पत्नी की मौत के बाद पति पर लगा दहेज उत्पीड़न का आरोप, 9 साल बाद कोर्ट ने बताया निर्दोष

Dowry Noida: दहेज उत्पीड़न के चलते कई महिलाओं का जीवन खत्म हो जाता है, लेकिन इससे उलट कई बार ऐसा भी होता है कि दहेज उत्पीड़न के फर्जी मामलों की वजह से पुरुषों का जीवन भी नर्क हो जाता है। 2013 में रोहित पाठक की पत्नी की मृत्यु हो गई थी, लेकिन महिला के भाई ने आरोप लगाया था कि दहेज की मांग के चलते उसकी बहन ने आत्महत्या कर ली थी। जिसके बाद आरोपी पति को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया था। वहीं रोहित पाठक का कहना है कि मैं निर्दोष हूं और यह साबित होने में 9 साल लग गए।

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9 साल बाद बरी हुए रोहित
सोमवार को जिला एवं सेशन कोर्ट ने रोहित को इस मामले में बरी कर दिया है। अहम बात है कि रोहित अब 36 साल के हैं, उन्हें कोर्ट ने बरी करते हुए कहा कि अमृता पाठक की मृत्यु के सभी आरोपों से बरी किया जाता है। कोर्ट ने कहा कि यह मौत एक हादसा थी। जज अवनीश सक्सेना ने अमृता के बयान का हवाला देते हुए रोहित को बरी किया है। अमृता ने मौत से पहले डॉक्टर के सामने बयान दिया था, उसने अपने बयान में आग लगने की बात कही थी, जिसे आधार बनाते हुए कोर्ट ने कहा कि आत्महत्या को उकसाने का कोई पुख्ता सबूत नहीं है, लिहाजा रोहित को बरी किया जाता है।

कोर्ट ने माना हादसा
कोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि सबूत इस बात को दर्शाते हैं कि यह मृत्यु हादसे की वजह से हुई है, पीड़िता ने आत्महत्या नहीं की थी। लिहाजा रोहित को इस मामले में बरी किया जाता है, उन्हें आत्महत्या के लिए उकसाने के आरोप से बरी किया जाता है। रोहित अभी जमानत पर हैं और उन्हें सरेंडर करने की जरूरत नहीं है। बता दें कि रोहित और अमृता शादी के बाद 5 साल तक साथ रहे थे, उनके एक बच्चा भी था। जब अमृता की मौत हुई उस वक्त बच्चे की उम्र 5 साल की थी। अमृता की मृत्यु नोएडा के सेक्टर 66 स्थित ममूरा गांव में स्थित घर में हुई थी।

पति खुद लेकर पहुंचे थे अस्पताल
1 अक्टूबर 2013 को रोहित के वकील ने कोर्ट में कहा कि जब यह हादसा हुआ तो रोहित नोएडा स्थित अपने ऑफिस में थे, तभी घर में आग लग गई थी। वह तुरंत घर पहुंचे और अमृता को लेकर जगदंबा अस्पताल पहुंचे। यहां से अमृता को सफदरगंज अस्पताल में ट्रांसफर कर दिया। सफरदरगंज अस्पताल में 85 फीसदी जलने की वजह से अमृता की मौत हो गई थी। मौत की वजह आग लगने से जलने को बताया गया था।

3 लाख के लिए उकसाने का आरोप
इस घटना के तीन दिन बाद अमृता के भाई मनोज और जय प्रकाश दूबे ने रोहित के खिलाफ नोएडा के सेक्टर 58 पुलिस स्टेशन में दहेज के लिए आत्महत्या के लिए उकसाने का केस दर्ज कराया। उन लोगों ने आरोप लगाया कि 3 लाख रुपए कैश, ज्वेलरी के लिए हमारी बहन को जबरन आत्महत्या के लिए उकसाया गया। पुलिस ने रोहित के खिलाफ आईपीसी की धारा 306 के तहत केस दर्ज कर लिया।

भाइयों पर 14 लाख मांगने का आरोप
जब मामला कोर्ट पहुंचा तो रोहित ने खुद को बेकसूर बताया। उन्होंने कहा कि अमृता के भाई ने मुझसे 14 लाख रुपए मांगे हैं ताकि केस को रफा दफा किया जा सके। सुनवाई के दौरान कई गवाहों ने उस दिन क्या हुआ इसके बारे में विस्तार से बताया। डॉक्टर शालू जिन्होंने अमृता का इलाज किया था, उनका बयान काफी अहम था। डॉक्टर ने कोर्ट में कहा कि अमृता ने उन्हें बताया था कि वह आग लगने की वजह से जल गई थीं, यह हादसा खाना बनाते समय हुआ था, शायद गैस लीक कर रही थी, इस वजह से घर में आग लग गई।

क्या कहना है था चश्मदीद का
जिस घर में रोहित और अमृता रहते थे वहां के केयरटेकर रामनाथ प्रसाद ने कोर्ट में बताया कि आग लगने के तुरंत बाद सबसे पहले वह ही पहुंचे थे। उन्होंने कहा कि मैंने सुना अमृता कह रही थी कि उसके पति को फोन करो। मैंने रोहित को बताया, जिसके बाद वह सुबह 11 बजे अस्पताल लेकर पहुंचे। कोर्ट ने अपने आदेश में कहा यह मौत गैस लीक होने की वजह से हुए हादसे की वजह से हुई है, जिसके गलत तरह से आत्महत्या का रूप देने की कोशिश की गई। कोर्ट के फैसले के बाद रोहित ने कहा कि मुझे न्यायपालिका पर भरोसा था, आज नहीं तो कल मुझे न्याय मिलेगा, यह मैं जानता था। आखिरकार न्याय मिला। वहीं बचाव दूसरे पक्ष के वकील ने कहा कि पैसा मांगने का आरोप निराधार है, लेकिन उन्होंने माना कि डॉक्टर के बयान से हमारा केस हल्का पड़ गया।

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