झाड़-फूंक ने निगल ली एक और ज़िंदगी, जानिए जब सांप काटे तो क्या करें और क्या न करें!
सांप काटने पर अगर इस किसान को झाड़-फूंक वालों के पास ले जाने की जगह सीधा अस्पताल ले जाया गया होता, तो शायद आज यह जिन्दा होता और अपने परिवार के साथ होता। इसलिए यह जानना जरूरी है कि सांप के काटने पर क्या करना चाहिए।

एक चर्चित कहावत है 'नीम हकीम खतरा-ए-जान', जो आज यूपी के मथुरा में अक्षरश: चरितार्थ हो गई। जब सर्पदंश का शिकार हुए किसान को अस्पताल ले जाने की जगह, उसके परिजन यहां वहां झाड़-फूंक करवाते रहे। इससे हासिल तो कुछ नहीं हुआ बल्कि किसान का शरीर धीरे धीरे निष्प्राण होता गया। इत्तिफाकन किसी ग्रामीण ने समझदारी दिखाई और सीधे अस्पताल ले जाने की सलाह दी, लेकिन जब उसे अस्पताल पहुंचाया गया तो काफी देर हो चुकी थी। लिहाजा नव्ज पर हाथ रखते ही डॉक्टर ने कह दिया कि कुछ नहीं बचा है। वहीं डॉक्टर ने जब यह जाना कि अस्पताल देरी से लाए जाने का कारण बेवकूफाना झाड़-फूंक है तो उसने परिजनों को जमकर लताड़ लगाई।

झाड़-फूंक ने ले ली एक और जान
दरअसल, पूरा मामला उत्तर प्रदेश के जनपद मथुरा के छाता थाना क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले नरी गांव का है। यहां के रहने वाले 70 वर्षीय भिखारी नामक व्यक्ति को 26 फरवरी की शाम उस समय एक जहरीले सर्प ने डस लिया, जिस समय वह अपने खेत पर पानी लगा रहा था। घटना को देखते ही आसपास के लोगों की भीड़ एकत्रित हो गई और आनन-फानन में भिखारी के परिजनों को घटना की जानकारी दी गई। जिसके बाद भिकारी के परिजन उसे लेकर अस्पताल ले जाने के वजाए झाड़-फूंक वालों के पास लेकर पहुंच गए।
जहां काफी समय तक झाड़-फूंक चलती रही। वहीं काफी देर तक झाड़-फूंक के चक्कर में उपचार मिलने में देरी हो गई और जब तक भिखारी को उसके परिजन चिकित्सक के पास उपचार के लिए लेकर पहुंचे, तब तक भिखारी ने दम तोड़ दिया था। घटना की जानकारी लगते ही सूचना पाकर मौके पर पहुंची पुलिस ने मृतक के शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया।

जागरुक करना बेहद ही जरूरी
सांप काटने पर अगर इस किसान को झाड़-फूंक वालों के पास ले जाने की जगह सीधा अस्पताल ले जाया गया होता, तो शायद आज यह जिन्दा होता और अपने परिवार के साथ होता। हालाँकि यह मामला कुछ दिनों पुराना है पर यह जानना और दूसरों को जागरुक करना बेहद ही जरूरी है कि सांप के काटने पर क्या करना चाहिए और क्या नहीं करना चाहिए।
सांप के काटने पर क्या करें-:
सांप अगर काट ले तो कोशिश करें की जिस जगह पर काटा है, शरीर का वह हिस्सा बिल्कुल भी ना हिले। जहां काटा है, उस जगह पर बीटाडीन या फिर स्क्रब सोल्यूशन का इस्तेमाल कर सकते हैं। हालांकि अगर ब्लीडिंग हो रही है तो उसे हो जाने दें और बाद में इन चीजों का इस्तेमाल करें। कोशिश करें कि जल्दी-से-जल्दी अस्पताल पहुंचे। अस्पताल में जाने से आपको यह पता चलेगा की घाव कितना गहरा है। साथ ही यह भी पता चल जाएगा की आपको जहर वाले सांप ने काटा है या नहीं।
कोनसे सांप के काटने पर क्या होते हैं लक्षण
भारत में मुख्य तौर पर दो तरह के सांपों के काटने की घटनाएं होती हैं। पहला करैत और दूसरा कोबरा। करैत के काटने की जगह ऐसी दिखती है कि जैसे किसी मच्छर ने काटा हो। लेकिन करैत के काटने के बाद काटने वाली जगह पर सूजन आती है। जबड़े और घुटने में दर्द शुरू हो जाता है। इसका मतलब यह है कि शरीर में जहर फैलने लगा है। अगर कोबरा काट ले तो उस जगह पर बहुत अधिक सूजन होती है, घाव की तरह दिखने लगता है। आंखों में परेशानी और पेट में अकड़न जैसी समस्याएं शुरू हो जाती हैं। इन दो सांपों को पहचानना बहुत जरूरी है।

सांप के काटने पर बिलकुल भी न करें यह काम
सांप काटने के बाद किसी बाबा, ओझा, झाड़-फूंक, नीम की पत्ती को चबा कर देखना, कि कड़वा लग रहा है या मीठा, यह सब बिल्कुल नहीं करना चाहिए। कई क्षेत्रों में सांप काटने पर ज्यादातर लोग नीम की पत्ती चबाकर पता लगाते हैं कि सांप ने काटा है या नहीं, हालांकि यह बहुत गलत भावना है। पंडित और ओझा के पास जाने से समय बर्बाद होता है। इन चक्करों में कतई न पड़ें।
जहां सांप ने काटा है, वहां पर चीरा नहीं लगाना चाहिए, इससे सेप्टिक होने के चांस बन जाते हैं। सांप काटने पर तनाव नहीं लेना चाहिए, क्योंकि घबराहट में अक्सर लोगों की मौत हो जाती है।












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