वाह रे दिल्‍ली! यहां सरेराह छेड़ दी जाती हैं महिला पुलिस अधिकारी

नई दिल्ली। राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में हाल में घटी एक घटना में तीन युवकों को एक युवती के साथ छेड़छाड़ करना भारी पड़ा, जब उन्हें पता चला कि युवती पुलिस कांस्टेबल है। हाल ही में पश्चिमी दिल्ली के मायापुरी इलाके में रात 10 बजे के करीब काम से लौट रही एक युवती का तीन युवकों ने पीछा किया और अपमानजनक एवं भद्दी टिप्पणियां भी कीं। इतना ही नहीं युवकों ने उसका हाथ भी पकड़ने की कोशिश की।

Delhi is unsafe for a woman police officer

जब युवती ने विरोध किया और कहा कि वह पुलिस अधिकारी है, तो तीनों युवक सिर पर पैर रखकर भाग खड़े हुए। युवती ने घटना के बाद सबसे पहले अपने घर के पास वाले थाने में तीनों युवकों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कराई। बाद में कुछ लोगों के हस्तक्षेप के बाद युवती अपनी शिकायत वापस लेने के लिए तैयार हो गई थी और और मामला यहीं शांत हो जाता, लेकिन प्राथमिकी रद्द किए जाने की बात दिल्ली उच्च न्यायालय में जा पहुंची।

मामले की सुनवाई कर रहीं न्यायाधीश न्यायमूर्ति प्रतिभा रानी इस बात से हैरत में पड़ गईं कि न केवल आम युवतियां बल्कि एक महिला पुलिस अधिकारी भी दिल्ली में सुरक्षित नहीं है और यौन उत्पीड़न से बची नहीं है। न्यायमूर्ति प्रतिभा रानी ने महिलाओं का अपमान करने के लिए युवाओं की कड़ी निंदा करते हुए कहा कि यदि महिला पुलिस अधिकारी सड़क पर अकेले नहीं चल सकती, तो आम युवतियों का क्या होगा?

हाल ही में दिल्ली पुलिस द्वारा उच्च न्यायालय को सौंपी गई रपट के अनुसार, राजधानी में महिलाओं के खिलाफ अपराधों में 16 फीसदी तक वृद्धि हुई है। दो साल पहले 16 दिसंबर को राजधानी में घटित सामूहिक दुष्कर्म मामले के प्रति उभरे जनाक्रोश के बावजूद इस साल महिलाओं के खिलाफ आपराधिक मामलों में 35 प्रतिशत रिकॉर्ड वृद्धि दर्ज की गई है, जिनमें 1,794 मामले दुष्कर्म के हैं।

न्यायमूर्ति प्रतिभा रानी ने प्राथमिकी रद्द करने से इनकार कर दिया। मामले की सुनवाई के दौरान उन्होंने एक आरोपी से प्राथमिकी को सस्वर पढ़ने के लिए कहा। ऐसा करने से आरोपी के हिचकिचाने पर न्यायाधीश ने आरोपी को फटकार लगाते हुए कहा, "आपको एक युवती के साथ छेड़छाड़ करते हुए शर्म नहीं आई और अब प्राथमिकी को पढ़ने में शर्म आ रही है?" उच्च न्यायालय ने तीनों आरोपियों को आसानी से न छोड़ने का स्पष्ट संकेत देते हुए उन्हें अपने अभिभावकों के साथ एक दिसंबर को मामले की अगली सुनवाई में पेश होने का हुक्म दिया।

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