क्या Nirbhaya Fund SUV Y Plus श्रेणी की सुरक्षा वाले विधायकों के लिए भेजी गई ? कठघरे में CM एकनाथ शिंदे !
महाराष्ट्र में CM एकनाथ शिंदे कठघरे में आते दिख रहे हैं। एक रिपोर्ट में आरोप लगा है कि निर्भया फंड से खरीदी कई SUV मुख्यमंत्री के समर्थक विधायकों की सुरक्षा में भेजी गई। इन MLAs को Y श्रेणी की सुरक्षा मिली हुई है।

महाराष्ट्र में शिवसेना में पड़ी दरार के बाद एकनाथ शिंदे भाजपा के समर्थन से मुख्यमंत्री तो बन गए, लेकिन उनके खेमे के विधायकों के कारण सीएम शिंदे अक्सर सुर्खियों में रहते हैं। ताजा घटनाक्रम में मुख्यमंत्री शिंदे के समर्थक विधायकों पर आरोप लगा है कि उनकी सुरक्षा के लिए निर्भया फंड से खरीदी गई अत्याधुनिक गाड़ियों का इस्तेमाल हो रहा है।
एस्कॉर्ट वाहनों के रूप में Nirbhaya Fund SUV
Nirbhaya Fund SUV Y Plus सिक्योरिटी वाले विधायकों की सुरक्षा में भेजे जाने के आरोप लगने के बाद मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे कठघरे में आते दिख रहे हैं। विपक्षी दलों के आक्रामक तेवरों के कारण उनकी किरकिरी भी हो रही है। इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक निर्भया फंड से खरीदी गई एसयूवी को शिंदे खेमे के विधायकों को वाई-प्लस सुरक्षा देने के लिए डायवर्ट किया गया। इस रिपोर्ट में कहा गया है कि इन गाड़ियों का इस्तेमाल महिलाओं के खिलाफ अपराधों से लड़ने के लिए किया जाता है, लेकिन इसी साल जुलाई से सत्तारूढ़ एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाले शिवसेना गुट के सांसदों और विधायकों के लिए एस्कॉर्ट वाहनों के रूप में Nirbhaya Fund SUV का उपयोग किया जा रहा है।
कौन सी गाड़ियां खरीदी गईं, 9 साल पहले हुआ फंड का प्रावधान
निर्भया फंड के तहत मुंबई पुलिस ने कई वाहन खरीदे हैं। इस साल जून में, मुंबई पुलिस ने निर्भया फंड के तहत 30 करोड़ रुपये से अधिक की लागत से 220 बोलेरो, 35 Ertiga, (दोनों वाहन चार पहिया) 313 पल्सर बाइक और 200 एक्टिवा (दो पहिया वाहन) खरीदे। केंद्र सरकार ने 2013 में राज्य सरकारों के लिए निर्भया फंड से जुड़ी योजनाओं को लागू करने के लिए कोष का इंतजाम किया था। केंद्र द्वारा निर्धारित इस कोष से महिलाओं की सुरक्षा संबंधी उपाय किए जाते हैं। रिपोर्ट के मुताबिक महाराष्ट्र में निर्भया फंड से खरीदी गई तमाम गाड़ियों को जुलाई तक अलग-अलग पुलिस थानों में वितरित कर दिया गया था।
वापस भेजी गई गाड़ियां, लेकिन...
खबर में कहा गया है कि एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाले बालासाहेबंची शिवसेना गुट (Balasahebanchi Shiv Sena) के सभी 40 विधायकों और 12 सांसदों को "वाई-प्लस विद एस्कॉर्ट" सुरक्षा प्रदान की जा रही है। महाराष्ट्र में सत्तारूढ़ गठबंधन का हिस्सा इन नेताओं की सुरक्षा के लिए जुलाई में, 47 बोलेरो की तत्काल मांग की गई थी। वीआईपी सुरक्षा विभाग के एक आदेश के बाद मुंबई पुलिस के मोटर ट्रांसपोर्ट (एमटी) विभाग ने पुलिस स्टेशनों से 47 बोलेरो मांगे। 17 को वापस भेज दिया गया, जबकि 30 गाड़ियों को वापस किया जाना बाकी है।
थानों में वाहन की कमी, फिर भी...
बता दें कि "वाई-प्लस विद एस्कॉर्ट" श्रेणी की सुरक्षा प्राप्त विधायकों-सांसदों को एक एस्कॉर्ट वाहन और पांच पुलिसकर्मी मिलते हैं। सुरक्षाबल 24 घंटे ड्यूटी पर रहते हैं। इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट में एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने नाम न छापने की शर्त पर कहा, नए बोलेरो को जून में विभिन्न पुलिस इकाइयों के बीच वितरित किया गया था, उनकी खरीद के तुरंत बाद, कुछ पुलिस स्टेशनों में महत्वपूर्ण कमी (वाहनों की कमी) दूर हुई। ये थाने वाहनों की कमी से जूझ रहे थे।
वीआईपी की सुरक्षा में...
