मां के देहांत की खबर सुनने के बाद भी प्रभात ने नहीं हारी हिम्मत, एंबुलेंस से मरीजों को पहुंचाया अस्पताल
मां के देहांत की खबर सुनने के बाद भी प्रभात ने नहीं हारी हिम्मत, एंबुलेंस से मरीजों को पहुंचाया अस्पताल
मथुरा, मई 26: एंबुलेंस चालक कोरोना वायरस संक्रमण की लड़ाई में अहम भूमिका निभा रहा है। वो हर रोज सैंकड़ों संक्रमित मरीजों को इलाज के लिए अस्पताल पहुंच रहे हैं। इस का जीता-जागता उदाहरण है मैनपुरी के गांव बरनाहल का प्रभात यादव। दरअसल, प्रभात यादव ने अपनी मां की मौत की खबर मिलने के बाद भी कई कोरोना संक्रमित मरीजों को अस्पताल पहुंचा। ड्यूटी निभाने के बाद वो गांव गया और अपनी मां के अंतिम संस्कार कुछ समय के लिए ही शामिल हुआ। तो वहीं, अब एंबुलेंस चालक प्रभात की लोग मिशाल पेश कर रहे हैं।

मां की मौत की खबर सुनने के बाद भी नहीं हारी हिम्मत
33 वर्षीय प्रभात यादव, मथुरा के स्वास्थ्य विभाग में 108 एंबुलेंस पर चालक के पद पर कार्यरत हैं और वो पिछले 9 सालों से एंबुलेंस चल रहा है। प्रभात इस समय लोगों के बीच चर्चा का विषय बना हुआ है। इसका कारण उनके कार्य के प्रति समर्पण की भावना है। दरअसल, प्रभात पिछले कोरोना काल से अब तक अपने पिता और भाई की मौत को भी देख चुका है। अब कोरोना काल की दूसरी लहर में वह कोविड मरीजो की सेवा में जुटे हुए थे, तभी उनकी मां के देहांत की खबर मिली। मां की मौत की खबर सुन प्रभात एक बार तो टूट गए, लेकिन फर्ज के जज्बे ने उन्हें हिम्मत दी।
मरीजों का जीवन बचा लिया तो मेरी मां मुझ से खुश होगी: प्रभात
प्रभात कोविड मरीजों को अस्पताल पहुंचाते रहे। उन्होंने उस रात 15 मरीजों को अस्पताल पहुंचाया और फिर वहां से 200 किमी दूर अपने गांव में मां के अंतिम संस्कार के लिए रवाना हुए। इतना ही नहीं, मां का अंतिम संस्कार करने के बाद प्रभात, तुरंत अपनी ड्यूटी पर भी वापस लौटे। मथुरा आकर उन्होंने सरकारी एंबुलेंस का स्टेरिंग अपने हाथों में थाम लिया। प्रभात ने टाइम्स ऑफ इंडिया से बातचीत में कहा, 'हम हर रोज बहुत ज्यादा गंभीर रोगियों को अस्पताल पहुंचा रहे हैं। उनके परिवारों को हमारी मदद चाहिए। मैं घर बैठ कर अपनी मां की मृत्यु का शोक नहीं मना सकता। अगर मैंने कुछ मरीजों का जीवन बचा लिया तो निश्चित ही मेरी मां मुझ पर खुश होंगी।'
प्रभात की तारीफ करते नहीं थक रहे अधिकारी
अपनी मां की चिता की राख को ठंडी होने से पहले और दाग देने के बाद भी अपने फर्ज को निभाने के लिए प्रभात जब लौटकर आए और अधिकारियों को इस बात की जानकारी हुई तो वह भी हैरान रह गए। अब उनकी सोच और अपने फर्ज के लिए समर्पण की तारीफ अधिकारी करते नहीं थक रहे हैं।












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