भ्रष्टाचार का हल 'निजीकरण' नहीं है: अरविंद केजरीवाल

केजरीवाल के अनुसार अगर गवर्नेंस अच्छी होगी तो निजी कंपनियां भी अच्छा काम करेंगी। हमारे यहां ऐसा सिस्टम होना चाहिए जिससे कि उद्योग लगाना और उसे चलाना आसान हो। निजीकरण उन्हीं क्षेत्रों में जरूरी है, जहां पर प्रतिस्पर्द्धा की जरूरत हो। उन्होने भ्रष्टाचार के बारे में कहा कि मैं जब आयकर विभाग में था तो कहा जाता था कि कर्मचारियों की तनख्वाह कम है, इसलिए वह रिश्वत लेते है। सच तो यह है कि सैलरी कभी कम नहीं होती है, बल्कि लालच के कारण इंसान रिश्वत लेता है। केजरीवाल ने कहा कि आज हमारे मंत्रियों को सैलरी के रूप में अधिक धन मिलता है, बंगला और नौकर चाकर मिलते हैं, पर ये लोग फिर भी रिश्वत लेते हैं। इसलिए उनके बारे में सोंचने की जरूरत है, जो कि कम धन के कारण अपने बच्चों को पढ़ा नहीं पाते हैं।
केजरीवाल ने दिल्ली में हो रहे जल और वायु प्रदूषण के बारे में कहा कि हमारे पास इसे खत्म करने का कोई 'आइडिया' नहीं है। जल प्रदूषण का कारण यमुना नदी का गंदा होना है, आज इसे साफ सुथरा बनाए जाने की जरूरत है। वहीं वायु प्रदूषण को खत्म करने के बारे में उन्होने लोगों से विचार मांगे।
केजरीवाल ने कहा कि हमारे यहां लोकतंत्र का मतलब पांच साल में एक बार वोट डालना है, इसके बाद अगर मंत्री विधायक से मिलने जाव तो वो लोग पीछे कुत्ते छोड़ देते हैं। हमारे यहां ताकत का विकेंद्रीकरण होना चाहिए। केजरीवाल ने बताया कि मैं जिस मोहल्ले में रहता हूं, वहां पर सड़क काफी ज्यादा खराब है अभी तक नहीं बनी। जब मैं मेयर से मिलता हूं तो वह कहते हैं कि मेरे पास पैसा नहीं है, ये लोग एक फुटपाथ को बार बार तोड़कर उसे बनाते रहते हैं, जब बिजली के खंभे का बल्ब बदलने की बात की जाती है तो पूरा खंभा बदलवा देते हैं। इन लोगों के पास पैसा तो हैं। इसलिए हम चाहते हैं कि अब किसी क्षेत्र के लिए धन मिले तो इसे जनता निर्धारित करे कि इसे कहां खर्च करना है? हम ऐसे सिस्टम का निर्माण करना चाहते हैं। हम उद्योगों के खिलाफ नहीं है बल्कि जो उद्योगपति देश को लूटना चाहते हैं उनके खिलाफ हैं।












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