अधिकारी ने कहा, बोलेरो को मुख्य रूप से शहर भर के 95 पुलिस स्टेशनों में भेजा गया था। अधिकार क्षेत्र के आकार और संवेदनशीलता के आधार पर, कुछ पुलिस थानों को एक बोलेरो मिली, कुछ को दो गाड़ियां मिलीं। हालांकि थानों में बोलेरो पहुंचने के कुछ दिनों के भीतर ही थानों को अपनी बोलेरो वापस करने को कह दिया गया ताकि वीआईपी की सुरक्षा में इनका इस्तेमाल किया जा सके।
निर्भया फंड से खरीदी गई सभी गाड़ियां नहीं भेजी गई
खबर के मुताबिक वाहनों की व्यवस्था करने के लिए जिम्मेदार मोटर परिवहन विभाग के सूत्रों ने कहा कि वीआईपी सुरक्षा की आवश्यकता को पूरा करने के लिए कहे जाने के बाद 30 से अधिक वाहनों को शहर भर के पुलिस थानों से "अस्थायी" रूप से हटा लिया गया था। हालांकि, जब कुछ हफ्तों के बाद भी वाहन वापस नहीं किए गए, तो हमें पुलिस थानों से फोन आने लगे कि उनके लिए काम करना मुश्किल हो रहा है। फिर कुछ वाहनों को पुलिस थानों में वापस भेज दिया गया, हालांकि निर्भया फंड से खरीदी गई सभी गाड़ियां नहीं भेजी गई।
क्या पुलिस के पैदल गश्त करने की उम्मीद
आईजी (वीआईपी सुरक्षा) कृष्ण प्रकाश के अनुसार, विधायकों-सांसदों की सुरक्षा के लिए उनकी तरफ से वाहनों की मांग नहीं की गई। केवल एक आदेश जारी कर अपने अधिकार क्षेत्र में रहने वाले विधायकों की सुरक्षा जरूरतों के लिए संसाधन उपलब्ध कराने के लिए कहा गया था। आदेश के बावजूद कुछ थानों ने अपनी नई बोलेरो देने से मना कर दिया। एक उपनगरीय पुलिस स्टेशन के एक वरिष्ठ निरीक्षक ने कहा, ''हमारे छह वाहनों में से तीन मरम्मत के लिए मोटर परिवहन विभाग के पास हैं। अगर हमने बोलेरो भी वापस कर दी, तो क्या हमसे शहर में पैदल गश्त करने की उम्मीद की जाएगी ? इसलिए बोलेरो लौटाने से मना कर दिया गया।" इंस्पेक्टर के मुताबिक गाड़ी नहीं लौटाने का फैसला सही था क्योंकि कई पुलिस स्टेशन जिन्होंने अपने बोलेरो वापस भेजे, उन्हें छह महीने बाद भी गाड़ियां वापस नहीं मिली हैं।
कुछ थानों की गाड़ियां वापस, लेकिन...
मुंबई पुलिस के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि विधायकों के लिए एस्कॉर्ट वाहन उपलब्ध कराने के लिए पुलिस थानों से वाहनों की मांग की गई थी, लेकिन गैप भरने के तुरंत बाद गाड़ियां वापस कर भेज दी गईं। हालांकि, इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट में कहा गया कि नवघर, पंतनगर और एमआईडीसी पुलिस स्टेशनों को दो से तीन महीने के बाद अपने वाहन वापस मिल गए, लेकिन साकी नाका, देवनार, ट्रॉम्बे, भांडुप और मुलुंड सहित कई अन्य थानों में अभी तक वाहन वापस नहीं भेजे गए। यहां से एक-एक बोलेरो को ले जाया गया। नेहरू नगर और शिवाजी नगर पुलिस स्टेशन से भी दो-दो बोलेरो भेजे गए, लेकिन अभी भी गाड़ियां वापस नहीं भेजी गई हैं।
संवेदनशील थानों में वाहनों का अभाव
जिन थानों में बोलेरो नहीं हैं, उनके बारे में अधिकारी का कहना है कि ये सभी संवेदनशील पुलिस स्टेशन हैं जहां कानून व्यवस्था बनाए रखने और महिलाओं के खिलाफ अपराधों से लड़ने के लिए गश्त एक महत्वपूर्ण प्रैक्टिस है। एक उपनगरीय पुलिस स्टेशन के अधिकारी ने कहा, जब से हमारी बोलेरो छीनी गई है, हमें अभियुक्तों को अदालत तक ले जाने के लिए अन्य पुलिस स्टेशनों के वाहनों या यहां तक कि निजी वाहनों का उपयोग भी करना पड़ रहा है।
तीन साल बाद खरीदी गई गाड़ियां !
एमटी विभाग के सूत्र ने कहा कि पुलिस विभाग ने जून में जो बोलेरो खरीदी थी, वह पुलिस थानों के लिए वाहनों की कमी को पूरा करने के लिए थी। अधिकारी ने कहा, 2019 के बाद से पहली बार वाहनों की खरीद हुई थी। कई वर्षों से, पुलिस वाहनों की खरीद में नहीं बढ़ाई गई है।
शिवसेना प्रवक्ता क्या बोले ?
विवाद के बीच शिंदे गुट के प्रवक्ता किरण पावस्कर ने कहा, 'मुझे नहीं पता कि हमारे विधायकों के लिए कितनी गाड़ियों का इस्तेमाल किया जा रहा है।' वाई प्लस सिक्योरिटी पर उन्होंने कहा, हमारे विधायकों को ठाकरे गुट की तरफ से गद्दार और खोका जैसे ताने लगातार मारे गए। इस कारण उपजे खतरे को देखते हुए वाई-प्लस एस्कॉर्ट सुरक्षा दी गई है।












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