मोदी के आने से दिल्ली की सरकारी कैंटीनों का गुजरातीकरण
नई दिल्ली (विवेक शुक्ला)। राजधानी के सरकारी दफ्तरों की कैंटीनों में अब गुजरात का रंग चढ़ने लगा है। अब इनमें ढोकला,फाफड़ा-खखरा जैसे खाटी गुजराती डिशेज मिलने लगेंगी। अभी तक दिल्ली के सरकारी दफ्तरों की कैंटीनों में राजमा चावल, छोले कुल्चे, दाल,सब्जी और नान-वेजिटेरियन डिशेज ही मिलते थे।

केन्द्र सरकार के डिपार्टमेंट आफ पर्सनेल एंड ट्रेनिंग (डीओपीटी) ने सभी केन्द्र सरकार के मंत्रालयों और विभागों की कैंटीनों को निर्देश दिए हैं कि वे गुजराती डिशेज भी अपने कस्टमर्स को उपलब्ध करवाएं। माना जा रहा है कि इन सभी कैंटीन प्रबंधकों से अगले महीने की 7 तारीखे से गुजराती डिशेज उपलब्ध करवाने के लिए कहा गया है।
श्रीखंड से छाछ
डीओपीटी के निर्देश में पाव भाजी, मराठी मिष्ठान श्रीखंड, नीम्बू पानी,छाछ और लस्सी भी रखने के लिए कहा गया गया है। एक सरकारी अफसर ने कहा कि सरकार की चाहत है कि सरकारी कैंटीनों में शुद्ध और साफ-सुथरा शाकाहारी भोजन लोगों को मिल सके। अभी तक इन कैंटीनों में साफ-सुथरा तो भोजन नहीं मिलता। इसके अलावा भोजन में नयापन भी नहीं होता।
भूल जाइये ब्रेड आमलेट
ये भी सुनने में आ रहा है कि कैंटीनों में अब ब्रेड आमलेट तथा उबले हुए अंडे भी नहीं मिलेंगे। हालांकि संसद भवन की कैंटीन में फिश, चिकन, बिरयानी के आइटम मिलते रहेंगे।
छाया ढोकला
जानकारों का कहना है कि ढोकला तो अब दिल्ली में खासा पसंद किया जाने वाला वंयजन है। इसे आम दूकानों से लेकर बाकी तमाम जगहों पर खरीदा जा सकता है। पर ये बात फाफड़ा तथा खखरा के लिए नहीं कही जा सकती। इनसे दिल्ली वाले अभी तक रू-ब-रू नहीं हुए हैं। पर गुजरात में तो इनहें बहुत पसंद किया जाता है।
डोसा-इडली का चलन
बहरहाल, ये बात तो साफ है कि दिल्ली में नरेन्द्र मोदी के प्रधानमंत्री पद को संभालने के बाद यहां का गुजरातीकरण शुरू हो गया। कहने वाले कह रहे हैं कि एक दौर में जब दिल्ली की ब्यूरोक्रेसी में दक्षिण भारत का प्रभाव खासा था तब दिल्ली में डोसा तथा इडली वगैरह का प्रचलन खासा हुआ।












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