श्रीकृष्ण जन्मभूमि-ईदगाह विवाद में इलाहाबाद हाईकोर्ट का फैसला, 'नए सिरे से हो मामले की सुनवाई'
श्रीकृष्ण जन्मभूमि विवाद और शाही ईदगाह विवाद को लेकर इलाहाबाद हाईकोर्ट ने मथुरा जिला जज को दोनों पक्षों को नए सिरे से सुनकर सिविल वाद को तय करने का निर्देश दिया है।

Krishna Janmabhoomi Case: श्रीकृष्ण जन्मभूमि विवाद और शाही ईदगाह विवाद को लेकर इलाहाबाद हाईकोर्ट ने सोमवार 01 मई को बड़ा फैसला सुनाया है। कोर्ट ने कटरा केशवदेव के नाम से दर्ज ईदगाह की जमीन विवाद को लेकर मथुरा जिला जज को दोनों पक्षों को नए सिरे से सुनकर सिविल वाद को तय करने का निर्देश दिया है।
इतना ही नहीं, कोर्ट ने अंतरिम आदेश एवं पुनरीक्षण आदेश के खिलाफ दाखिल याचिका वापस करते हुए निस्तारित कर दी है। कोर्ट ने कहा कि पोषणीयता के मामले में पहले ही फैसला आ चुका है, ऐसे में कोई हस्तक्षेप नहीं किया जा सकता है।
वहीं, अब सभी पक्षकारों को मथुरा के जिला जज के यहां नए सिरे से अपनी दलीलें पेश करनी होगी। यह आदेश न्यायमूर्ति प्रकाश पाडिया ने सुन्नी सेंट्रल वक्फ बोर्ड व अन्य की तरफ से दाखिल याचिका पर दिया है।
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मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, मथुरा सिविल जज की कोर्ट में भगवान श्रीकृष्ण विराजमान की तरफ से 20 जुलाई 1973 के फैसले को रद्द करने और 13.37 एकड़ कटरा केशव देव की जमीन को श्रीकृष्ण विराजमान के नाम घोषित किए जाने की मांग की गई थी।
इस दौरान वादी की तरफ से कहा गया था कि जमीन को लेकर दो पक्षों के बीच हुए समझौते के आधार पर 1973 में दिया गया था। लेकिन, यह फैसला वादी पर लागू नहीं होगा। क्योंकि, इसमें वह पक्षकार नहीं था।
वहीं, सुन्नी सेंट्रल वक्फ बोर्ड की आपत्ति की सुनवाई करते हुए अदालत ने 30 सितंबर 2020 को सिविल वाद खारिज कर दिया था। जिसके खिलाफ भगवान श्रीकृष्ण विराजमान की तरफ से अपील दाखिल की गई। विपक्षी ने अपील की पोषणीयता पर आपत्ति की।
जिला जज मथुरा की अदालत ने अर्जी मंजूर करते हुए अपील को पुनरीक्षण अर्जी में तब्दील कर दिया था। जिला जज के इसी आदेश को ईदगाह ट्रस्ट कमेटी और सुन्नी सेंट्रल वक्फ बोर्ड ने हाईकोर्ट में चुनौती दी थी। जिसपर आज जस्टिस प्रकाश पाडिया की सिंगल बेंच ने फैसला सुनाया है।












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