मुंबई में टीपू सुल्तान को लेकर विवाद क्या है ? जानिए
मुंबई, 27 जनवरी: मुंबई में बीएमसी चुनाव से पहले टीपू सुल्तान के नाम पर सियासी घमासान मचा है। भाजपा का दावा है कि महाराष्ट्र के उद्धव सरकार में कांग्रेस कोटे के एक मंत्री ने मलाड के मुस्लिम बहुल इलाके में एक खेल के मैदान का नाम टीपू सुल्तान के नाम पर रखकर उद्घाटन कर दिया। लेकिन, जिस मंत्री पर आरोप लग रहे हैं और शिवसेना का अलग-अलग स्टैंड है। टीपू सुल्तान 17वीं शताब्दी में मैसूर के राजा थे और बीजेपी उन्हें हजारों हिंदुओं की मौत के लिए जिम्मेदार मानती रही है।

मलाड के मालवणी में क्या हुआ ?
मुंबई के पश्चमी उपनगर मलाड के मालवणी इलाके में मुस्लिम बहुल इलाके में स्थित एक खेल का मैदान सियासत का अखाड़ा बना हुआ है। दावे के मुताबिक उस मैदान को स्थानीय लोग टीपू सुल्तान के नाम से जानते हैं। मालवणी के विधायक असलम शेख जो कि कांग्रेस कोटे से उद्धव सरकार में कैबिनेट मंत्री भी हैं, उन्होंने विधायक निधि से इसमें कुछ नवीकरण का काम करवाया है। भाजपा, वीएचपी और बजरंग दल के लोगों का आरोप है कि गणतंत्र दिवस को इसका उद्घाटन कर दिया गया और बाकायदा मैदान का नाम टीपू सुल्तान के नाम पर रख दिया गया। हालांकि, शेख की ओर से दावा किया गया कि सिर्फ जो काम पूरा हुआ है, उसी का इस्तेमाल शुरू करने के लिए एक कार्यक्रम रखा गया था। लेकिन, परिसर के गेट पर वीर टीपू सुल्तान का नाम और असलम शेख का नाम दिखने के बाद भारी तादाद में प्रदर्शनकारी वहां पहुंच गए। विपक्ष के नेता और पूर्व सीएम देवेंद्र फडणवीस ने कहा कि, 'हम मैदान का नाम उस व्यक्ति के नाम पर नहीं रखने देंगे, जो हजारों हिंदुओं की मौत के लिए जिम्मेदार है।' वहां पहुंचे प्रदर्शनकारियों को भारी संख्या में तैनात की गई पुलिस का सामना करना पड़ा।

इस मामले में अघाड़ी सरकार का स्टैंड क्या है?
महा विकास अघाड़ी सरकार के लिए बीएमसी चुनाव से पहले इस विवाद को हैंडल करना आसान नहीं है। क्योंकि, वहां टीपू सुल्तान का नाम देखकर उसका विरोध करने के लिए जो लोग पहुंचे थे, उसमें तात्कालिक तौर पर कुछ शिवसैनिक भी थे। सीएम के बेटे और राज्य के कैबिनेट मंत्री आदित्य ठाकरे ने कहा है कि बीएमसी ने उसका नाम टीपू सुल्तान पर करने का कोई प्रस्ताव मंजूर नहीं किया है। गौरतलब है की बीएमसी में भी शिवसेना ही सत्ता में है। उधर असलम शेख का कहना है कि उस मैदान को कई वर्षों से टीपू सुल्तान के नाम से जाना जाता है और आधिकारिक तौर पर उसे बदलने की कोई कोशिश नहीं की गई है। उन्होंने बीजेपी पर मामले को सांप्रदायिक रंग देने का आरोप लगाते हुए दावा किया कि 'मैदान को वर्षों से टीपू सुल्तान के नाम से जाना जाता है। मैं तो सिर्फ नई सुविधाओं का उद्घाटन करने आया हूं, जो कि अब पूरा हो गया है।'उन्होंने यह भी दावा किया है कि कई बीजेपी कॉर्पोरेटर ही इसे टीपू सुल्तान के नाम पर रखने के लिए लिख चुके हैं, लेकिन अचनाक उनका इरादा बदल गया है। उधर आदित्य ठाकरे ने यह कहकर पल्ला झाड़ने की कोशिश की है कि, 'नाम में कोई भी बदलाव नहीं किया गया है। इस मामले में बीएमसी के पास अधिकार है और बीएमसी के पास नाम बदलने का कोई भी प्रस्ताव नहीं रखा गया है।'

बुरी फंसी दिख रही है शिवसेना!
हालांकि, जूनियर ठाकरे के स्टैंड के एक दिन बाद शिवसेना नेता संजय राउत का सुर बदला हुआ नजर आया। उन्होंने कहा कि 'राष्ट्रपति कोविंद कर्नाटक गए और टीपू सुल्तान को ऐतिहासिक योद्धा और स्वतंत्रता सेनानी बताकर तारीफ की थी। तो क्या आप राष्ट्रपति से भी इस्तीफा देने को कहेंगे। बीजेपी को यह स्पष्ट करना चाहिए। यह ड्रामा है।' उन्होंने यह भी कहा कि बीजेपी समझती है कि इतिहास के बारे में सिर्फ वही जानती है। 'हम टीपू सुल्तान के बारे में जानते हैं, बीजेपी से सीखने की आवश्यकता नहीं है।' उन्होंने कहा कि भाजपा के लोग कहते हैं कि यदि टीपू का नाम दिया तो ये कर देंगे, वो कर देंगे। आप यह सब बात छोड़ ही दो, आपको यह शोभा नहीं देता। 'राज्य सरकार सक्षम है निर्णय लेने के लिए। नया इतिहास मत लिखिए।'

मुंबई में क्या करने आए टीपू सुल्तान ?
महाराष्ट्र में 2015 से जब से एआईएमआईएम जैसी राजनीतिक दलों ने अपना आधार बनाया है, मुस्लिम युवाओं की ओर से टीपू सुल्तान जैसे ऐतिहासिक व्यक्तिव का महिमामंडन शुरू हो गया। इसे राजनीति में कद बढ़ाने के लिए भरपूर इस्तेमाल किया जाने लगा। खासकर महाराष्ट्र के मराठवाड़ा इलाके में टीपू सुल्तान के पोस्टरों का खूब उपयोग शुरू हो गया और दावा किया गया कि भारत के इतिहास में मुसलमानों का भी अहम योगदान रहा है। लेकिन, बीजेपी और दक्षिणपंथी संगठन इस विचारधारा की विरोधी रही हैं, जिसमें अबतक शिवसेना भी शामिल रही है।

बीएमसी चुनाव की वजह से गर्म है मुद्दा!
मुंबई बीजेपी का यह आरोप रहा है कि मलवाणी इलाके में हिंदुओं को परेशान किया जाता है, जिसके चलते उन्हें वह इलाका छोड़ना पड़ रहा है। जबकि, महा विकास अघाड़ी के नेता भाजपा पर मुद्दे को सांप्रदायिक रंग देने का आरोप लगा रहे हैं। जाहिर है कि आने वाले बीएमसी चुनाव तक यह मसला शांत होने वाला नहीं है। शिवसेना को सरकार चलाने के लिए कांग्रेस का साथ मजबूरी है और बीजेपी उसकी इसी दुखती रग को दबाने में लगी हुई है। (विरोध प्रदर्शन की कुछ तस्वीरें वायरल इमेज से)
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