क्रिकेट खेल कर इमरान खान PM बन गये, अब सिद्धू बनना चाहते हैं CM
इमरान खान और नवजोत सिंह सिद्धू ने एक दूसरे के खिलाफ क्रिकेट में खूब हाथ आजमाये हैं। इसके बावजूद दोनों में जबर्दस्त यारी है। क्रिकेट खेल कर इमरान खान राजनीति में आये और पीएम बन गये। क्रिकेटर से नेता बने सिद्धू इमरान खान से मुत्तस्सिर हैं और सीएम बनना चाहते हैं। पिछले कुछ महीनों से पंजाब की राजनीति में जो उथल-पुथल मची हुई है उसकी वजह सिद्धू ही हैं। सिद्धू ने अमरिंदर सिंह को मात देकर समझा था कि मैदान मार लिया। लेकिन चरणजीत सिंह चन्नी ने उनके मंसूबे पर पानी फेर दिया। सिद्धू ने फिर दम लगाया। वे चन्नी को नाइट वाचमैन और खुद को सुपर सीएम समझने लगे। उन्होंने टीम मैनेजमेंट (कांग्रेस) पर दबाव बनाना शुरू किया कि अगर अभी सीएम नहीं बनाया तो कम से कम 2022 के लिए सीएम फेस ही घोषित कर दीजिए। लेकिन सिद्धू की रोज-रोज की शर्तों से कांग्रेस भन्ना गयी। आखिरकार उसने सिद्धू को उनके हाल पर छोड़ दिया। इस्तीफा दिया तो दिया।

क्या सीएम बनने के लिए यह सब कर रहे हैं सिद्धू ?
भाजपा छोड़ कर अकाली दल में शामिल होने वाले अनिल जोशी ने सिद्धू के बारे में कहा है, "वे अपने विचार पर कायम नहीं रहते। अहंकार और पद की लालच में स्टैंड बदलते रहते हैं। जबर्दस्ती बात मनवाना उनकी पुरानी आदत है। धमकी देकर या इस्तीफा देकर कोई पद हासिल नहीं किया जा सकता। सिद्धू की वजह से कांग्रेस की फजीहत हो गयी। सिद्धू के लिए अमरिंदर सिंह को कुर्बान कर दिया। अब खुद सिद्धू ने किनारा कर लिया। सिद्धू कभी पंजाब का मुख्यमंत्री नहीं बन सकते।" राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि पंजाब में बहुत मुश्किल के बाद शांति आयी है। इसलिए राजनीतिक उथल-पुथल पंजाब के लिए ठीक नहीं। अपनी हठधर्मिता की वजह से सिद्धू कांग्रेस में अलग-थलग पड़ते जा रहे हैं। कांग्रेस के अधिकतर विधायकों का मानना है कि सिद्धू को मनाने की बजाय अब नया अध्यक्ष चुन लिया जाना चाहिए। विधायक इस बात से चिंतिति हैं कि अगर पार्टी में इसी तरह से गुटबाजी कायम रही तो 2022 में वे चुनाव कैसे जीतेंगे ? अमरिंदर सिंह बनाम सिद्धू लड़ाई में कांग्रेस को बहुत नुकसान हुआ है। अब और नुकसान मंजूर नहीं। सिद्धू खुद माने तो ठीक, नहीं भी माने तो भी ठीक।

छब्बे के फेर में दूबे बन गये
जिद की वजह से नवजोत सिंह सिद्धू की राजनीतिक पारी जमने के पहले लड़खड़ा जा रही है। शर्तों की राजनीति की वजह से ही वे भाजपा की पिच पर लंबी पारी नहीं खेल पाये। अब कांग्रेस में भी उनका यही हाल है। कांग्रेस के कुछ नेताओं का कहना है कि सिद्धू पंजाब की राजनीति पर एकाधिकार चाहते हैं। वे चाहते हैं कि सभी बड़े फैसले उनकी रजामंदी से लिये जाएं। वे समझते थे कि मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी जब मंत्रियों के विभाग का बंटवारा करेंगे तो उनकी राय जरूर लेंगे। लेकिन चन्नी ने अपनी मर्जी से विभागों का बंटवारा कर दिया। उन्होंने सुखजिंदर रंधावा को गृहमंत्री बना दिया। ये बात सिद्धू को हजम नहीं हुई। उन्होंने नये एडवोकेट जनरल और डीजीपी की नियुक्ति पर भी सवाल उठाये। अपनी ही सरकार के फैसले पर सवाल खड़ा कर कर सिद्धू ने कांग्रेस के लिए असहज स्थिति पैदा कर दी। कहा जाता है कि मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी भी सिद्धू की कारगुजारियों से बेहद खफा हैं। एक प्रेस कांफ्रेंस में सिद्धू ने सीएम चन्नी के कंधे पर हाथ रख दिया। सिद्धू यह जताना चाहते थे कि असल बॉस तो वहीं हैं, चन्नी नाइट वाचमैन की तरह बस कुछ ओवर ही खेलने आये हैं। आखिरकार सिद्धू को सख्ती से हिदायत दी गयी के वे मुख्यमंत्री की गरिमा का हर हाल में ख्याल रखें।

क्रिकेट के जमाने से ही पंगा लेते रहे हैं सिद्धू
नवजोत सिंह सिद्धू जब क्रिकेट खेलते थे तब भी वे पंगा लेने से बाज नहीं आते थे। 1996 में भारतीय क्रिकेट टीम इंग्लैंड के दौरे पर गयी थी। अजहरुद्दीन की कप्तानी वाली इस टीम में सिद्धू भी थे। किसी बात पर सिद्धू की कप्तान अजहरुद्दीन से खटपट हो गयी। सिद्धू ने आव देखा न ताव, सामान पैक किया और बिना किसी को बताये इंग्लैंड से भारत लौट आये। इंग्लैंड दौरे को बीच में छोड़ कर सिद्धू के यूं लौट आने से हंगामा मच गया। बीसीसीआइ ने इस मामले की जांच के लिए कमेटी बैठा दी। राजसिंह डुंगरपुर, सुनील गावस्कर, आइएस बिंद्रा को जांच का जिम्मा सौंपा गया। सिद्धू जांच कमेटी के सामने पेश हुए। जब उनसे दौरा छोड़ कर लौटने की वजह पूछी गयी तो सिद्धू ने अपनी गलती मान ली। उन्होंने जांच कमेटी के सामने कहा, बिना किसी को बताये मेरा भारत लौट आना गलती थी। आप मुझे जो भी सजा देना चाहते हैं वो मुझे मंजूर है। फिर जांच कमेटी में पंजाबी बोलने वाले मोहिंदर अमरनाथ को भी शामिल किया गया। सिद्धू की फिर पेशी हुई। उन्होंने फिर वही बात कही, मेरी गलती के लिए आप मुझे कोई सजा दे सकते हैं। आखिरकार जांच कमेटी ने मामला रफादफा कर दिया। अब जब सिद्धू नेता बन गये हैं तब भी उनका विवादों से नाता नहीं टूटा है।












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