Mumbai Local Train: सेंट्रल रेलवे ने दी है ऐसी खतरनाक सलाह, मान ली गई तो यात्रियों की बढ़ जाएगी मुश्किल

Mumbai Local Train: सेट्रल रेलवे के लोकल ट्रेन के यात्रियों को अक्सर देरी, तकनीकी खराबी और भीड़भाड़ का सामना करना पड़ता है। इन समस्याओं को हल करने के लिए लोकल ट्रेनों की संख्या बढ़ाने की मांग लगातार उठ रही है। इसकी को ध्‍यान में रखते हुए, वरिष्ठ रेलवे अधिकारियों ने एक रिसर्च रिपोर्ट पेश की है, जिसमें लोकल फेरे बढ़ाने के लिए खतरनाक सलाह दी गई है। जिसे अगर लागू कर दिया गया था यात्रियों को बहुत असुविधा हो जाएगी।

रेलवे अधिकारियों ने सुझाया है कि एक छोर से दूसरे छोर तक लगातार ट्रेन चलाने के बजाय, मार्गों को स्वतंत्र सेक्‍सन में बांटकर लोकल ट्रेनों का संचालन किया जाए। इसका मतलब यह होगा कि यदि कोई यात्री CSMT से कर्जत या कसारा जाना चाहता है, तो उसे ठाणे में उतरकर ट्रेन बदलनी होगी। फिर उसे ठाणे-कल्याण, और उसके बाद कल्याण-कर्जत या कल्याण-कसारा के लिए अलग ट्रेन लेनी पड़ेगी। इसे "रोग से ज़्यादा इलाज ख़तरनाक" वाली स्थिति माना जा रहा है।

Mumbai Local Train

मुंबई लोकल जैसी व्‍यवस्‍था करने का विकल्‍प सुझाया

यह अध्ययन रिपोर्ट मध्य रेलवे के मुंबई डिवीजन के पूर्व मंडल रेल प्रबंधक रजनीश गोयल ने पेश की है, जिसका उद्देश्य मौजूदा लोकल फेरों में 45% की वृद्धि करना है। रिपोर्ट का मुख्य आधार रेलवे संचालन में बदलाव है, जिसके लिए मेट्रो रेल के संचालन मॉडल को अपनाया गया है। जिस प्रकार एक मेट्रो मार्ग से दूसरे मेट्रो मार्ग पर जाने के लिए स्टेशन बदलना पड़ता है, उसी तर्ज पर लोकल ट्रेनों के फेरों में वृद्धि के लिए यह विकल्प सुझाया गया है।

स्‍लो स्‍पीड वाली ट्रेनों के मार्गो के फ्री सेक्‍सन

रिपोर्ट के अनुसार, धीमी गति के मार्गों को CSMT-ठाणे, ठाणे-कल्याण, कल्याण-कसारा, कल्याण-कर्जत और कर्जत-खोपोली जैसे स्वतंत्र सेक्‍शन में बांटा जाएगा। वहीं, तेज गति के मार्गों पर CSMT-कल्याण एक ही खंड होगा। ट्रांस-हार्बर मार्ग के लिए ठाणे/कलवा-वाशी/नेरुल और CSMT-पनवेल के पुनर्गठन का प्रस्ताव है।

इन मार्गों पर स्वतंत्र ट्रेनें, लोको पायलट, समय-सारणी और समर्पित लोको पायलट व ट्रेन मैनेजर होंगे। रिपोर्ट का दावा है कि इससे किसी भी खंड में खराबी आने पर उसका असर दूसरे खंडों पर नहीं पड़ेगा।

रिसर्च में यह भी दावा किया गया है कि यदि लोकल ट्रेनों का संचालन मेट्रो की तरह किया जाता है, तो लगभग 1,141 लोकल फेरे बढ़ेंगे। हालांकि, इस रिपोर्ट के कार्यान्वयन का मतलब यह होगा कि लोकल फेरों की वृद्धि एक कठिन और लंबी प्रक्रिया साबित होगी, और खोपोली, कसारा तथा कर्जत के यात्रियों को अपनी मंजिल तक पहुंचने के लिए बार-बार ट्रेनें बदलनी पड़ेंगी। इस अवधारणा का यात्रियों द्वारा कड़ा विरोध होने की प्रबल संभावना है।

34 फेरों की जगह 120 फेरे चलाना संभव होगा।

रिसर्च रिपोर्ट के अनुसार, कल्याण-कसारा धीमी गति के मार्ग पर मौजूदा 152 फेरों की जगह 480 फेरे, कल्याण-कर्जत स्‍लो स्‍पीड के मार्ग पर 208 की जगह 480 और CSMT-कल्याण तेज गति के मार्ग पर 270 की जगह 480 फेरे चलाए जा सकेंगे। कर्जत से खोपोली के बीच धीमी गति के मार्ग पर मौजूदा 34 फेरों की जगह 120 फेरे चलाना संभव होगा।

कुल फेरों की संख्या 3,670 हो जाएगी

वर्तमान में, मध्य रेलवे पर प्रतिदिन 1,810 फेरे लगते हैं। यदि इन्हें स्वतंत्र खंडों में विभाजित किया जाता है, तो फेरों की संख्या 2,529 हो जाएगी। खंडवार लोकल संचालन से 1,141 नए फेरे बढ़ाना संभव होगा, जिससे कुल फेरों की संख्या 3,670 हो जाएगी।

रिपोर्ट में कल्याण में नए प्लेटफॉर्म, मेल-एक्सप्रेस ट्रेनों के संचालन के लिए कोचिंग कॉम्प्लेक्स, लोकल ट्रेनों के लिए पार्किंग लाइन और ठाकुरली में 50 से 70 साइडिंग के साथ नया कारशेड जैसी बुनियादी सुविधाओं की आवश्यकता बताई गई है। साथ ही, सानपाड़ा ईएमयू वर्कशॉप को ठाकुरली स्थानांतरित करने का भी सुझाव दिया गया है। परेल, कुर्ला, डोंबिवली, अंबरनाथ, टिटवाला और बदलापुर में आवश्यक प्लेटफॉर्म चौड़ाई और दोनों ओर प्लेटफॉर्म की व्यवस्था जैसी बुनियादी सुविधाओं की भी सिफारिश की गई है।

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