'आप' के कारण कांग्रेस-बीजेपी के लिए दिल्ली दूर

समय-हब पल्स सर्वे के मुताबिक दिल्ली विधानसभा के त्रिशंकु होने के आसार हैं और सरकार बनाने-बिगाड़ने में 'आप' की भूमिका अहम होने वाली है। माना ये ही जा रहा है कि चुनाव में मुख्य मुकाबला भारतीय जनता पार्टी और कांग्रेस के बीच ही है लेकिन दिल्ली विधानसभा की कई सीटों पर आप की दमदार मौजूदगी के कारण दोनों पार्टियों का खेल बिगड़ सकता है। ताजा सर्वे के मुताबिक भाजपा और कांग्रेस में बीच की टक्कर में 'आप' ने आकर नए राजनीतिक समीकरणों की ओर इशारा कर दिया है। सर्वे में भाजपा को 32 सीटें और कांग्रेस को 31 सीटें मिलती दिखाई दे रही हैं, जबकि अरविंद केजरीवाल की पार्टी 'आप' को सिर्फ 6 सीटें ही मिलती दिख रही है। तीसरी बार दिल्ली की मुख्यमंत्री बनने का ख्वाब देखने वाली शीला दीक्षित की कांग्रेस पार्टी को इस बार एंटी इनकंबेंशी के कारण सीटों का नुकसान होता दिख रहा तो वहीं भाजपा को सीटों का इजाफा हो रहा है।
2008 के चुनाव में कांग्रेस को 43 सीटें और बाजपा को 23 सीटें मिली थी। इसबार कांग्रेस को 12 सीटों का नकुसान होता दिखाई दे रहा है, जबकि भाजपा को 9 सीटों का फायदा। सर्वे के आंकड़ों के मुताबिक भाजपा दिल्ली की 38 फीसदी जनता वोट देने का मन बना रही है, जबकि कांग्रेस को 37 प्रतिशत लोग वोट देने की सोच रहे हैं। वहीं दिल्ली चुनाव में जोरो-शोरों से चुनाव प्रचार कर रही आम आदमी पार्टी को सिर्फ 19 प्रतिशत लोग अपना वोट देना चाहते है।
वहीं अगर दिल्ली के सीएम पद की बात करे तो शीला दीक्षित इस रेस में सबसे आगे चल रही है। 26 प्रतिशत लोग उन्हें एकबार फिर से दिल्ली के मुख्यमंत्री पद के तौर पर बैठना चाहते है, जबकि भाजपा के विजय गोयल सीएम के तौर पर 22 प्रतिशत लोगों की पसंद हैं। जबकि अरविंद केजरीवाल को 19 प्रतिशत लोग सीएम बनते देखना चाहते हैं वहीं भाजपा के ही डॉ हर्षवर्धन को 14 प्रतिशत लोग सीएम के तौर पर पसंद कर रहे हैं।












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