अरुण जेटली पर चले सवालों बाण, जानिए किस-किस के दिये जवाब

Arun Jaitley on Twitter
नई दिल्‍ली। राज्‍यसभा में विपक्ष के नेता अरूण जेटली ने ट्विटर पर जनता से बातचीत की। इस दौरान उन पर सवालों की बौछार हो गई, यूं कहिये कि सवालों के बाण तेजी से चलने लगे। लेकिन जवाब उन्होंने कुछ चुनिंदा सवालों के ही दिये।

सबसे अहम सवाल था कि क्या भारतीय जनता पार्टी लोकसभा चुनाव में 272 से ज्यादा सीटें ला पायेगी। तो जेटली ने सवालों का जवाब देते हुए उम्‍मीद जताई की भाजपा 2014 के आम चुनाव में अपने दम पर 272 सीटों का आंकड़ा छू सकती है। उनका कहना है कि इस समय देश भर में यूपीए के खिलाफ माहौल है और जनता एक मजबूत नेतृत्‍व की तलाश कर रही है, ऐसे में पार्टी को बहुमत मिल सकता है। जेटली का मानना है कि 2014 के चुनाव अर्थव्‍यवस्‍था, ईमानदारी और राष्‍ट्रीय सुरक्षा के मुद्दे पर लड़े जाएंगे और जनता भाजपा पर विश्‍वास दिखाएगी।

कांग्रेस-आप गठबंधन पर जेटली

इसके अलावा जेटली ने दिल्‍ली में सरकार बनाने के लिए कांग्रेस के साथ किये गये गठबंधन की निंदा की और कहा कि 'आप' ने जिसका सबसे ज्‍यादा विरोध किया, जिसके घोटालों की जांच का वादा किया लेकिन अब वह उसी पार्टी के साथ मिलकर सरकार में हैं जो कि जनता के साथ एक धोखा है साथ ही उन्‍होने 'आप' को एरोगेंट राजनीति करने वाला बताया।

तेलंगाना मुद्दे पर सवाल के जवाब में अरुण का कहना है कि हम इस पर न्‍याय करने का प्रयास करेंगे साथ ही यह भी ध्‍यान रखेंगे कि सीमांध्र के साथ अन्‍याय न हो।

न्यायिक सुधार से जुड़े सवालों का जवाब देते हुए जेटली ने कहा कि भारत में बहुत अधिक संख्‍या में केस पेडिंग में हैं अत: जजों और न्‍यायालयों की संख्‍या बढ़ाये जाने की जरूरत है। उन्‍होने इस बात से भी इनकार किया कि भाजपा 2014 में सपा से समर्थन ले सकती है, उन्‍होने सपा से समर्थन के जवाब में कहा कि हमारी विचारधारा बिल्‍कुल अलग है। इसलिए हम सपा से कोई समर्थन नहीं लेंगे।

मोदी के असर पर जेटली

मोदी जल्‍द ही राष्‍ट्रीय परिदृश्‍य पर आ गये जिसके बाद उनका असर कम पड़ रहा है के बारे में अरूण का कहना है कि मोदी को 13 सितंबर को प्रधानमंत्री पद का उम्‍मीदवार घोषित किया गया। जिसके बाद वह पार्टी का प्रचार कर रहे हैं। हमारा कार्यक्रम मीडिया कवरेज पर आधारित नहीं है। उन्‍होने बताया कि हम अपने घोषणापत्र के लिए जनता से सुझाव ले रहे हैं। यह समय पर लोगों के सामने आएगा। विदेश नीति पर उनका कहना है कि एनडीए के समय ही भारत और अमेरिका के रिश्‍ते ज्‍यादा मजबूत हुए लेकिन पिछले दस वर्षों में ये कमजोर हुए हैं।

अरूण जेटली ने विकास के मुद्दे पर कहा कि मुझे लगता है कि हर एक राज्‍य में आईआईटी और आईआईएम होने चाहिए।

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