पाकिस्तान प्रेसिडेंट के दिल्ली कालेज में प्रिंसिपल-स्टुडेंट भिड़े
नई दिल्ली(विवेक शुक्ला) कभी पाकिस्तान के राष्ट्रपति रहे जिया-उल -हक राजधानी के सेंट स्टीफंस कालेज में पढ़ते थे। ये 1945 की बातें हैं। इस कालेज ने बीसियों केन्द्रीय मंत्री से लेकर सांसद और दूसरी हस्तियां दी। इन दिनों यहां के प्रिंसिपल और स्टुडेंट आमने -सामने हैं।
प्रिंसिपल वाल्सन थंपू अपने छात्रों से नाराज हैं। उन्होंने छात्रों की तरफ से चलाई जा रही आन लाइन मैगजीन स्टीफंस वीकली पर रोक लगा दी है। उनका कहना है कि इस पर कंटेट उनसे पूछ कर नहीं डल रहा। हालांकि थंपू के फैसले से छात्र और कालेज की टीचर बिरादरी नाराज है। इनका कहना है कि थंपू के आरोप गलत हैं।
थंपू से वन इंडिया ने भी बात करने की कोशिश की ताकि वे बताएं कि आखिर वे अपने ही छात्रों से इतने नाराज क्यों हो गए। क्या वे उन्हें माफ करेंगे... उन्होंने कुछ लोगों को कहा कि कालेज की आनलाइन पत्रिका को उनसे पूछकर शुरू किया गया था। वे नहीं चाहेंगे इस कालेज की पत्रिका का कंटेट लचर हो।
डेमोक्रेटिक नहीं
उधर, कुछ छात्रों का कहना है कि थंपू का आचरण और व्यवहार डेमोक्रिटिक नहीं रहा। वे बात-बात पर नाराज हो जाते हैं। वे दूसरे की बात सुनने के लिए तैयार नहीं होते। इस बीच, सेंट स्टीफंस कालेज के छात्र रहे पी. भूटानी ने कहा कि दोनों पक्षों को अपने मसले मिल-जुलकर हल करने चाहिए। विवाद बढ़ने से कालेज की इमेज पर बट्टा लगेगा।
बता दें कि सेंट स्टीफंस कालेज से हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह, कपिल सिब्बल, सलमान खुर्शीद,राहुल गांधी, कबीर बेदी,अरुण शौरी, चंदन मित्रा, कीर्ति आजाद, अरुण लाल, स्वपन दास गुप्ता समेत चोटी के लोग जुड़े रहे हैं।













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