महाराष्ट्र में एनडीए से RSP ने तोड़ा नाता, जानिए ये क्यों है महायुति गठबंधन के लिए तगड़ा झटका
Maharashtra assembly elections: महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव की तारीख का ऐलान होते ही राज्य में एनडीए गठबंधन को झटका लगा है। महादेव जानकर की अगुआई वाली राष्ट्रीय समाज पक्ष (आरएसपी) ने भाजपा के नेतृत्व वाले एनडीए गठबंधन से अलग होने का फैसला किया।
बुधवार को आरएसपी प्रमुख महादेव जानकर ने ऐलान किया कि उनकी पार्टी राज्य की सभी 288 सीटों पर स्वतंत्र रूप से चुनाव लड़ेगी। महाराष्ट्र चुनाव से पहले आरएसपी के नाता एनडीए से नाता तोड़ते ही ये सवाल उठने लगा है कि एनडीए से आरएसपी के अलग होने से आगामी विधानसभा चुनाव में क्या असर पड़ेगा?

जानें क्यों आएसपी ने एनडीए का छोड़ा दामन
आरएसपी के प्रमुख महादेव जानकर ने एनडीए से असंतुष्ट होकर ये अलग होने का फैसला सुनाया है। जानकर नाराज इसलिए हुए है कि क्योंकि महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव के लिए सीटों के बंटवारे को लेकर उनकी पार्टी के साथ कोई बातचीत नहीं की गई। सीट सेयरिंग को लेकर एनडीए के महायुति गठबंधन में शामिल भाजपा, एकनाथ शिंदे की शिवसेना और अजित पवार की एनसीपी के बीच चर्चा हुई। खुद को अलग-थलग महसूस करते हुए जानकर ने महायुति गठबंधन से नाता तोड़ने का फैसला किया।
आएसपी के अलग होने से बढ़ी मुसीबत
आरएसपी ने साफ कर दिया है महायुति या महा विकास अघाड़ी गठबंधन में शामिल नहीं होगी, बल्कि अकेले चुनाव लड़ेगी। पार्टी ने पहले ही तीन दर्जन सीटों के लिए उम्मीदवारों की घोषणा कर दिया है। जिससे भाजपा के नेतृत्व वाली महायुति और महा विकास अघाड़ी दोनों गुटों के लिए चुनावी चुनौतियां बढ़ गई हैं।
आरएसपी का महराष्ट्र में गढ़ पश्चिमी महाराष्ट्र और मराठवाड़ा
बता दें राष्ट्रीय समाज पक्ष (आरएसपी) का राजनीतिक गढ़ पश्चिमी महाराष्ट्र और मराठवाड़ा है। ये एनसीपी प्रमुख शरद पवार का भी राजनीति गढ़ है।
धनगर समुदाय में महादेव जानकर हैं लोकप्रिय नेता
महादेव जानकर धनगर (गड़रिया) समुदाय से ताल्लुक रखते हैं और क्षेत्र में इन्हें काफी समर्थन प्राप्त है। धनगर जो अति पिछड़ा वर्ग में आता है। 2011 की जनगणना के अनुसार, धनगर समुदाय की आबादी महाराष्ट्र की 11.2 करोड़ आबादी का लगभग 9 फीसदी है, जिसमें से लगभग 40 फीसदी आबादी का प्रमुख काम कृषि और पशुपालन है।
महाराष्ट्र की राजनीति में आरएसपी खासकर धनगर समुदाय की आबादी वाले क्षेत्रों में, कुल 288 में से लगभग 30-35 विधानसभा सीटों के नतीजों में अहम भूमिका निभाते हुए प्रभावित कर सकता है।
बीएसपी से अगल होकर बनाई थी आरएसपी
कांशीराम के साथ बहुजन समाज पार्टी (बीएसपी) के साथ महादेव जानकर ने अपनी राजनीति करियर की शुरू की थी लेकिन अगग होकर 2003 में आरएसपी की स्थापना की।
आरएसपी ने कब-कब जीती सीटें
चुनावों में आरएसपी भले ही बहुत सफल नहीं रही हो लेकिन राजनीतिक दलों की सीटों की गणना को बाधित करने की क्षमता है। 2009 में, माधा निर्वाचन क्षेत्र में शरद पवार के खिलाफ आरएसपी का मजबूत प्रदर्शन और उसके बाद के चुनावों में वोट हासिल कर पार्टी ने अपनी क्षमता का लोहा मनवाया था। आरएसपी ने 2014 और 2019 के चुनावों में एक सीट जीती थी।
एनसीपी के अलग होने से महायुति का बिगड़ा समीकरण
एनडीए से अलग होने का फैसला कई सीटों पर भाजपा, शिवसेना और एनसीपी के लिए जटिल बना सकता है। धनगर समुदाय के बड़े वोट बैंक ने पहले भाजपा के नेतृत्व वाले गठबंधन का समर्थन किया था, जिसका फायदा आरएसपी की भागीदारी से मिला। हालांकि, आरएसपी के अलग होने से आगामी विधानसभा चुनावों में राजनीतिक समीकरण बिगड़ सकते हैं।
आरएसपी के अलग होने से क्या इंडिया गठबंधन को होगा लाभ
2019 के विधानसभा चुनावों के बाद भाजपा और आरएसपी के बीच संबंधों में आई दरार, उसके बाद 2024 के लोकसभा चुनावों के लिए एक सुलह हुई। आरएसपी का स्वतंत्र रूप से चुनाव लड़ने का फैसला एक बड़ी चुनौती है, खासकर मराठवाड़ा और पश्चिमी महाराष्ट्र में धनगर समुदाय के वोटों को जुटाने में। इसके विपरीत, यह घटनाक्रम कांग्रेस के नेतृत्व वाले इंडिया गठबंधन के लिए रास्ता आसान कर सकता है।
शरद पवार के करीबी माने जाने वाले जानकर को अगर पवार महा विकास अघाड़ी में शामिल करने में सफल हो जाते हैं तो राजनीतिक परिदृश्य में बदलाव देखने को मिल सकता है। यह पैंतरा कई सीटों पर चुनावी समीकरणों को काफी हद तक बदल सकता है।












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