शरद पवार से आखिर क्यों मिले पार्थ पवार? जानें अजित पवार के निधन के बाद कैसे बदले महाराष्ट्र के सियासी समीकरण
महाराष्ट्र के पूर्व डिप्टी सीएम अजित पवार के निधन के बाद राज्य की राजनीति में तेजी से समीकरण बदलते दिख रहे हैं। इसी कड़ी में एनसीपी सुप्रीमो शरद पवार की बारामती स्थित विद्या प्रतिष्ठान में पार्थ पवार और जय पवार से हुई हालिया मुलाकात ने राजनीतिक हलकों में हलचल बढ़ा दी है। आधिकारिक तौर पर यह बैठक दिवंगत नेता के स्मारक से जुड़ी बताई गई, लेकिन इसके सियासी मायने कहीं ज्यादा गहरे माने जा रहे हैं।
सूत्रों के मुताबिक, इस बातचीत के केंद्र में पार्थ पवार की राज्यसभा को लेकर महत्वाकांक्षा रही। पार्थ सुनेत्रा पवार की मौजूदा राज्यसभा सीट में दिलचस्पी नहीं दिखा रहे, क्योंकि इससे उन्हें 2028 तक का अधूरा कार्यकाल ही मिलेगा। उनकी रणनीति अप्रैल 2026 में खाली होने वाली उस सीट पर है, जो पूरे छह साल के कार्यकाल का मौका देगी।

2026 में खाली होंगी सात सीटें
अप्रैल 2026 में महाराष्ट्र से राज्यसभा की कुल सात सीटें खाली होनी हैं। इन पर इस समय शरद पवार, फौजिया खान, रामदास आठवले, धैर्यशील पाटिल, रजनी पाटिल, भागवत कराड और प्रियंका चतुर्वेदी जैसे दिग्गज सांसद मौजूद हैं। चर्चा है कि पार्थ पवार की नजर खास तौर पर उस सीट पर है, जिस पर फिलहाल खुद शरद पवार आसीन हैं।

क्या है राज्यसभा की गणित
राज्यसभा चुनाव में जीत के लिए आवश्यक वोटों का कोटा तय फॉर्मूले से निकलता है। महाराष्ट्र विधानसभा में 288 विधायक हैं और 7 सीटों के लिए कोटा बनता है 37 विधायकों का। मौजूदा हालात में बीजेपी के 135, शिवसेना के 57 और एनसीपी के 41 विधायक हैं। यह संख्या सत्तारूढ़ गठबंधन को मजबूत स्थिति में रखती है। खास बात यह है कि एनसीपी के 41 विधायक अपने दम पर एक उम्मीदवार को राज्यसभा भेजने में सक्षम हैं।
आशीर्वाद मिलेगा या टकराव बढ़ेगा?
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि अंकगणित पार्थ पवार के पक्ष में है, लेकिन असली सवाल राजनीतिक सहमति का है। क्या शरद पवार अपनी संभावित खाली होने वाली सीट के लिए पार्थ को आगे बढ़ाएंगे, या फिर पवार परिवार के दोनों राजनीतिक धड़ों के बीच विरासत को लेकर खींचतान जारी रहेगी? फिलहाल यही सवाल महाराष्ट्र की राजनीति में सबसे बड़ा सस्पेंस बना हुआ है।












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