Morena news: ऐसे तैयार होती है मुरैना की मशहूर गजक, 200 करोड़ का है कारोबार

मुरैना की गजक है देश-विदेश में मशहूर, सर्दी में बढ़ जाती है गजक की खपत, सालाना 200 करोड़ रुपए का है मुरैना में गजक का कारोबार, विशेष विधि से तैयार की जाती है गजक

Morena चंबल का वह जिला है जो गोली और बोली के लिए पूरे देश में मशहूर है। यहां के डकैत और बीहड़ भी देश के साथ विदेशों में मशहूर है लेकिन इसके साथ ही मुरैना की गजक भी पूरे विश्व में अपने स्वाद के लिए पहचानी जाती है। देश-विदेश में मुरैना की गजक काफी पसंद की जाती है। इस गजक को बनाने की विधि भी काफी विशेष है।

मुरैना में खास तरीके से बनाई जाती है गजक

मुरैना में खास तरीके से बनाई जाती है गजक

मुरैना में बडे़ पैमाने पर गजक का उत्पादन होता है। बहुत विशेष ढंग से मुरैना की गजक तैयार की जाती है। यह बात हम इसलिए कह रहे हैं क्योंकि मुरैना की गजक की मिठास पूरे विश्व भर में मशहूर है। यहां गजक बनाने का तरीका इतना उम्दा है कि मुंह में रखते हैं वह मिश्री की डली की तरह घुल जाती है। मुरैना की गजक के स्वाद के बारे में सोचते ही लोगों के मुंह में पानी आ जाता है।

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    सर्दियों में तैयार हो रही मुरैना की गजक
    विशेष विधि से तैयार की जाती है मुरैना की गजक

    विशेष विधि से तैयार की जाती है मुरैना की गजक

    मुरैना की गजक तैयार करने के लिए गजक बनाने के काम में पारंगत कारीगरों का सहारा लिया जाता है। कई सालों से गजक बनाने का काम कर रहे कारीगर स्वादिष्ट गजक तैयार करते हैं। मुरैना में गजक बनाते समय कई विशेष बातों का ध्यान रखते हैं। सबसे पहले गुड़ या शक्कर की चाशनी तैयार की जाती है। इस चाशनी को काफी देर तक भट्टी पर उबाला जाता है और फिर भट्टी से उतारकर उसे ठंडा होने के लिए रख दिया जाता है।

    कील पर लटका कर चाशनी को खींचने का किया जाता है काम

    कील पर लटका कर चाशनी को खींचने का किया जाता है काम

    चाशनी के ठंडे हो जाने पर उसमें तार बन जाते हैं। फिर चाशनी को दीवार में लगी हुई कील पर लटका दिया जाता है और फिर कारीगर द्वारा चाशनी को खींचने का काम किया जाता है। चाशनी को काफी देर तक खींचा जाता है। चाशनी को खींचकर इतना मुलायम कर दिया जाता है कि एकदम खस्ता हो जाती है।

    तिल मिलाकर की जाती है इसकी कुटाई

    तिल मिलाकर की जाती है इसकी कुटाई

    इसके बाद तिल को कड़ाही में भूना जाता है और फिर भूनी हुई तिल को चाशनी के साथ मिक्स कर दिया जाता है। इसके बाद इसे जमीन पर फैलाकर लकड़ी के हथोड़ों से इसकी काफी देर तक कुटाई की जाती है। हथोड़ों से कुटाई करने के बाद कारीगर द्वारा इसे छोटे-छोटे पीस में काट दिया जाता है और फिर इन्हें डिब्बे में रख दिया जाता है। इस तरह खस्ता करारी गजक तैयार हो जाती है।

    विदेशों तक होती है गजक की सप्लाई

    विदेशों तक होती है गजक की सप्लाई

    मुरैना की गजक इतनी मशहूर है कि देश के साथ विदेशों में भी इसकी सप्लाई होती है। दुनिया के कई बड़े देश मुरैना की गजक को पसंद करते हैं। यही वजह है कि मुरैना की गजक का तकरीबन 200 करोड़ रुपए का सालाना कारोबार है।

    गजक बर्फी, गजक गुजिया, गजक रोल भी किए जाते हैं तैयार

    गजक बर्फी, गजक गुजिया, गजक रोल भी किए जाते हैं तैयार

    गजब की कई वैरायटी मुरैना में तैयार की जाती हैं। गजक के साथ-साथ गजक गुजिया, गजक रोल, गजक समोसा भी विशेष तौर से तैयार किए जाते हैं। लोग अपनी पसंद के अनुसार इन मिठाइयों को खरीदते हैं और बड़े आनंद के साथ इन मिठाइयों का स्वाद लेते हैं।

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