगठनों को मिल रही वित्‍तीय मदद को रोकने पर फेल हो चुके पाक से एफएटीएफ खासी निराश है। एफएटीएफ का मानना है कि पाक ने इस दिशा में कोई खास प्रगति नहीं की है। जून 2018 में पाक एफएटीएफ की ब्‍लैक लिस्‍ट में आया था और वर्तमान स्थिति यह है कि 27 प्‍वाइंट एक्‍शन प्‍लान को पूरा करने में यह देश बुरी तरह से नाकाम रहा है। पाक की सेना इस समय कहीं न कहीं एफएटीएफ की मीटिंग पर नजरें लगाए हुए है। इस मीटिंग में ब्‍लैक लिस्‍ट होना, कश्‍मीर के बाद इमरान के लिए दूसरी बड़ी असफलता होगी। मदद के सारे दरवाजे पाक के लिए बंद हो चुके होंगे और मुश्किलें चार गुना तक बढ़ जाएंगी।

कश्‍मीर पर फेल इमरान

कश्‍मीर पर फेल इमरान

इमरान खान कश्‍मीर पर बुरी तरह से असफल साबित हो रहे हैं। न सिर्फ उनके विरोधी बल्कि उनके पार्टी के ही लोग अब इस बात को जोर-शोर से कहने लगे हैं। पाकिस्‍तान के गृह मंत्री एजाज अहमद शाह ने पिछले दिनों कहा है कि दुनिया कश्‍मीर मामले में अब पाकिस्‍तान पर नहीं बल्कि भारत पर ज्‍यादा भरोसा करने लगी है। राजनीतिक पार्टियों से अलग पाक मिलिट्री के अंदर भी इस बात को लेकर सुगबुगाहट होने लगी है कि भारत ने कश्‍मीर पर एतिहासिक फैसला लेकर इस मसले को ही पाक से छीन लिया है। अब पाक के पास कोई भी मसला नहीं बचा है जिसे लेकर अंतरराष्‍ट्रीय समुदाय के पास जाया जा सकता है। इमरान जो यह कहते थे कि बातचीत से कश्‍मीर का मसला होगा, अब इस मामले में पस्‍त पड़ चुके हैं। बात क्‍या हो और कैसे हो, इस बात का उन्‍हें कोई इल्‍म ही नहीं है। सेना, इमरान से खुश नहीं है और पिछले दिनों आर्मी चीफ जनरल कमर जावेद बाजवा का कार्यकाल का बढ़ाया जाना इस बात का भी एक संकेत है। इमरान के नेतृत्‍व में पाक आर्मी को एक प्रोफेशनल आर्मी के तौर पर साबित करने की कई कोशिशें हुईं हैं लेकिन बाजवा पर फैसले ने इस कोशिश पर लगाम लगा दी है।

जनता इमरान से त्रस्‍त

जनता इमरान से त्रस्‍त

साल 2018 में जब पाकिस्‍तान में आम चुनाव हुए थे तो इमरान इस वादे के साथ सत्‍ता में आए थे कि वह देश को आर्थिक संकट से बाहर निकाल लेंगे। वादा पूरा करना तो दूर इमरान के शासन ने जनता की परेशानियों को और बढ़ा दिया है। जम्‍मू कश्‍मीर को हर अंतरराष्‍ट्रीय मंच पर मुद्दा बनाने की बात कहने वाले पाकिस्‍तान के प्रधानमंत्री इमरान खान अपने देश की हकीकत पर आंख मूंदकर बैठे हुए हैं। आर्थिक संकट का सामना कर रहे पाकिस्‍तान में आज हालात यह हैं कि यहां पर दूध की कीमतें पेट्रोल और डीजल से भी ज्‍यादा हो गई हैं। यूं तो पिछले डेढ़ साल से आर्थिक संकट की तरफ बढ़ रहा था लेकिन पिछले एक वर्ष में हालात बद से बदतर हो गए हैं। वर्ष 2018-2019 में पाक के वित्‍तीय घाटे ने पिछले तीन दशकों का रिकॉर्ड तोड़ दिया है। इस वर्ष जून में खत्‍म हुए वित्‍तीय वर्ष में पाक का घाटा बढ़कर 8.9 प्रतिशत पर पहुंच गया है। पाकिस्‍तान के अखबार डॉन की ओर से बताया गया है पिछले वर्ष यह घाटा 6.6 प्रतिशत पर था। पाकिस्‍तान में एक नान की कीमत अलग-अलग शहरों 12 से 15 रुपए के बीच तो एक रोट की कीमत 10 से 12 रुपए के बीच है। पाकिस्‍तान पर लगातार कर्ज अदायगी का संकट भी बढ़ता जा रहा है।

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English summary
4 reasons why military coup can be a reality in Pakistan after October.
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