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Rajendra Bharud IAS : ये हैं कोरोना की दूसरी लहर आने से पहले ही ऑक्सीजन प्लांट लगाने वाले कलेक्टर

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मुम्बई, 29 अप्रैल। देश में त्रिपुरा पश्चिम के जिला कलेक्टर शैलेश कुमार यादव एक मैरिज हॉल में कोविड प्रोटोकॉल का उल्लंघन करने वाले के खिलाफ अभद्र तरीके से कार्रवाई करने को लेकर चर्चा में हैं, जबकि इसी समय के देश के एक और जिला कलेक्टर सुर्खियों में है। नाम है आईएएस राजेंद्र भारूड़।

कोरोना की दूसरी लहर से मेडिकल सिस्टम को धवस्त किया

कोरोना की दूसरी लहर से मेडिकल सिस्टम को धवस्त किया

पिछले साल दिसम्बर के बाद से कोरोना संक्रमण की रफ़्तार धीमी हो गई थी। जनवरी आते-आते कोरोना पॉजीटिव केस गिनती के रहे गए थे। तब जन जीवन पटरी पर लौटने लगा था। प्रशासन भी राहत की सांस लेने लगा था, मगर फरवरी से अचानक महाराष्ट्र से देश में कोरोना की दूसरी लहर शुरू हुई, जो अब कहर बरपा रहा है। पूरे मेडिकल सिस्टम को धवस्त् कर दिया है। ऑक्सीजन के अभाव में लोगों की मौतें हो रही हैं। सरकार ऑक्सीजन प्लांट लगाने की तैयारियों में जुट गई है।

 महाराष्ट्र नंदुरबार जिले में कोरोना की कहानी

महाराष्ट्र नंदुरबार जिले में कोरोना की कहानी

​अब जानिए महाराष्ट्र के नंदुरबार जिले की कहानी है। मुम्बई से करीब 400 किलोमीटर दूर नंदुरबार के जिला कलेक्टर राजेंद्र भारुड ने मीडिया से बातचीत में पिछले साल के अंत में भारत में कोरोना के मामले घट रहे थे तब अमेरिका और ब्राजील में कोरोना कहर बरपा रहा था। मैंने तभी तय कर लिया था कि कोरोना लौटकर आ सकता है। उससे लड़ने की तैयारी अभी से करनी होगी। ऐसे में सितंबर 2020 में नंदुरबार जिला प्रशासन के प्रयासों से जिले में 600 लीटर प्रति मिनट उत्पादन वाला पहला ऑक्सीजन प्लांट स्थापित किया।

 कोरोना के केस घटे थे तभी लगा दिया प्लांट

कोरोना के केस घटे थे तभी लगा दिया प्लांट

उस वक्त नंदुरबार में एक दिन में कोरोना के सर्वाधिक मरीजों का आंकड़ा 190 था। फिर मार्च में हमने ऑक्सीजन का एक और प्लांट लगाया। अप्रैल में कोरोना की दूसरी लहर के बीच रोजाना संक्रमित केस की संख्या 1200 को छू गई तो हमने ऑक्सीजन के तीसरे प्लांट की तैयारी शुरू कर दी। जल्द ही, हमारे पास 3,000 लीटर प्रति मिनट की संयुक्त क्षमता वाला संयंत्र होगा।

 राजेंद्र भारुड़ के पास एमबीबीएस की डिग्री भी

राजेंद्र भारुड़ के पास एमबीबीएस की डिग्री भी

बता दें कि महाराष्ट्र कैडर के आईएएस राजेंद्र भारुड़ के पास एमबीबीएस की भी डिग्री है। एक वजह यह भी है कि उन्होंने कोरोना वायरस की दूसरी लहर आने से पहले ही जिले में बड़े स्तर पर चिकित्सा इंतजाम कर लिए थे। देश में जहां मरीज एक-एक बेड व ऑक्सीजन के एक-एक सिलेंडर के अभाव में दम तोड़ रहे थे। तब नंदुरबार के पास 150 बेड खाली और ऑक्सीजन के दो संयंत्र खुद के थे। यही वजह है कि नंदुरबार जिला प्रशासन ने कोरोना संक्रमित केस को तीस फीसदी तक घटाने में सफल रहा। रोजाना के 12 सौ केस 300 तक आ गए।

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आईएएस राजेंद्र भारुड़ की जीवनी

आईएएस राजेंद्र भारुड़ की जीवनी

2013 बैच के आईएएस अधिकारी राजेंद्र भारुड़ महाराष्ट्र के धुले जिले के सामोडा के रहने वाले हैं। ये महाराष्ट्र के आदिवासी भील समाज से आईएएस बनने वाले पहले शख्स हैं। राजेंद्र भारुड़ जब अपनी मां के पेट में थे तब इनके पिता की मौत हो गई थी। इनके पास पक्का घर तक नहीं था। ना ही आय का कोई जरिया। 7 जनवरी 1988 को जन्में राजेंद्र भारुड़ की मां कमलाबाई ने शराब बेचकर उनको पढ़ाया लिखाया और अफसर बना दिया।

English summary
IAS Rajendra Bharud DM Nandurbar Maharashtra set up an oxygen plant before second wave of Corona
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