12 साल की बच्ची का था मजाक, उरण में नहीं दिखे थे संदिग्ध आतंकी
मुंबई। उरी हमले के चार दिन बाद मुंबई के उरण में स्कूली बच्चों को दिखें चार संदिग्ध कौन थे, इसका सच सुरक्षा बलों के सामने आ गया है।

18 सितंबर को जम्मू कश्मीर के उरी में आतंकी हमले के चार दिन बाद मुंबई के उरण में कुछ स्कूली बच्चों ने तीन से चार लोगों को देखने की बात स्कूल प्रशासन को बताई।
12 साल की एक स्टूडेंट ने अपने टीचर को बताया कि तीन से चार लोग काले कपड़े पहने थे, उनके कुर्ते नीचे-नीचे थे और सभी के पास हथियार थे। साथ उसने बताया कि वो किसी दूसरी भाषा में बात कर रहे थे।
इस बच्ची के साथ कुछ और बच्चों ने भी इस बात को दोहराया तो स्कूल के प्रिंसिपल ने फौरन ही पुलिस को इसकी जानकारी दी। पुलिस ने बच्चों की बात सुनने के बाद क्षेत्र में हाई-अलर्ट जारी कर दिया।
रोमांच के लिए कह दी थी आंतकी दिखने की बात
नौसेना और एटीएस ने तुरंत ही संदिग्धों की तलाश शुरू कर दी। घटना के अगले दिन पुलिस ने उरण के गह्वाण गांव से तीन युवकों को गिरफ्तार कर पूछताछ भी की लेकिन कोई खास सफलता नहीं मिली।
इसके बाद एटीएस और नौसेना के अधिकारियों ने स्कूल की उस बच्ची से भी कई बार बात की। अब बच्ची ने इस पूरे मामले पर जो खुलासा किया है, वो चौंकाने वाला है।
नवी मुंबई के पास स्कूल में जिस बच्ची ने संदिग्धों को देखा था, उसने पुलिस के अधिकारियों को बताया है कि उसने थोड़ी देर के रोमांच के लिए ऐसा किया था।
जब 12 साल की इस बच्ची ने अपने साथ पढ़ने वाले कुछ दूसरे बच्चों को ये बात बताई तो उन्होंने भी उसकी हां में हां मिला दी और बात स्कूल में फैल गई।
इस बच्ची ने पुलिस को बताया कि उसने टीवी पर एक वीडियो में काले कपड़े वाले लोगों को हथियार लिए देखा था, जो किसी को मार रहे थे। उस वीडियो में जैसा हुलिया और भाषा उसने देखी थी, वही उसने अपने टीचर और साथी बच्चों को बता दी।
अधिकारियों ने की बच्ची की काउंसलिंग
बच्ची ने कहा कि उसने ये सिर्फ इसलिए किया ताकि वह दूसरे बच्चों को डरा सके और इससे मजे ले सके। बच्ची की बात सुन नौसना और एटीएस के अधिकारी भी सन्न रह गए।
नौसेना के अधिकारियों ने इस बच्ची के 'मजे' के लिए ये सब करने की बात सुनने के बाद उसको देर तक समझाया कि ऐसा करना कितना गलत हो सकता है और इससे किसी को किस हद तक नुकसान हो सकता है।
अधिकारियों ने काउंसिलिंग के बाद बच्ची को घर पर भेज दिया। मामले को देख रहे अधिकारियों ने कहा कि इस तरह की अफवाहों से सुरक्षाबलों के मनोबल के साथ-साथ पैसे और वक्त की भी बर्बादी होती है। साथ ही आम जनता के मन में भी बेवजह का डर पैदा होता है।













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